Lok Sabha Chunav 2024: बरेली में बीजेपी इस बार भी मारेगी बाजी या बदल गया समीकरण?
Bareilly Lok Sabha Chunav 2024: यूपी की बरेली लोकसभा सीट पर भाजपा इस बार अपनी अबतक की सबसे मुश्किल लड़ाई लड़ रही है। यह मुश्किल इसलिए है, क्योंकि यहां पार्टी को विरोधियों से नहीं, बल्कि समर्थकों से ही ज्यादा नुकसान होने की आशंका है।
बरेली यूपी की ऐसी लोकसभा सीट है, जिसपर 2009 के अलावा 1989 से लगातार बीजेपी का कब्जा रहा है। पार्टी के मौजूदा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार 8 बार यहां का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। लेकिन, उम्र के 75वें पड़ाव पर पहुंचने की वजह से पार्टी ने इस बार उन्हें टिकट नहीं दिया है।

संतोष गंगवार की जगह कुर्मी नेता को ही दिया है टिकट
अपने दिग्गज नेता की जगह भाजपा ने पूर्व विधायक और मंत्री छत्रपाल सिंह गंगवार को उतारा है। दोनों नेता कुर्मी (ओबीसी) हैं और इसलिए भारतीय जनता पार्टी ने यहां इस बड़े वोट बैंक को कम से कम जातीय समीकरण के आधार पर न छेड़ने की कोशिश की है।
छत्रपाल गंगवार के सामने सपा ने प्रवीण सिंह ऐरन को दिया है मौका
वहीं इंडिया ब्लॉक से समाजवादी पार्टी ने इस बार बरेली में प्रवीण सिंह ऐरन को उतारा है, जो 2009 में यहां कांग्रेस में रहकर संतोष गंगवार जैसे दिग्गज को भी हरा चुके हैं।
हालांकि, ऐरन 2019 में भी यहां से कांग्रेस के प्रत्याशी थे, लेकिन संतोष गंगवार के 5,65,270 वोटों के मुकाबले सिर्फ 74,206 वोट ही जुटा पाए थे। तब दूसरे नंबर पर सपा के भगवंत गंगवार रहे थे, जिन्हें 3,97,988 वोट आए थे। इस बार भगवंत पड़ोस की पीलीभीत से चुनाव मैदान में हैं।
संतोष गंगवार के समर्थकों की नाराजगी, बीजेपी की चुनौती!
इस बार कांग्रेस-सपा में गठबंधन है। लेकिन, पिछली बार के चुनाव परिणाम से तो लगता है कि फिर भी भाजपा प्रत्याशी की स्थिति कहीं ज्यादा मजबूत है। लेकिन, 7 मई को तीसरे चरण के मतदान में बरेली सीट पर बीजेपी के सामने सबसे बड़ी समस्या संतोष गंगवार समर्थकों की कथित नाराजगी हो सकती है।
डैमेज कंट्रोल की बीजेपी ने की है खूब कोशिश
इस नाराजगी में आग में घी का काम बरेली के मेयर उमेश गौतम का एक कथित वायरल बयान पहले ही कर चुका है। इसकी वजह से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को भी कार्यकर्ताओं की नाराजगी झेलनी पड़ी थी। डैमेज कंट्रोल के लिए पड़ोस की पीलीभीत में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे थे तो संतोष गंगवार भी मंच पर उनके साथ मौजूद थे।
शुक्रवार को भी जब पीएम मोदी ने बरेली में रोड शो किया तो उनके साथ खुले वाहन पर छत्रपाल गंगवार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ-साथ संतोष गंगवार भी उपस्थित थे। पार्टी ने यह दिखाने की काफी कोशिश की है, बुजुर्ग नेता में किसी तरह की नाराजगी नहीं है।
पार्टी मानकर चल रही है कि ओबीसी खासकर कुर्मी और मौर्य के अलावा, सवर्णों और वैश्यों के समर्थन और पीएम मोदी के नाम पर वह इस बार भी अपने गढ़ को बचाने में सफल रहेगी।
सपा को भी बीजेपी कार्यकर्ताओं के असंतोष पर ही भरोसा?
लेकिन, सपा उम्मीदवार ऐरन ने ईटी से कहा है,'संतोषजी को टिकट न देना बीजेपी के लिए घातक साबित होगा और वे अब स्थिति को नहीं संभाल सकते। ईवीएम के अलावा उनकी कोई मदद नहीं कर सकता....'
बरेली में 19 लाख से ज्यादा वोटर हैं। इनमें करीब 6,00,000 मुसलमान और 3,00,000 के करीब कुर्मी मतदाता हैं। समाजवादी पार्टी को लगता है कि अगर संतोष गंगवार के टिकट कटने की वजह से कुर्मी मतदाताओं को थोड़ा भी हिस्सा ऐरन के पक्ष में मुड़ा तो उनका काम बन सकता है।
संतोष गंगवार की अगुवाई में ही चल रहा प्रचार- बीजेपी उम्मीदवार
संतोष गंगवार की छवि सबको साथ लेकर चलने वाले नेता की रही है। इसलिए माना जाता है कि उन्हें मुसलमानों का भी कुछ वोट मिलता रहा है। इससे पहले छत्रपाल को लेकर ऐसी खबरें भी उठी थीं कि उन्हें पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय विधायकों का प्रचार में समर्थन नहीं मिल रहा है।
लेकिन, बीजेपी प्रत्याशी ने कहा है, 'मैंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है। यह विरोधियों का काम है। उनके (संतोष गंगवार) नेतृत्व में प्रचार चल रहा है। वे मेरे नामांकन के वक्त भी थे और यहां जितने भी पार्टी ऑफिस खुले हैं, वे मौजूद थे। बीजेपी यहां से रिकॉर्ड जीत दर्ज करेगी।'
क्या सोचते हैं बरेली के मुसलमान?
बरेली में बरेलवी आंदोलन के अगुवा अहमद रजा खान बरेलवी या आला हजरत की दरगाह भी है। उनके परपोते तौकीर रजा खान से संतोष गंगवार की दोस्ती की चर्चा आज भी स्थानीय लोग करते हैं।
सलीम नाम के एक स्थानीय मोटर मैकेनिक ने पीएम मोदी के मंगलसूत्र (कांग्रेस के सत्ता में आने पर मुसलमानों को देने) वाले बयान पर कहा, 'मुझे संतोष गंगवार से ज्यादा सभ्य एक भी नेता दिखाइए। लेकिन, हम किसी ऐसे आदमी को कैसे वोट दे सकते हैं, जो हमें अलग रखता है?'












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