अमेरिकी थिंक टैंक की बराक ओबामा को सलाह नरेंद्र मोदी को दें बधाई

एग्जिट पोल्स के सभी नतीजों से अब यह साफ हो चुका है कि नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बनेंगे। वही शख्स जिसे अमेरिका ने एक कानून की वजह से वीजा देने से इंकार कर दिया था।
पढे़-पहले व्यक्ति हैं नरेंद्र मोदी जिनके वीजा में एक कानून ने डाली रुकावट
इन सबसे अलग अमेरिकी थिंक टैंक की ओर से बराक ओबामा को सलाह दी गई है कि वह नरेंद्र मोदी तक अपनी पहुंच बनाने की कोशिश करें। थिंक टैंक से अलग अमेरिकी एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि अब अमेरिका को नरेंद्र मोदी के बीच अपनी पहुंच बनानी चाहिए।
वाशिंगटन के एक अग्रणी थिंक टैंक कारनेज एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस की ओर से संचालित हो रहे साउथ एशिया प्रोग्राम के सीनियर एसोसिएट जे टेलीस कहते हैं कि नरेंद्र मोदी के बारे में दुनिया चाहे जो कुछ भी सोचती हो लेकिन अब सभी लोग इस बात पर राजी हैं कि मोदी एक निर्णायक नेता हैं।
टेलीस ने आगे कहा कि नरेंद्र मोदी कई मायनों में हो सकता है कि दोनों देशों के बीच संबंधों को बेहतर करने में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई से बेहतर साबित हों। टेलीस ने यह बातें अपने आर्टिकल 'प्रोडक्टिव बट जॉयलेस' में लिखी हैं।
टेलीस ने अपने इस आर्टिकल में यह भी सलाह दी है कि नरेंद्र मोदी को वर्ष 2002 में हुए दंगों की वजह से वीजा न देने की वजह से दोनों देशों के रिश्तों में कुछ खटास आ गई। टेलीस के मुताबिक यह बात तो स्वाभाविक है कि
वाशिंगटन और नरेंद्र मोदी के बीच होने वाली मुलाकातें या फिर बातचीत की शुरुआत थोड़ी असुविधाजनक होगी। नरेंद्र मोदी के व्यक्तिगत इतिहास की वजह से भारत-अमेरिका रिश्तों में कुछ फर्क आ सकता है।
टेलीस ने लिखा है, 'अगर दोनों पक्ष एक दूसरे के क्षेत्र में हस्तक्षेप से बचें खासकर दक्षिण एशिया में, जहां मोदी की प्राथमिकता भारत की सुरक्षा होगी, अमेरिका भारत के साथ संबंधों में संभावित तौर पर उपयोगी साबित हो सकता है।'
टेलीस के मुताबिक संक्षिप्त तौर पर ओबामा प्रशासन को नरेंद्र मोदी तक सार्वजनिक तौर पर और सौम्यता के साथ अपनी पहुंच बनानी होगी क्योंकि अब यह साफ हो चुका है कि भारत ने उन्हें ही देश का अगला प्रधानमंत्री चुना है।
टेलीस की मानें तो ओबामा की ओर से अगर नरेंद्र मोदी को एक बधाई संदेश अमेरिका के किसी कैबिनेट मेंबर की ओर से या फिर किसी उच्च स्तर के अधिकारी की ओर से दिया जाता है तो इसके काफी दूरगामी परिणाम होंगे।
उनकी मानें तो यह छोटे-छोटे कदम हालांकि वाशिंगटन के लिए नरेंद्र मोदी के पास मौजूद शिकायतों को दूर नहीं करेगा लेकिन फिर भी यह एक ऐसा नेता के साथ अपने संबंधों को बेहतर करने का मौका होगा जो अगले कुछ दिनों में पांच वर्षों तक भारत पर शासन करेगा।












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