बद्रीनाथ धाम के कपाट हुए बंद, जानें अब कब मिलेगा भक्तों को भगवान का दर्शन
बद्रीनाथ धाम के कपाट हुए बंद,जानें अब कब मिलेगा भक्तों को भगवान के दर्शन
नई दिल्ली। उत्तराखंड में स्थित हिंदुओं का पवित्र तीर्थ बद्रीनाथ धाम के कपाट सर्दियों के मौसम में हर बार की तरह इस बार भी बंद कर दिए गए हैं।अलकनंदा नदी के किनारे स्थित यह हिंदू धर्म के चार धामों में शामिल है, यहां भगवान विष्णु 6 माह निद्रा में रहते हैं और 6 माह जागते हैं, बद्रीनाथ मंदिर को बद्रीनारायण मंदिर भी कहते हैं, जो कि अलकनंदा नदी के किनारे स्थित इस मंदिर में अखण्ड दीप जलता है, यह दीप अचल ज्ञानज्योति का प्रतीक है। परंपरा के अनुसार केदारनाथ धाम मंदिर और गंगोत्री मंदिर को दो दिन पहले ही बंद कर दिया गया है।

अभिजीत शुभ मुहूर्त में बंद किए मंदिर के कपाट
देवस्थानम बोर्ड ने मंदिर के कपाट बंद होने के बाद में जानकारी देते हुए बताया कि उत्तराखंड के बद्रीनाथ मंदिर (Badrinath Temple) के कपाट कार्तिक शुक्ल पंचमी उत्तराषाढ़ा नक्षत्र गुरुवार की दोपहर 3.35 अभिजीत शुभ मुहूर्त में बंद किए गए हैं। सर्दियों के मौसम में बद्रीनाथ में भारी बर्फबारी में ये मंदिर बर्फ में ढक जाता है। ठंड का मौसस शुरू होते ही यहां पिछले कई दिनों से यहां का मौसम बहुत ठंडा रहने लगा है, यहां बर्फबारी भी हो रही है। जगह-जगह बर्फ जमी हुई है।

कोरोना काल में भगवान बद्रीनाथ के दर्शन के लिए पहुंचे 1.45 लाख भक्त
गुरुवार को बद्रीनाथ के कपाट बंद होने के मुहुर्त पर धाम में लगभग पांच हजार श्रद्धालु उपस्थित थे। कोरोना महामारी के चलते इस वर्ष लगभग 1.45 लाख भक्त ही दर्शन कर पाए वहीं पिछले वर्ष 12.40 लाख से ज्यादा भक्त दर्शन के लिए पहुंचे थे। शीत ऋतु में ठंड और बर्फबारी की वजह से पूरा क्षेत्र बर्फ फैली रहती है। इस वजह से शीतकाल में ये मंदिर बंद किया जाता है।

अब नारद मुनि करेंगे बद्रीनाथजी की पूजा
हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार बद्रीनाथधाम के कपाट बंद होने के बाद यहां बद्रीनाथ भगवावन की हर दिन पूजा नारद मुनि करते हैं। बद्रीनाथ में एक लीलाढुंगी नामक स्थान है जहां नारदजी का मंदिर है। कपाट बंद होने के बाद बद्रीनाथ में पूजा की जिम्मेदारी नारदमुनि को सौंप दी जाती है।

बद्रीनाथ धाम में भगवान के 5 स्वरूपों की पूजा की जाती है
बता दें बद्रीनाथ धाम में भगवान के 5 स्वरूपों की पूजा की जाती है। विष्णुजी के इन पंच स्वरूपों को 'पंच बद्री' कहा जाता है। बद्रीनाथ के मुख्य मंदिर के अलावा यहां पर अन्य 4 स्वरूपों के मंदिर भी हैं। श्री विशाल बद्री पंच स्वरूपों में मुख्य हैं। पंच केदारों में ग्यारहवें ज्योर्तिलिंग बाबा केदारनाथ धाम के कपाट 16 नवंबर को तृतीय केदार तुंगनाथजी के कपाट 4 नवंबर को, चतुर्थ केदार रूद्रनाथ के कपाट 17 अक्टूबर को बंद किए जा चुके हैं। चार धामों में गंगोत्री धाम के कपाट 15 नवंबर को, यमुनोत्री धाम के 16 नवंबर बंद किए गए और सबसे बाद में बद्रीनाथ के कपाट बंद हुए।

भगवान विष्णु ने तप किया था
बद्रीनाथधाम ही वो जगह हैं जहां भगवान विष्णु ने तप किया था नरनारायण की बद्री नामक वन तप स्थली है। महाभारत काल में नर-नारायण ने भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के रूप में अवतार लिया था। यहां श्री योगध्यान बद्री, श्री भविष्य बद्री, श्री वृद्ध बद्री, श्री आदि बद्री इन सभी रूपों में भगवान बद्रीनाथ निवास करते हैं।

जानिए भक्तों के लिए कब खुलेंगे बद्रीनाथ धाम के कपाट
ठंड समाप्त होने के बाद और बर्फ गिरना जब बंद हो जाएगी इसके बाद अप्रैल 2021 में में शुभ मुहुर्त में मंत्रोच्चार और विधि-विधान से पूजा अर्चना के साथ गणेश जी की पूजा के बाद कपाट खुलेंगे। बद्रीनाथ के कपाट खुलने की तारीख टिहरी राजघराना तय करता है। बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि बसंत पंचमी को टिहरी राज दरबार पंचांग गणना के आधार पर होती है। ऐसे में राजघराने के पास कपाट खुलने की तारीख आगे बढ़ाने का अधिकार है। कोरोना काल में 2020 में बद्रीनाथ धाम के इतिहास में पहली बार निर्धारित तिथि के अनुरूप तिथि में बदलाव किया गया था। बता दें 2020 में कोरोना काल में ये अप्रैल माह में ये बद्रीनाथ के कपाट खोले गए थे। भगवान बदरीनाथ के साथ ही भगवान धनवतंरि की भी विशेष पूजा की गई थी। आयुर्वेद के देवता धनवंतरि की पूजा दुनिया भर में फैली महामारी को खत्म करने के लिए की जाएगी












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