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US-Iran Ceasefire: मिडिल ईस्ट में थमी जंग! ट्रंप-ईरान सीजफायर के बाद श्रीनगर के लाल चौक पर जश्न का माहौल

US-Iran Ceasefire: दुनिया के लिए 8 अप्रैल का दिन बड़ी राहत लेकर आया है। हफ्तों से जारी मिडल ईस्ट (पश्चिम एशिया) के भीषण संघर्ष पर आखिरकार अस्थायी विराम लग गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच 15 दिनों के लिए 'युद्धविराम' (Ceasefire) की घोषणा की गई है।

इस कूटनीतिक सफलता के बाद भारत के शिया मुसलमानों के बीच खुशी की लहर है। लखनऊ से लेकर कश्मीर की वादियों और लद्दाख के पहाड़ों तक सीजफायर होने के बाद से ही जश्न का माहौल है।

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US-Iran Ceasefire के बाद श्रीनगर और बांदीपोरा में भारी जश्न

कश्मीर घाटी में इस समझौते का स्वागत जबरदस्त उत्साह के साथ किया गया। लाल चौक पर आतिशबाजी: श्रीनगर के ऐतिहासिक लाल चौक पर शिया समुदाय के लोगों ने बड़ी संख्या में इकट्ठा होकर आतिशबाजी की और एक-दूसरे को बधाई दी। बांदीपोरा में भी लोग सड़कों पर उतरे और अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष के थमने पर खुशी जताई। लोगों का मानना है कि इस शांति से उन हजारों कश्मीरी परिवारों को राहत मिलेगी जिनके सदस्य रोजगार के सिलसिले में खाड़ी देशों में काम करते हैं।

सीजफायर पर फारूक अब्दुल्ला का बयान: युद्ध समाधान नहीं

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने इस कूटनीतिक सफलता पर अल्लाह का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा-मैं अल्लाह का शुक्रगुजार हूँ कि उन्होंने अमेरिका और ईरान दोनों देशों को टेबल पर बैठकर बात करने की ताकत दी। युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है, संवाद ही एकमात्र रास्ता है। हमें नहीं पता कि पूर्ण शांति लौटने में कितना समय लगेगा, लेकिन यह एक अच्छी शुरुआत है।

जम्मू-कश्मीर के बहुत से लोग उस क्षेत्र में काम करते हैं, हम उम्मीद करते हैं कि भारत इस युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने में मदद करेगा। लद्दाख के लेह से अंजुमन इमामिया के उपाध्यक्ष शेख नजीर अहमद शरीफी ने इसे "मानवता और इस्लाम की बड़ी जीत" करार दिया।

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क्या हैं ईरान की वे 10 शर्तें जिन पर झुका अमेरिका?

यह कूटनीतिक सफलता तब हासिल हुई जब ट्रंप प्रशासन तेहरान द्वारा रखे गए 10-सूत्रीय प्रस्ताव पर बातचीत के लिए सहमत हो गया। ईरान की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:

अनाक्रमण समझौता: अमेरिका और ईरान के बीच भविष्य में युद्ध न करने का समझौता।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य: 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' पर ईरान का नियंत्रण बरकरार रहेगा।

परमाणु अधिकार: ईरान के परमाणु संवर्धन (Nuclear Enrichment) अधिकारों को मान्यता।

प्रतिबंधों की समाप्ति: अमेरिका द्वारा लगाए गए सभी प्राथमिक और द्वितीयक (थर्ड पार्टी) प्रतिबंधों को हटाना।

UNSC प्रस्ताव: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सभी ईरान विरोधी प्रस्तावों को खत्म करना।

IAEA के प्रस्ताव: अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के बोर्ड प्रस्तावों का अंत।

मुआवजा: प्रतिबंधों से हुए आर्थिक नुकसान के लिए ईरान को हर्जाना देना।

सैन्य वापसी: मिडल ईस्ट क्षेत्र से अमेरिकी लड़ाकू विमानों और सेना की वापसी।

सभी मोर्चों पर शांति: हिजबुल्लाह सहित ईरान समर्थित समूहों से जुड़े सभी संघर्षों को रोकना।

हॉर्मुज का खुलना: सीजफायर के बदले ईरान दो हफ्ते के लिए स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से जहाजों को सुरक्षित रास्ता देगा।

ग्लोबल इकोनॉमी पर क्या होगा असर, गैस और तेल की कीमतों में आएगी गिरावट

इस समझौते के तहत ईरान स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को दो सप्ताह के लिए खोलने पर सहमत हो गया है। दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 20% (पांचवां हिस्सा) इसी रास्ते से गुजरता है। इस मार्ग के खुलने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आने की उम्मीद है, जिससे भारत सहित पूरी दुनिया में ईंधन की कीमतें कम हो सकती हैं। यह सीजफायर केवल 15 दिनों का है, लेकिन इसे एक बड़े कूटनीतिक ब्रेकथ्रू के रूप में देखा जा रहा है जो भविष्य में स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

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