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US Deported Indians:'पगड़ी कूड़ेदान में फेंकी, बेड़ियों में जकड़ा, भूखा रखा', US से भारत डिपोर्ट सिख की कहानी

US Deported Indians: क्या आप सोच सकते हैं कि अपने सपनों को पूरा करने के लिए कोई कितनी तकलीफें सह सकता है? पंजाब के जतिंदर सिंह ने भी बेहतर भविष्य की उम्मीद में अमेरिका जाने की कोशिश की, लेकिन जो हुआ, वह बेहद दर्दनाक था। उन्हें अमेरिकी हिरासत में यातनाएं झेलनी पड़ीं, बेड़ियों में जकड़ा गया और उनकी पगड़ी तक जबरन उतारकर कूड़ेदान में फेंक दी गई।

23 साल के जतिंदर सिंह अमृतसर के रहने वाले हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिका में घुसने की कोशिश के दौरान उन्हें पकड़ लिया गया और दो हफ्ते तक हिरासत कैंप में रखा गया। वहां उनके साथ बेहद खराब व्यवहार हुआ-उन्हें पर्याप्त खाना तक नहीं दिया गया। सबसे ज्यादा तकलीफ उन्हें तब हुई जब अमेरिकी अधिकारियों ने उनकी पगड़ी उतरवाकर उसे कूड़ेदान में फेंक दिया।

US Deported Indians

36 घंटे तक बेड़ियों में जकड़े रहे

जब जतिंदर को अमेरिका से भारत डिपोर्ट किया गया, तब उन्हें 36 घंटे तक बेड़ियों में रखा गया। उन्होंने बताया, "मेरे हाथ और पैर जकड़ दिए गए थे। हमें बहुत कम खाना दिया गया और टॉयलेट तक जाने की भी दिक्कत थी।" अमृतसर पहुंचने से कुछ मिनट पहले ही उनकी बेड़ियां खोली गईं।

50 लाख में सपनों का सौदा, बेची जमीन, मिला धोखा

बेहतर जीवन की तलाश में जतिंदर ने एक एजेंट को 50 लाख रुपये दिए थे, जिसने अमेरिका पहुंचाने का वादा किया था। इसके लिए उनका परिवार अपनी जमीन बेच चुका था, बहनों के गहने तक गिरवी रख दिए थे। लेकिन यह सपना हकीकत में बदलने से पहले ही टूट गया। जतिंदर को जंगलों में घूमते हुए कई शव भी दिखे, जो इस खतरनाक सफर की सच्चाई बयां कर रहे थे।

अमेरिका से भारत डिपोर्ट किए गए 332 भारतीय - जानिए तीन बैच में कितने लोग लौटे!

अमेरिका ने हाल ही में अवैध रूप से रह रहे भारतीयों को डिपोर्ट करना शुरू किया है। अब तक तीन बैच में कुल 332 भारतीयों को वापस भेजा जा चुका है। इनमें पंजाब, हरियाणा, गुजरात और कई अन्य राज्यों के लोग शामिल हैं। आइए जानते हैं कि तीनों बैच में कितने भारतीय डिपोर्ट हुए और वे किस-किस राज्य से थे...

US Deported Indians

तीसरे बैच में 112 भारतीय डिपोर्ट हुए

अमेरिका से 16 फरवरी को तीसरा बैच भारत भेजा गया, जिसमें 112 भारतीय थे।
इनमें शामिल लोगों का विवरण इस प्रकार है...

  • हरियाणा: 44
  • गुजरात: 33
  • पंजाब: 31
  • उत्तर प्रदेश: 2
  • हिमाचल प्रदेश: 1
  • उत्तराखंड: 1

दूसरे बैच में 116 भारतीय डिपोर्ट किए गए

15 फरवरी को दूसरा बैच अमृतसर पहुंचा, जिसमें 116 भारतीय थे।
इनमें शामिल राज्यों की संख्या इस प्रकार है...

  • पंजाब: 65
  • हरियाणा: 33
  • गुजरात: 8
  • उत्तर प्रदेश, गोवा, महाराष्ट्र, राजस्थान: 2-2
  • हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर: 1-1

पहले बैच में 104 भारतीयों को वापस भेजा गया

5 फरवरी को अमेरिकी सैन्य विमान C-17 ग्लोबमास्टर 104 भारतीयों को लेकर अमृतसर पहुंचा।
इसमें शामिल लोग:

  • पंजाब: 30
  • हरियाणा: 33
  • गुजरात: 33

पंजाब के मुख्यमंत्री का सवाल - अमृतसर ही क्यों?

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने यह सवाल उठाया कि जब सबसे ज्यादा लोग हरियाणा (33) और गुजरात (33) से थे, तो विमान को अहमदाबाद या अंबाला की बजाय अमृतसर क्यों उतारा गया? हालांकि, दूसरे बैच में सबसे ज्यादा पंजाबियों (65) को वापस भेजा गया।

अब तक 332 भारतीय डिपोर्ट हो चुके हैं

तीनों बैच मिलाकर अब तक 332 भारतीय अमेरिका से डिपोर्ट किए जा चुके हैं और रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका 18,000 भारतीयों को वापस भेजने की योजना बना रहा है, जिनमें 5,000 हरियाणा से हैं। अवैध रूप से विदेश जाने के सपने देखने वाले युवाओं के लिए यह एक बड़ा सबक है कि गलत रास्तों से विदेश जाने का अंजाम कितना बुरा हो सकता है।

क्या कह रही हैं सिख धार्मिक संस्थाएं?

अमृतसर एयरपोर्ट पर जब डिपोर्ट किए गए सिख युवक बिना पगड़ी के देखे गए, तो शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने इस पर नाराजगी जताई। उन्होंने अमेरिका पर सिखों की धार्मिक पहचान का अपमान करने का आरोप लगाया और इस मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की बात कही।

भविष्य में क्या होगा?

अमेरिका ने अवैध रूप से रह रहे करीब 18,000 भारतीयों को डिपोर्ट करने की योजना बनाई है। इनमें से 5,000 हरियाणा से हैं। यह मामला अब राजनीतिक रूप से भी तूल पकड़ रहा है, क्योंकि पंजाब के मुख्यमंत्री ने सवाल उठाए हैं कि आखिर विमान को गुजरात या हरियाणा की बजाय अमृतसर ही क्यों लाया गया?

यह कहानी सिर्फ जतिंदर सिंह की नहीं, बल्कि उन हजारों भारतीयों की है जो विदेश जाने के लिए सब कुछ दांव पर लगा देते हैं, लेकिन कई बार धोखे और मुश्किलों का शिकार हो जाते हैं। यह घटना बताती है कि अवैध तरीके से विदेश जाने का रास्ता कितना खतरनाक हो सकता है।

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