UP Population Policy: हिंदू संगठन क्यों कर रहे हैं योगी आदित्यनाथ सरकार के प्रस्ताव का विरोध ?
नई दिल्ली, 12 जुलाई: उत्तर प्रदेश लॉ कमीशन की ओर से जनसंख्या नियंत्रण पर जारी ड्राफ्ट प्रस्ताव का हिंदू संगठनों की ओर से ही विरोध शुरू हो गया है। इस प्रस्ताव में दो से ज्यादा बच्चे वाले दंपति को सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित करने और एक बच्चे वालों को उससे भी ज्यादा लाभ देने का विचार है। लेकिन, हिंदू संगठनों का कहना है कि इससे हिंदू-मुस्लिम जनसंख्या में और ज्यादा असमानता पैदा होगी। वहीं कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी योगी आदित्यनाथ सरकार की कोशिशों को गैर-जरूरी बता रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि राज्य में जनसंख्या विस्फोट जैसी स्थिति नजर नहीं आती। (पहली तस्वीर- प्रतीकात्मक)

यूपी जनसंख्या नियंत्रण नीति पर हिंदू संगठन को आपत्ति
यूपी सरकार की प्रस्तावित नई जनसंख्या नियंत्रण नीति का विचार विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) को रास नहीं आया है। वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा है कि प्रस्ताव के मुताबिक सिर्फ एक बच्चे वाले दंपति को प्रोत्साहित करने से समाज में जनसांख्यिकीय असंतुलन में और इजाफा होगा। उन्होंने कहा है कि 'सरकार को इस पर फिर से विचार करना चाहिए, क्योंकि इससे जनसंख्या में नकारात्मक वृद्धि होती है। ' विश्व हिंदू परिषद आज इसके खिलाफ यूपी लॉ कमीशन को एक बच्चे वाले दंपति को प्रोत्साहित करने के प्रस्ताव पर आपत्ति दर्ज कराएगा और इसे हटाने का सुझाव देगा।
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हिंदू और मुस्लिम जनसंख्या में असंतुलन पैदा होगा-वीएचपी
वीएचपी नेता का कहना है कि उत्तर प्रदेश जनसंख्या नियंत्रण विधेयक के प्रस्ताव के दूसरे हिस्से यानी एक बच्चे वाले परिवार को प्रोत्साहित करने से 'हिंदू और मुस्लिम जनसंख्या औसत में असमानता पैदा होगी। ' उनका यह भी कहना है कि 'हम जनसंख्या को लेकर कानून लाने के सरकार के कदम का स्वागत करते हैं, क्योंकि जनसंख्या पूरे देश में विस्फोटक रूप से बढ़ रही है। जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण को लेकर पूरे समाज में सहमति है।' लेकिन, उन्हें प्रस्तावित बिल के दूसरे हिस्से को लेकर आपत्ति है और उन्होंने कहा है, 'बिल के पहले हिस्से में इस बात का जिक्र है कि दो बच्चों वाले दंपति को सरकारी सुविधाओं में लाभ दिया जाएगा। लेकिन, दूसरे हिस्से में कहा गया है कि जिस दंपति का सिर्फ एक ही बच्चा होगा उसे ज्यादा लाभ दिया जाएगा। हमें इस हिस्से पर आपत्ति है, क्योंकि इससे हिंदू और मुस्लिमों की जनसंख्या में असमानता पैदा होगी। सरकार को इसके बारे में सोचना चाहिए, क्योंकि इससे जनसंख्या में नकारात्मक वृद्धि होगी।'

'महिलाओं पर बढ़ेगा नसबंदी का दबाव'
उधर पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया की पूनम मुत्तरेजा का कहना है कि जनसंख्या विस्फोट को लेकर जो चिंता है, वह राष्ट्रीय या वैश्विक आंकड़ों से मेल नहीं खाता। उनका दावा है कि ऐसा कोई सबूत नहीं है कि भारत या उत्तर प्रदेश में जनसंख्या विस्फोट की स्थिति है। उन्होंने कहा है भारत में टोटल फर्टिलिटी रेट (टीएफआर) कम हो रही है। उनके मुताबिक नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस) के अनुसार 1992-93 में यह 3.4 से 2015-16 में घटकर 2.2 रह गयी थी। वहीं यूपी में टीएफआर 2.7 थी, जो कि राष्ट्रीय औसत से ज्यादा थी और टीएफआर के रिप्लेसमेंट लेवल पर थी। उनके मुताबिक नेशनल कमीशन ऑन पॉपुलेशन ने 2011-2036 के लिए जो टेक्निकल ग्रुप ऑन पॉपुलेशन बनाया था, उसने यूपी के लिए अनुमान जताया है कि यह 2025 तक टीएफआर के रिप्लेसमेंट लेवल को हासिल कर लेगा। उनका कहना है कि राज्य सरकार जो कदम उठा रही है, स्वास्थ्य क्षेत्र में और सुधार हो रहा है, इससे इसमें और सुधार होगा और इसका फर्टिलिटी रेट पर भी सकारात्मक असर पड़ने की संभावना है। उनकी आशंका है कि यूपी सरकार के प्रस्ताव से महिलाओं पर ही नसबंदी का दबाव ज्यादा बढ़ेगा।

ज्यादा बच्चे वालों को सरकारी योजना का लाभ नहीं देने का प्रस्ताव
बता दें कि यूपी लॉ कमीशन ने 'यूपी पॉपुलेशन (कंट्रोल, स्टैबलाइजेशन एंड वेलफेयर) बिल, 2021' का पहला ड्राफ्ट प्रस्ताव जारी किया है और लोगों से उसपर 19 जुलाई तक सुझाव मांगे हैं। यूपी लॉ कमीशन के चेयरमैन के मुताबिक इस नीति के तहत दो बच्चे वाले दंपतियों को सरकारी योजनाओं का फायदा दिया जाएगा और एक बच्चे वालों को उससे भी ज्यादा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा है कि दो से ज्यादा बच्चे वाले दंपतियों को सरकार योजनाओं के लाभ से वंचित करने का प्रस्ताव है।












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