उरी अटैक की जांच में हुआ यह बड़ा खुलासा, जानिए सेना पर हमले को आतंकियों ने कैसे दिया अंजाम

नई दिल्ली। राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए ने उरी आतंकी हमले की जांच में खुलासा किया है कि आतंकियों ने भारतीय सेना के हेडक्वॉर्टर कॉम्प्लेक्स के ऊपर तकरीबन एक हफ्ता बिताया। आतंकवादियों ने ऐसा इसलिए किया क्‍योंकि वे इस दौरान भारतीय ठिकानों की रेकी कर रहे थे।

उरी अटैक की जांच में हुआ यह बड़ा खुलासा, जानिए सेना पर हमले को आतंकियों ने कैसे दिया अंजाम

आपको बता दें कि उरी में भारतीय सेना पर आतंकियों ने हमला किया था और इस हमले में 18 भारतीय सैनिक अब तक शहीद हो चुके हैंं।

सैनिकों को कैद कर लगाई आग

एनआईए के सूत्राें ने एक अंग्रेजी वेबसाइट को बताया कि ज्‍यादातर सैनिक कुक हाउस और स्‍टोर रूम में शहीद हुए। इन दोनों इमारतों को आतंकियोंं ने बाहर से लॉक कर दिया था और इन्‍हें आग लगा दी। इससे साफ है कि आतंकियों को सैनिकाें के ठिकानों की पूरी जानकारी दी।

ऐसे की थी पूरी प्लानिंग

आतंकियों ने कॉम्‍प्‍लेक्‍स के दक्षिणी छोर से हमला किया। चार आतंकियों की टीम ने सबसे पहले एक चौकीदार को मारा। उसके बाद उनमें से तीन आतंकी कुक हाउस और स्‍टोर रूम की ओर बढ़ चले। जबकि चौथा आतंकी ऑफिसर मेस की तरफ चला गया।

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...तो भारत में ही बनी रूपरेखा!

अब तक यह अंदेशा था कि आतंकियों ने इस हमले की रूपरेखा पाकिस्‍तान में बनाई होगी। जबकि जांच सूत्रों ने बताया कि जहां हमला हुुआ, वहां से एक क्षतिग्रस्‍त जीपीएस यानी ग्‍लोबल पोजिशनिंग सिस्‍टम मिला है। इसकी मदद से यह पता लग पाया कि आतंकियों ने हमले की रणनीति कॉम्‍प्‍लेक्‍स के आसपास ही रहकर बनाई थी।

जीपीएस सेट भी हुआ बरामद

नेशनल टेक्निकल रिसर्च आॅर्गनाइजेशन यानी एनटीआरओ इंजीनियर्स बरामद हुए गार्मिन ईट्रेक्स जीपीए सेट से और भी जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि आतंकियों ने इसी के जरिए हाजी पीर पास करते हुए उरी तक का रास्ता तय किया। जबकि एक अन्य जीपीएस सेट भी बरामद हुआ है, जो कि हमले के दौरान ही बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था।

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​आतं​कियों का डीएनए करेगा मदद

सूत्रों ने एनआईए को बताया कि आतंकियों को दफनाने से पहले उनके फिंगरप्रिंट और डीएनए सैंपल ले लिए गए हैं। इनकी मदद से सुबूत जुटाए जाएंगे। एनाआईए के मुखिया शरद कुमार हमले की साइट पर मंगलवार को पहुंचे और उन्होंने हमले के बारे में और जुटाए गए सुबूतों के बारे में पूरी जानकारी दी।

राइफलों की जांच है जारी

हालांकि, अब तक जांच में यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस आतंकी हमले का पाकिस्तान के किस जिहादिस्ट ग्रुप से संबंध है। आतंकियों द्वारा इस्तेमाल की गईं कलाश्निकोव राइफलों को मिलिट्री ने जांच एजेंसी को सौंप दिया है। इनकी भी जांच जारी है।

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हमले का है पाकिस्तानी लिंक

मिलिट्री आॅपरेशन्स के डायरेक्टर जनरल लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह ने रविवार को मीडिया को बताया था कि हमले में इस्तेमाल किए गए हथियारों पर पाकिस्तान के निशान पाए गए हैं। इसके अलावा हमले के पाकिस्तानी कनेक्शन के कुछ अन्य सुबूत भी मिले हैं।

फोन का है पाकिस्तान कनेक्शन

जांच में एक आईकॉम नि​र्मित हैंडसेट बरामद हुआ है जो कि जुलाई में गिरफ्तार किए गए एक पाकिस्तानी आतंकी बहादुर अली की डिवाइस से मिलता है। इस डिवाइस को लश्कर-ए-तैयबा के मुख्य कंट्रोल स्टेशन से संवाद के लिए इस्तेमाल किया गया था। एनआईए अधिकारी आईकॉम कंपनी से भी जांच के सिलसिले में पूछताछ करेंगे।

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