किसी मंत्री को अपनी नहीं लगी उत्तर प्रदेश की झांकी
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। गणतंत्र दिवस की परेड में राजपथ पर जब उत्तर प्रदेश की झांकी निकली तब कोई मंत्री खड़ा नहीं हुआ। किसी ने तालियां नहीं बजाईं। दरअसल जिस प्रदेश की झांकी जैसे ही निकलती वैसे ही उस प्रदेश के मंत्री व अन्य राजनेता खड़े होकर अपने प्रदेश की झांकी का सम्मान करते। मगर उत्तर प्रदेश की झांकी जब निकली तो कोई खड़ा नहीं हुआ। हालांकि कहा यह जाता है कि सबसे अधिक मंत्री इसी राज्य से हैं। मगर कौन खड़ा होता। यहां से जीते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात की झांकी के सम्मान में खड़े हुए।

टीवी की नजर
राजनाथ पर टीवी की नजर नहीं गई। वीके सिंह भले गाजियाबाद से सांसद हों पर वे गाजियाबाद का नक्शा तक नहीं जानते। वे तो यहां टपके थे। मूल रूप से हरियाणा के हैं। महेश शर्मा नोएडा से सांसद हैं पर वे खड़े राजस्थान की झांकी को देखकर हुए। आखिर वे अलवर के जो हैं बाकी जो बचे उनमें से उमा भारती बहुत सक्रिय मंत्री हैं। और मध्य प्रदेश की झांकी के राजपथ पर आते ही वे खड़ी हो गईं और प्रफुल्लित होकर उन्होंने खूब तालियां बजाईं।
बातें करती रहीं उमा
मगर जब यूपी की झांकी निकलीं तो वे न तो खड़ी हुईं न तालियां बजाईं अलबत्ता अपने पास बैठे प्रकाश जावेडकर से बतियाती रहीं। उधर देखा तक नहीं। यह अलग बात है कि उमाजी उत्तर प्रदेश के झांसी से लोकसभा सदस्य हैं। यही हाल मेनका गांधी का रहा। बाकी बचे कलराज, मनोज सिन्हा और रामशंकर कठेरिया। अब उनसे क्या उम्मीद की जाए!
वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ल ने ठीक ही कहा कि यूं भी यूपी ने जिन वाजिदअली शाह की झांकी दिखाई वे अफीमची थे और जब अंग्रेज आ रहे थे तब वे रास नचा रहे थे। यही कारण है कि बादशाह को अंग्रेज पकड़ कर ले गया और पूरा लखनऊ व अवध पिनक में शतरंज खेलता रहा या उमराव जान के कोठे पर पड़ा रहा।












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