UP Lok Sabha Chunav Result: यूपी में साइलेंट महिला वोटर किसे जिता रहीं चुनाव? 4 जून को चौंकाएंगे नतीजे!
Uttar Pradesh Lok Sabha Election Result 2024: उत्तर प्रदेश में जैसे-जैसे चुनाव के चरण आगे बढ़े हैं, पुरुषों के मुकाबले महिला वोटर ज्यादा से ज्यादा तादाद में मतदान करने के लिए निकली हैं। यह ट्रेंड इस बार कई दूसरे हिंदी भाषी राज्यों में भी दिख रहा है। सबसे बड़ा तथ्य ये है कि इन महिला वोटरों में बहुत बड़ी तादाद साइलेंट मतदाताओं की है।
कौन हैं साइलेंट महिला वोटर?
साइलेंट वोटर उन्हें कहते हैं, जिनके राजनीतिक दलों के प्रति दिलचस्पी का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। यह चुनावी चर्चाओं के बारे में ज्यादा खुलकर बात नहीं करती हैं, लेकिन जिस भी दल या उम्मीदवारों को एक बार मन में बिठा लेती हैं, बिना किसी प्रलोभन या दबाव में आए चुपचाप से उनके लिए ईवीएम पर बटन दबा आती हैं।

पुरुषों से ज्यादा महिलाओं के मतदान का ट्रेंड
अगर मोटे तौर पर यूपी में पिछले दो चरणों यानी पांचवें और छठे दौर के चुनाव को ही देखें तो 25 मई को पुरुषों के मुकाबले 6% से ज्यादा महिला वोटरों ने मतदान किया। वहीं 20 मई को भी करीब 1% ज्यादा महिलाएं वोट डालने के लिए ईवीएम मशीन तक पहुंचीं।
सातवें और अंतिम चरण की 13 सीटों पर भी यही ट्रेंड नजर आने की संभावना है। यूं तो यूपी में चुनाव है तो हर फेज में जातिगत समीकरण से ही चुनाव नतीजे तय होते हैं। मसलन, पूर्वी यूपी में चुनाव है तो ओबीसी मतदाताओं की बड़ी भूमिका होती है। लेकिन, कहीं ब्राह्मण और ठाकुरों का भी जोर है तो कहीं भूमिहारों की लॉबी भी प्रभावशाली है।
यूपी में दो तरह की साइलेंट महिला वोटर
लेकिन, इन सियासी सच्चाइयों के बीच अगर साइलेंट महिला वोटर कोई चौंकाने वाला नतीजा दे दें तो हमें उसके लिए भी तैयार रहने की जरूरत है। यूपी में मुख्य तौर पर दो तरह की साइलेंट महिला वोटर हैं, एक तो ग्रामीण इलाकों की महिलाएं हैं, जो आमतौर पर एसी कमरों में डिबेट करने वाले चुनाव समीक्षकों की नजरों में नहीं आ पातीं।
दूसरी हैं- केंद्रीय और प्रदेश सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की लाभार्थी महिलाएं। न तो इन महिलाओं की मन की बातों को आसानी से समझा जाता है और न ही ये इतनी वोकल हैं कि अपनी आवाज दूसरों तक पहुंचा पाएं। इनमें से अधिकांश आज भी सोशल मीडिया और तमाम तरह की मीडिया से काफी दूर हैं।
लाभार्थी महिलाएं दिखा सकती हैं अपनी शक्ति
लेकिन, पिछले कुछ वर्षों में इन्हें अपना महत्त्व समझ में आ चुका है और यह एक बहुत ही मजबूत वोट बैंक बनकर उभर रही हैं। इनमें से ज्यादातर को न तो आज हमेशा टॉयलेट के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, और न ही खाना पकाने की जद्दोजहद करनी पड़ रही है। उनके अपने नामों पर घर मिल चुके हैं, घर में रसोई गैस भी है और मुफ्त राशन का भी इंतजाम है।
यूपी की महिलाओं को अब डर नहीं लगता!
इन सब के बीच उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था सुधरने की धारणा आम हो चुकी है। कई महिलाओं को लगता है कि अब वह सुरक्षित हैं, उनकी बेटियां सुरक्षित हैं, उनके परिवार को किसी तरह का खतरा नहीं है। टीओआई ने देवरिया जिले के रामपुरका लाल गांव की पूर्व प्रधान चंदा देवी से बात की तो उन्होंने बताया, 'इसमें कोई संदेह नहीं कि योगी राज में डर नहीं लगता कहीं बाहर जाने में।'
देवरिया से 250 किलोमीटर दूर बस्ती में भी कहानी अलग नहीं है। यहां बाराबंकी-बहराइच हाइवे पर नाथनपुर गांव में किराने की दुकान चलाने वाली एक महिला कहती हैं, 'महिलाओं का भय कम हो गया है।' वह महिलाओं के लिए और बेहतर समाज की उम्मीद कर रही हैं।












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