अमेरिकी रक्षा मंत्री पर रूसी एयर डिफेंस डील के विरोध का दबाव, अपने पुराने दोस्त रूस को नाराज करेगा भारत ?

नई दिल्ली। अमेरिका के रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन इस समय भारत के दौरे पर पहुंचे हैं। लॉयड के दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत के साथ रक्षा संबंधों को और मजबूत बनाना और क्षेत्र में नई संभावनाओं को अनलॉक करना है। इस दौरे से भारत को भी बहुत उम्मीदें हैं लेकिन इसके साथ ही भारत के सामने एक चुनौती भी खड़ी हो रही है। चुनौती है नए दोस्त और पुराने दोस्त के बीच में संतुलन स्थापित करने की। एक तरफ अमेरिका के भारत के रिश्ते मजबूत हो रहे हैं वहीं दूसरी ओर रूस के साथ उसके रिश्तों में तनाव तेज हो गया है।

भारत दौरे पर पहुंचे हैं अमेरिकी रक्षा मंत्री

भारत दौरे पर पहुंचे हैं अमेरिकी रक्षा मंत्री

इस तनाव का असर अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन की भारत यात्रा में भी पड़ने की आशंका बन रही है। इसकी वजह है भारत और रूस के बीच लंबे समय से रहे अच्छे रिश्ते। भारत ने रूस के साथ एस-400 मिसाइल सौदा किया है लेकिन अमेरिका को ये रास नहीं आ रहा है। अमेरिका पहले भी इस सौदे को लेकर अपनी आपत्ति जाहिर कर चुका है।

भारत दौरे पर पहुंचे अमेरिकी रक्षा मंत्री पर भी इस सौदे को लेकर विरोध जताने को लेकर भारी दबाव है। लॉयड ऑस्टिन पर ये दबाव अमेरिकी सांसदों की तरफ से है। लॉयड से एक अमेरिकी सीनेटर ने वार्ता के दौरान रूसी एयर डिफेंस सिस्टम की खरीद को लेकर भारत से विरोध जताने की अपील की है।

लॉयड ऑस्टिन बाइडेन प्रशासन के शीर्ष सदस्य के रूप में पहली बार भारत की यात्रा पर पहुंचे हैं। वह इस दौरे में चीन को घेरने के लिए बने क्वॉड गठबंधन को और मजबूत करने की कोशिश के तहत पहुंचे हैं। चीन की बढ़ती ताकत और आक्रामक रवैये से अमेरिका भी परेशान है और इसके मुकाबले के लिए एशियाई महाशक्ति भारत से बेहतर साथी उसे नहीं मिल सकता है।

चीन को लेकर क्वाड की भूमिका तलाशेंगे दोनों देश

चीन को लेकर क्वाड की भूमिका तलाशेंगे दोनों देश

भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के नेताओं ने एक गठबंधन की नींव रखी है जिसे क्वाड कहा जाता है। पिछले सप्ताह ही क्वाड का पहला वर्चुअल शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया था जिसमें एक मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए काम करने और साबइर सुरक्षा और चीन की चुनौतियों से निपटने का वादा किया गया था। इस सम्मेलन का महत्व इस बात से लगाया जा सकता है कि इसमें चारों देशों के प्रमुखों ने हिस्सा लिया था।

अमेरिका के लिए इस समय चीन से निपटना सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। अमेरिका और चीन के रिश्ते बेहद ही तनाव भरे बने हुए हैं। रिश्तों में तनाव इतना है कि पिछले गुरुवार को अलास्का में पहली बार मिले अमेरिका और चीन के विदेशमंत्रियों में तीखी बहस हो गई थी। जिसने पूरी दुनिया को चौंकाया था।

वहीं लद्दाख में एलएसी पर सैनिकों में संघर्ष के बाद भारत और चीन के रिश्ते बहुत ज्यादा बिगड़ गए हैं। इसी दौर में भारत और अमेरिका के बीच नजदीकी भी बढ़ी है। खासतौर पर अमेरिका के सीमा विवाद में भारत का पक्ष लेने के बाद।

भारत दौरे में अमेरिकी रक्षा मंत्री हथियारों से लैस ड्रोन खरीद पर चर्चा के साथ ही 150 से अधिक फाइटर जेट्स के सौदे को लेकर भी बात करेंगे।

रूस के साथ एयर डिफेंस डील बन सकती है बाधा

रूस के साथ एयर डिफेंस डील बन सकती है बाधा

अमेरिका के साथ इसी रक्षा सौदे में रूस बड़ी अड़चन बन सकता है। रूस के साथ एयर डिफेंस सौदा करने वाले देशों के साथ अमेरिकी रक्षा सौदे पर प्रतिबंध है। यही वजह है कि अमेरिका ने तुर्की को हथियार बेचने पर रोक लगा दी थी क्योंकि तुर्की ने भी रूसी एयर डिफेंस के लिए सौदा किया है। तुर्की के साथ अमेरिका का सौदा रद्द करना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि तुर्की पश्चिमी देशों के सैन्य गठबंधन नाटो का सदस्य है।

इसे लेकर ही सीनेट में विरोध है। अमेरिकी सीनेट की विदेश संबंध मामलों की समिति के चेयरमैन बॉब मेंडेज ने लॉयड ऑस्टिन से कहा है कि वह भारत में अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दें कि बाइडेन प्रशासन रूस के साथ इस डील का विरोध करता है।

मेंडेज ने ऑस्टिन को लिखे पत्र में साफ कहा है कि अगर भारत रूस के साथ एस-400 डील को लेकर आगे बढ़ता है तो उसे रूस के साथ डिफेंस डील को रोकने वाले कास्टा के अंदर सेक्शन 231 के तहत प्रतिबंध के लिए तैयार रहना होगा। इस प्रतिबंध के तहत भारत का अमेरिका के साथ सैन्य तकनीकों की खरीद और विकास को लेकर काम करना भी मुश्किल होगा।

भारत के सामने संतुलन साधने की चुनौती

भारत के सामने संतुलन साधने की चुनौती

अगर ऐसा होता है तो भारत के लिए यह मुश्किल स्थिति होगी। भारत एक ऐसी स्थिति में है जहां एक तरफ नया दोस्त अमेरिका है तो दूसरी तरफ पुराना साथी रूस। भारत और रूस के बीच रिश्तों में ठंडेपन की खबरें भी आती रही हैं। पिछले 20 सालों से हो रही भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय वार्षिक वार्ता पहली बार 2020 में नहीं हुई है। हालांकि इसके लिए दोनों देशों ने कोरोना महामारी को वजह बताया है लेकिन रूस क्वाड को लेकर अपनी चिंता जाहिर कर चुका है। दिसम्बर में ही रूसी विदेश मंत्री ने कहा था कि पश्चिमी देश भारत और रूस के रिश्तों को कमजोर करना चाहते हैं।

अमेरिका और रूस में भी तनाव लगातार बढ़ रहा है। जो बाइडेन ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को घातक कहा है और कहा है कि उन्हें राष्ट्रपति चुनाव में हस्तक्षेप चुकाने की धमकी भी दी है। जिस पर रूसी राष्ट्रपति ने बाइडेन को सीधे वीडियो कॉल पर बात करने को कहा है। यही नहीं पुतिन ने तो यहां तक कह दिया कि जो जैसे होता है वह दूसरों के बारे में वैसा ही सोचता है।

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