UPSC 2021: मेन्स से वंचित अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका, अतिरिक्त अवसर देने की मांग
नई दिल्ली, 7 मार्च: वैश्विक महामारी कोरोना के दौरान हर क्षेत्र में बुरा असर देखने को मिला। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षाएं इससे अछूती नहीं रहीं। वहीं कोविड पॉजिटिव अभ्यर्थी यूपीएससी 2021 की मुख्य परीक्षा से वंचित रह गए। ऐसे में अब यूपीएससी अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने कोविड 19 के दौरान निरस्त परीक्षाओं के बदले अतिरक्त प्रयास का अवसर देने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस सीटी रविकुमार की खंडपीठ ने यूपीएससी परिषद की ओर समय मांगे जाने के बाद मामले को स्थगित कर दिया है।

यूपीएससी उम्मीदवारों ने संघ लोक सेवा आयोग को स्थगित परीक्षाओं के संबंध में यूपीएससी को निर्देश जारी करने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका में कहा गया है कि उन्होंने यूपीएससी 2021 की प्री परीक्षा पास आउट कर ली थी और मुख्य परीक्षा के लिए उन्हें चयनित कर लिया गया था। यूपीएससी की मुख्य परीक्षा 7 जनवरी से लेकर 16 जनवरी 2022 तक होनी थी। अभ्यर्थियों ने अपनी याचिका में कहा है कि कोविड पॉजिटिव होने से कारण वे यूपीएससी की मुख्य परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए। क्वारंटीन में रह रहे यूपीएससी अभ्यर्थियों को कोविड 19 के सख्त निर्देशों का पालन करने को तो कहा गया लेकिन उनके लिए यूपीएससी ने परीक्षा को लेकर कोई अतिरिक्त व्यवस्था नहीं की।
मामले में तीन यूपीएससी अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता शशांक सिंह द्वारा दायर याचिका पर जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस रविकुमार की खंडपीठ ने सोमवार की सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्त गोपाल शंकरनारायनन ने पक्ष रखा। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से यूपीएससी को मामले में उचित निर्देश जारी करते हुए यूपीएससी की मुख्य परीक्षा से वंचित अभ्यर्थियों को दूसरी बार परीक्षा देने का अवसर उपलब्ध कराने की व्यवस्था करने की मांग की । याचिकाकर्ताओं ने संघ लोक सेवा आयोग पर भारतीय संविधान की धारा 14 और 16 के उल्लंघन का आरोप लगाया है। उन्होंने अपनी याचिका में लिखा कि कोविड 19 के दौरान यूपीएससी परीक्षा नीतियों में कोविड 19 पॉजिटिव अभ्यर्थियों के लिए कोई व्यवस्था न करके उनके अधिकारों का हनन किया है।












Click it and Unblock the Notifications