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Uttarkashi Tunnel Rescue: सिल्कयारा सुरंग की घटना से देश को मिले हैं कौन से दो सबक?

Uttarkashi Silkyara Tunnel Rescue News in Hindi: चंद्रयान 3 के 23 अगस्त, 2023 को चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव पर सफल लैंडिंग के करीब तीन महीने बाद सिल्कयारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को सुरक्षित निकालकर भारत ने दुनिया को अपनी एक और क्षमता का परिचय दिया है।

भविष्य में अब जब कभी भी विश्व के किसी भी कोने में इस तरह का संकट खड़ा होगा तो दुनिया वालों को 28 नवंबर, 2023 की तारीख और सिल्कयारा सुरंग निश्चित तौर पर हौसला देगा। उत्तराखंड के इस सुरंग में 17 दिनों तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन और उसकी 100% सफलता ऐसी दुर्घटनाओं के लिए अब नजीर बन चुका है।

uttarkashi silkyara tunnel rescue

सिल्कयारा से देश को सबक
अगर इस दुर्घटना और उसके सुखांत परिणाम की बात करें तो सिल्कियारा सुरंग ने हमें सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह के सबक सिखाए हैं। आज देश इस बात पर गर्व कर सकता है कि जिस तरह से विभिन्न एजेंसियों ने आपसी तालमेल के साथ एक मिशन के साथ इस रेस्क्यू ऑपरेशन को सफल बनाया है, वह हमारे लिए बहुत बड़ा सबक है।

देश के शीर्ष नेतृत्व से लेकर रैट माइनर जैसे छोटे मजदूरों के बीच पूरी तालमेल के साथ राहत कार्य को अंजाम दिया गया, उसी का नतीजा है कि 41 लोग आज सकुशल अपने परिवार वालों के साथ हैं।

हौसले और तालमेल से जीत ली जिंदगी की जंग
ये 41 मजदूर सिल्कयारा-बड़कोट के बीच बन रही 4.5 किलोमीटर लंबी सभी मौसम में काम आने वाली सुरंग के निर्माण के दौरान मलबा गिरने से फंस गए थे। राहतकर्मियों की चुनौती कठिन थी। 57 मीटर की खुदाई होनी थी, जिनमें से 12 मीटर की खुदाई हाथ से करने की नौबत आ गई थी। क्योंकि, कई बार दांव उलटे पड़ चुके थे। लेकिन, राहत की बात ये रही कि राहतकर्मियों ने कभी भी हौसले की हार नहीं होने दी।

मल्टीएजेंसी समन्वय का बेहतरीन उदाहरण
रेस्क्यू का जिम्मा एनडीआरएफ और राज्य में उसकी सहयोगी एजेंसी ने तो संभाल ही रखा था। 5 अन्य एजेंसियों ने भी उनका सहयोग किया, जिसमें ओएनजीसी भी शामिल है। थल सेना ने अपनी इंजनीयर कोर मद्रास सैपर्स को यहां उतारा।

एक-एक जिंदगी महत्वपूर्ण थी, इसलिए सरकार ने विदेशी एक्सपर्ट से मदद लेने में भी झिझक नहीं दिखाई; और मैच के हीरो रहे रैट-माइनर को तो कभी नजरअंदाज ही नहीं किया जा सकता, जो उस तकनीक से खनिज खनन के लिए जाने जाते हैं, जिसपर अब प्रतिबंध है।

यह मिशन सफल इसलिए हुआ कि इतनी सारी एजेंसियां, देश के शीर्ष से लेकर निचले स्तर तक के राहतकर्मियों ने आपस में गजब का समन्वय दिखाया। यह ऑपरेशन देश पर आगे आने वाले बड़े से बड़े संकट के लिए भी एक उदाहरण की तरह काम करेगा और उससे उबरने का हौसला देगा।

भारत जैसे विशाल देश के भविष्य के लिए इससे अच्छा सबक क्या हो सकता है कि इरादा नेक हो, नेतृत्व सुलझा हुआ हो और सबसे बढ़कर देशवासियों के दिलो दिमाग में दूसरे भारतीय को जिंदा निकलते देखने की ललक और मुंह पर दुआ के बोल हों, तो कुछ भी असंभव नहीं है।

विकास और पर्यावरण में संतुलन बनाने का सबक
लेकिन, भावनात्मकता के इन पलों से अगर निकलकर बाहर देखें तो सिल्कयारा ने हमें यह भी सबक सिखाया है कि देश का विकास बहुत जरूरी है, लेकिन यह पर्यावरण को संकट में डालने की कीमत पर कबतक मुमकिन है।

मसलन जिस चारधाम महामार्ग परियोजना पर काम चल रहा है, उसपर निश्चित रूप से विचार करने की जरूरत है कि क्या हमें अपनी नीतियों में संशोधन की आवश्यकता आ चुकी है।

खुशी की बात ये है कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसपर बहुत ही सकारात्मक रुख अपनाया है। यह सच है कि हम देश के विकास को रोक नहीं सकते, लेकिन यह भी उतना ही कटु सत्य है कि हम पर्यावरण के संतुलन को इस तरह से जोखिम में नहीं डाल सकते, जिससे जानमाल ही आपत में पड़ जाए।

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