सवर्णों के आरक्षण के दांव ने विपक्ष के सामने खड़ी की बड़ी मुश्किल

नई दिल्ली। देश में आरक्षण हमेशा से ही ऐसा मुद्दा रहा है जिसकी वजह से सत्ता परिवर्तन तक देखने को मिला है। ऐसे में जिस तरह से मोदी सरकार ने चुनाव से पहले आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण वर्ग को आरक्षण देने का फैसला लिया है उसने देश के सियासी माहौल को गर्म कर दिया। एक तरफ जहां तमाम विपक्षी दल चुनाव से पहले लगातार भारतीय जनता पार्टी और मोदी सरकार के खिलाफ लगातार हमलावर थे, तो दूसरी तरफ सरकार के इस फैसले के बाद विपक्ष के लिए सरकार के इस फैसले का विरोध करना मुश्किल हो रहा है।

बसपा का समर्थन

बसपा का समर्थन

खुद कांग्रेस पार्टी सरकार के इस फैसले का खुलकर विरोध नहीं कर पा रही है। यहां तक की भाजपा की धुर विरोधी मायावती ने भी सरकार के इस फैसले का समर्थन किया है। मायावती ने सरकार के फैसले का समर्थन किया और कहा कि वह आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को आरक्षण दिए जाने के फैसले का स्वागत करती हैं। हालांकि उन्होंने इसके पीछे सरकार की मंशा पर जरूर सवाल खड़ा किया है। मायावती ने कहा कि लोकसभा चुनाव से पहले लिया गया फैसला हमे सही नियत से लिया गया फैसला नहीं लगता है। चुनावी स्टंट लगता है, राजनीतिक छलावा लगता है, अच्छा होता अगर भाजपा अपना कार्यकाल खत्म होने से ठीक पहले नहीं बल्कि और पहले इस फैसले को ले लेती।

आप का समर्थन

आप का समर्थन

वहीं आम आदमी पार्टी ने भी सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि वह इस फैसले का समर्थन करेंगे। हालांकि पार्टी की ओर से मोदी सरकार पर निशाना साधा गया है और कहा गया है कि सरकार को इस फैसले को लागू करने के लिए जल्द से जल्द संसद में विधेयक लेकर आना चाहिए, अन्यथा साफ हो जाएगा कि सरकार का यह फैसला महज जुमला है और सरकार की इस बिल को पास कराने की मंशा नहीं हैं। साथ ही तमाम नेताओं ने भी इस बिल का समर्थन किया है।

विपक्ष असमंजस में

विपक्ष असमंजस में

दरअसल कोई भी दल सवर्णों के आरक्षण के सरकार के फैसले की सीधी आलोचना करने से बच रहा है। कोई भी राजनीतिक दल देश के बहुसंख्यक सवर्णों की नाराजगी नहीं लेना चाहता है। यही वजह है कि एक तरफ जहां तमाम राजनीतिक दल सरकार के फैसले को स्वीकार तो कर रहे हैं, लेकिन वह सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा कर रहे हैं। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के लिए भी कुछ इसी तरह की मुश्किल है। अगर वह सरकार के इस फैसले का विरोध करते हैं तो उन्हें सवर्णों की नाराजगी झेलनी पड़ेगी और अगर इस फैसले का समर्थन करते हैं तो भाजपा को इसका सीधा फायदा होगा।

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