महाशिवरात्रि पर उत्तराखंड की हसीन वादियों के बीच होगा 'कैटरीना, प्रियंका और दीपिका' का स्वयंवर
आयोजन से जुड़े रूपेश राय बताते हैं कि बकरियों की ब्रीड को उन्नत बनाने के लिए उनके विवाह की प्लानिंग की गयी है। क्योंकि अलग नस्ल की बकरियों के क्रास से बकरियों की बेहद अच्छी नस्ल तैयार होती है।
देहरादून। कल महाशिवरात्रि है और इस शुभ मुहूर्त पर कैटरीना, प्रियंका और दीपिका शादी करेंगी। इस शादी को खास और यादगार बनाने के लिए उत्तराखंड की हसीन वादियों को चुना गया है। खास बात यह है कि शादी स्वयंवर स्टाइल में होगी और आप भी इसमें आमंत्रित हैं। अरे...अरे.... चौंकिए नहीं ये कैटारीना, प्रियंका और दीपिका बॉलीवुड एक्ट्रेस या कोई लड़की नहीं बल्कि तीन बकरियां हैं। जी हां आपने बिल्कुल ठीक पढ़ा। महाशिवरात्रि के पावन मौके पर उत्तराखंड के टिहरी जिले में इन तीनों बकरियों का स्वयंवर होने जा रहा है। खास बात ये है कि इन तीन बकरियों के स्वयंवर में 15 बकरों में बाजी लगी हुई है।

बकरियां कैसे चुनेंगी हमसफर
3 बकरियां है और 15 बकरे। यानी कि एक बकरी के साथ 5 बकरे। होगा भी ऐसा ही। एक बकरी के साथ 5 बकरों को एक बाड़े में छोड़ा जाएगा। जिस एक बकरे में बकरी इंट्रेस्ट दिखाएगी, वही उसका जीवन साथी चुना जाएगा। इसी तरह तीनों बकरियों को मनचाहा हमसफर मिल सकेगा।

रीति रिवाज से होगी शादी
पशुपालन विभाग, टिहरी के पशुपालन अधिकारी बीएस रावत ने बताया कि इन बकरियों की शादी पूरे पारंपरिक रीति रिवाज के साथ होगी। शादी में बराती, घराती और मेहमान के अलावा पंडित भी मौजूद रहेंगे। ईटीवी-यूपी/उत्तराखंड की एक खबर के मुताबिक मेंहदी, हल्दी, तिलक और विदाई की रस्में भी निभाई जाएंगी। वहीं इस स्वयंवर में पशु पालन और भेड़ एवं बकरी पालन जैसे विभागों के चिकित्सक भी भाग लेंगे।

क्या है इस शादी का मकसद
आसपास के गांव के लोगों को बाराती बनाया गया है, जिससे लोगों को बकरी पालन के उन्नत तरीके समझाए जा सकें। बकरी स्वयंवर के जरिये लोगों को बकरी के दूध के उत्पादों की भी जानकारी दी जायेगी। रावत ने बताया कि नाग टिब्बा में ग्रीन पीपुल संस्था के साथ मिलकर बकरी स्वयंवर को किया जा रहा है।

नस्ल अच्छी हो इसलिए शादी का प्लान
आयोजन से जुड़े रूपेश राय बताते हैं कि बकरियों की ब्रीड को उन्नत बनाने के लिए उनके विवाह की प्लानिंग की गयी है। क्योंकि अलग नस्ल की बकरियों के क्रास से बकरियों की बेहद अच्छी नस्ल तैयार होती है। जिसके लिए आसपास के सभी गाँव के लोगों को भी इस स्वयंवर में बुलाया गया है, जिससे लोग पहाड़ों में बकरी पालन की ओर अपना रुझान बढ़ाएं।












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