उरी अटैक : एक शहीद के मां-बाप, भाई और दोस्त की मार्मिक दास्तां, जिसे पढ़कर रो पड़ेंगे आप
नई दिल्ली। उरी हमले में शहीद हुए जवान गंगाधर दलुई के घर की ओर जाता रास्ता...उनका घर एक झोपड़ी में है और पड़ोसी पेड़ों पर ट्यूबलाइट लगा रहा है। हावड़ा के जमुना बाई गांव का यह दृश्य शहीद के स्वागत की तैयारियों का है।

शहीद के एक पड़ोसी ने बताया कि दलुई अभी कॉलेज के प्रथम वर्ष में ही था और उसने दो साल पहले ही आर्मी जॉइन की थी।
शहीद की मां की जुबानी
झोपड़ी के अंदर शहीद की 42 वर्षीय मां बैठी है। वह कहती हैं,'बेटे ने बीते गुरुवार को कॉल किया था और कहा था कि अब पूरे सप्ताह उससे बात नहींं हो पाएगी।' उनके पति और छोटा बेटा लगातार कह रहे थे कि वह शायद किसी संकट में है लेकिन मां ने इस बात को मानने से इनकार कर दिया।
वह कहती हैं कि 'अब मुझे मालूम पड़ा़ा कि ये दोनों लाेेग सही कह रहे थे। कई दुश्वारियों के बावजूद हमने अपने बेटे के पालन-पोषण में कोई कमी नहीं छोड़ी। भगवान हमेशा गरीबों से ही लेता है।'
घर का इकलौता कमाने वाला
माता-पिता ने शहीद गंगाधर और उनके 15 वर्षीय छोटे भाई बरुण को इलाके के सबसे बेहतरीन शिक्षण संस्थान में पढ़ाई कराई। दोनों बेटों को अच्छी से अच्छी सुविधाएं दिलाईं। जिस वक्त गंगाधर ने आर्मी जॉइन की, उस वक्त केवल वही इकलौता घर का कमाउ पूत था।

...छोटे भाई ने यह कहा
बरुण अपने बड़े भाई की शहादत पर कहता है,'मेरा भाई हमेशा से ही देश की सेवा करना चाहता था।' एक छोटी से शेल्फ में गंगाधर को मिली ट्रॉफियां सजी हैं। बरुण ने बताया कि मेरा भाई स्कूल में हर खेल में प्रतिभाग करता था और हमेशा जीतता था।
खेल से मिला आर्मी का रास्ता
यह खेल ही थे जिसकी वजह से गंगाधर को आर्मी में जगह मिली। गंगाधर के एक पड़ोसी और उनके सबसे अच्छे दोस्त रियाजुल रहमान ने बताया कि गंगाधर ने आर्मी जॉइन करने के लिए सबकुछ छोड़ दिया। गंगाधर पिछले महीने छुट्टियों पर गांव गए थे। रियाजुल राेेते हुए बताते हैं कि 15 अगस्त की शाम हमने एक छोटी सी दावत दी थी। हमने मीट खाया था लेकिन गंगाधर मीट खाना बंद कर चुके थे क्योंकि उन्हें लगता था कि जानवरों को मारा जाना निर्दयता है।
पाकिस्तान दुनिया का सबसे बुरा देश
गंगाधर गुस्से में पाकिस्तान को हमेशा कोसते थे। वह कहते थे कि पाकिस्तान दुनिया का सबसे बुरा देश है। हमारी सरकार पाकिस्तान के खिलाफ जो भी कदम उठा रही है वह नाकाफी, नाकाबिल हैं। पाकिस्तान को हमारी नरमी के बारे में पता है...हमें पाकिस्तान को सबक सिखाना चाहिए।
यह बताया शहीद के पिता ने...
गंगाधर की पहली बार कश्मीर में पोस्टिंग हुई। इससे पहले वह बेंगलुरू और सिलीगुड़ी में भी तैनात रहे। इस शहीद के 65 वर्षीय पिता ओंकारनाथ दलुई ने बताया कि 'गंगाधर को पहाड़ों के बारे में बात करना पसंद था। वह अक्सर अपनी मां से भी बात करता था।
उन्होंने बताया कि उरी अटैक में शहीद हुए सैनिकों में गंगासागर के बिश्वजीत घोराई भी थे, जो कि गंगाधर के अच्छे दोस्त थे। उन दोनों ने अपने साथ की एक तस्वीर भी दी थी। अब दोनों ही बेटे जिंदा नहीं हैं। मैं चाहता हूं कि भारत सरकार पाकिस्तान पर हमला करे। हम अपने बेटों की शहादत का बदला चाहते हैं। न जाने, हमारी सरकार कब चेतेगी?'












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