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UP Lok Sabha Chunav Result: मुलायम परिवार के 5 प्रत्याशियों में किसकी हालत पतली, कौन जीत रहा चुनाव?

Uttar Pradesh Lok Sabha Election Result 2024: यूपी में समाजवादी पार्टी इस बार 62 सीटों पर चुनाव लड़ रही है और सिर्फ 5 यादव प्रत्याशियों को ही चुनाव लड़ने का मौका दिया है। लेकिन, ये सारे के सारे यादव उम्मीदवार सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के परिवार के ही सदस्य हैं।

मुलायम सिंह यादव के बेटे और सपा प्रमुख अखिलेश यादव खुद उस कन्नौज सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, जहां 2019 में उनकी पत्नी डिंपल यादव हार चुकी हैं। डिंपल मैनपुरी से मौजूदा सांसद हैं और इस चुनाव में फिर वहीं से भाग्य आजमा रही हैं।

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सपा के सारे यादव उम्मीदवार मुलायम परिवार के सदस्य
अखिलेश और डिंपल यादव के अलावा उनके परिवार के 3 और सदस्य चुनाव मैदान में हैं। धर्मेंद्र यादव आजमगढ़, अक्षय यादव फिरोजाबाद और आदित्य यादव बदायूं से चुनावी मैदान में हैं। जिन सीटों पर मुलायम का कुनबा चुनाव मैदान में हैं, उन सभी पर पिछले चरणों में वोटिंग हो चुकी है।

सिर्फ पार्टी की फर्स्ट फैमिली के यादव उम्मीदवारों को ही मौका देने के बारे में सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी दावा करते हैं कि इसके लिए सिर्फ जीत की संभावनाओं को ही प्राथमिकता दी गई है। उनका कहना है, 'इस कदम के लिए पार्टी में हर किसी की मंजूरी थी। कई सीटों पर यादव नेताओं ने ही अन्य जातियों के नामों का प्रस्ताव रखा। इस बार विभिन्न समुदायों के नेताओं को अवसर दिया गया है।'

2019 में मुलायम परिवार ने 2 सीटें जीतीं, 3 पर हार गए
2019 के लोकसभा चुनाव में भी मुलायम के परिवार के पांच ही लोग चुनाव लड़े थे। इनमें मुलायम मैनपुरी से और अखिलेश आजमगढ़ से तो जीत गए थे। लेकिन, सपा-बसपा के गठबंधन के बावजूद फिरोजाबाद से अक्षय यादव, कन्नौज से डिंपल यादव और बदायूं से धर्मेंद्र यादव को हार का सामना करना पड़ा।

2014 के चुनाव में मुलायम परिवार को ही मिली थी सपा की पांचों सीट
हालांकि, 2014 के मोदी लहर भी मुलायम परिवार का सिक्का चल गया था। सपा ने तब भी पांच ही सीटें जीती थीं और सारी परिवार की सीटें थीं। खुद मुलायम मैनपुरी और आजमगढ़ दोनों से जीते थे। वहीं बदायूं से धर्मेंद्र, कन्नौज से डिंपल और फिरोजाबाद से अक्षय यादव को कामयाबी मिली थी।

कन्नौज सीट पर अखिलेश का क्या होगा?
कन्नौज लोकसभा सीट पर पिछली बार भाजपा की जीत का मार्जिन एक फीसदी से कुछ अधिक वोटों का था। लेकिन, तब बसपा और सपा के बीच गठबंधन भी हुई था। कांग्रेस ने तब भी यहां से उम्मीदवार नहीं दिए थे। दूसरी तरफ बीजेपी ने इस बार मौजूदा सांसद सुब्रत पाठक को ही मौका दिया है। ऐसे में बीएसपी के इमरान बिन जफर को जो भी वोट मिलेंगे, वह अखिलेश की ही परेशानी बढ़ा सकते हैं।

मैनपुर में डिंपल रह सकती हैं रेस में आगे
लेकिन, मैनपुरी सीट पर डिंपल यादव रेस में आगे रह सकती हैं। वह यहां से मौजूदा सांसद भी हैं। मुलायम परिवार का गढ़ मानी जाने वाली यह सीट आजतक भाजपा के कब्जे में नहीं आई है और यादव मतदाता बहुल इस सीट पर 26 साल से सपा कोई चुनाव हारी नहीं है।

लेकिन, बीजेपी ने यहां से इस बार पूर्व सपाई और प्रदेश के कैबिनेट मंत्री जयवीर सिंह को टिकट देकर डिंपल की राह मुश्किल करने का दांव जरूर चला है। वह मैनपुरी सदर सीट से 2022 में सपा प्रत्याशी को हराकर सबको चौंका चुके हैं।

आजमगढ़ में दिख रही है कांटे की टक्कर
आजमगढ़ लोकसभा सीट उपचुनाव में बीजेपी सपा से छीन चुकी है। लेकिन, इस बार पार्टी के मौजूदा सांसद दिनेश लाल यादव 'निरहुआ' के मुकाबले समाजवादी पार्टी ने फिर से धर्मेंद्र यादव को ही उतारा है। यहां निरहुआ जीते तो जरूर थे, लेकिन उनकी जीत का अंतर बहुत कम था। इस बार परिवार की सीट वापस लेने के लिए अखिलेश यादव का पूरा परिवार यहां लगातार कैंप कर चुका है।

दूसरी तरफ निरहुआ की जीत सुनिश्चित करने के लिए बीजेपी ने भी अपनी पूरी ताकत लगाई है। मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री मोहन यादव तक उनके लिए प्रचार करके गए हैं। ऐसे में आजमगढ़ सीट पर वोटर इस बार किसके पक्ष में लुढ़केंगे इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।

फिरोजाबाद में बसपा प्रत्याशी तय करेगा सपा की हार या जीत?
फिरोजाबाद लोकसभा सीट पर इस बार सपा के अक्षय यादव के मुकाबले बीजेपी ने अपने मौजूदा प्रत्याशी का टिकट काटकर ठाकुर विश्वदीप सिंह को उतारा है। वहीं बसपा से सत्येंद्र जैन मैदान में हैं। 2019 में अगर इस सीट पर मुलायम परिवार आपस में ही नहीं लड़ता तो शायद यहां बीजेपी का कमल खिलना मुश्किल था।

तब अक्षय के चाचा शिवपाल यादव अपनी अलग पार्टी बनाकर चुनाव मैदान में थे। उस हिसाब से इस बार सपा की स्थिति यहां मजूबत लग रही है। लेकिन, बात फिर से बीएसपी उम्मीदवार की मौजूदगी की है और उसे कितने वोट मिलते हैं, उससे यहां सपा और बीजेपी में हार या जीत तय होने की संभावना है।

बदायूं में भी 'हाथी' तय करेगा चुनाव परिणाम?
बदायूं लोकसभा सीट पर इस बार बीजेपी और समाजवादी पार्टी में सीधी लड़ाई दिखी है। इस बार इस सीट पर यादव मतदाता पूरी तरह से सपा के आदित्य यादव के पक्ष में गोलबंद दिखे, लेकिन गैर-यादव वोटरों का रुझान स्पष्ट रूप से बीजेपी के पक्ष में दिखा है।

बीजेपी ने इस बार अपनी मौजूदा सांसद का टिकट काटकर दिग्विजय सिंह शाक्य को उतारा है और इसके चलते उसे संघमित्रा मौर्या के खिलाफ एंटी-इंकंबेंसी काटने में सहायता तो मिली है। हालांकि, पिछली बार भी यहां बीजेपी की जीत का मार्जिन ज्यादा नहीं था, इसलिए उसके सामने सीट बचाने की कड़ी चुनौती है।

लेकिन, बसपा ने पूर्व विधायक मुस्लिम खान को टिकट देकर किसके लिए परेशानी खड़ी की है, यह 4 जून को वोटों की गिनती में ही पता चलेगा। क्योंकि, मुस्लिम खान भले ही मुसलमानों का वोट नहीं ले पाए हों, लेकिन दलित मतदाता बहुल इलाकों में हाथी को दौड़ लगाते देखा गया है। भाजपा को इस स्थिति से खुशी महसूस हो रही होगी, लेकिन मतदाताओं का फैसला जबतक सामने नहीं आता कुछ भी कहना मुश्किल है।

सपा के यादव उम्मीदवारों का मुलायम सिंह यादव से रिश्ता
बता दें कि अखिलेश यादव और डिंपल यादव मुलायम सिंह यादव के बेटे और बहू हैं तो आदित्य यादव उनके भाई और जसवंतनगर के विधायक शिवपाल यादव के बेटे हैं। वहीं अक्षय यादव मुलायम के चचेरे भाई और राज्यसभा सांसद राम गोपाल यादव के बेटे हैं। धर्मेंद्र यादव मुलायम के भाई अभय राम यादव के बेटे हैं, जो राजनीति से दूर रहते हैं।

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