योगी सरकार ने प्रियंका गांधी से 12 बजे तक 500 बसें गौतम बुद्ध नगर के डीएम को उपलब्ध कराने को कहा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर अपने घर जाने के लिए परेशान हैं, वह सरकार से अपील कर रहे हैं कि उन्हें घर पहुंचाने के लिए बस और ट्रेन की सुविधाएं मुहैया कराए। इस बीच कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाने के लिए 1000 बसें चलाने की अनुमति मांगी। जिसके बाद योगी आदित्यनाथ सरकार ने इन बसों को चलाने की अनुमति दे दी है। प्रदेश सरकार की ओर से कहा गया है कि 500 बसें गौतम बुद्ध नगर के डीएम को एक्सपो मार्ट पर 12 बजे तक उपलब्ध कराएं।

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    लेटर वॉर

    इससे पहले यूपी के सूचना गृह सचिव अवनीश अवस्थी ने लेटर जारी करके कहा था कि लखनऊ के वृंदावन योजना इलाके में सुबह 10 बजे तक 1000 बसों को फिटनेस सर्टिफिकेट ड्राइवर और उसके लाइसेंस के साथ लखनऊ डीएम को सौंपने के लिए कहा था। जिसके जवाब में प्रियंका गांधी की ओर से एक पत्र जारी किया गया। अहम बात यह है कि प्रियंका गांधी की ओर से जो बसें मुहैया कराई जा रही हैं उसके लिए एक नोडल अधिकारी को भी नियुक्त किया गया है।

    आरोप-प्रत्यारोप

    अवनीश अवस्थी ने जो पत्र जारी किया था उसका जवाब प्रियंका गांधी के निजी सचिव संदीप सिंह ने दिया है। पत्र में कहा गया है कि हमने गायिजाबाद बॉर्डर पर 500 बसें और नोएडा बॉर्डर पर 500 बसें चलाकर प्रवासी मजदूरों को उनके घर पहुंचाने की अनुमति मांगी गई थी। लेकिन 18 मई को शाम 4.01 बजे हमे व्हाट्सअप पर आपका पत्र मिला और हमसे कहा गया कि 1000 बसों की सूची, चालक, परिचालक के नाम व अन्य विवरण मांगा गया। यह जानकारी हमने ईमेल के जरिए आपको कुछ देर में उपलब्ध करा दी। आश्चर्य की बात तो यह है कि मुख्यमंत्री ने टीवी पर साक्षात्कार दिया और कहा कि वह हमसे तीन दिन से सूची मांग रहे थे।

    योगी सरकार पर सवाल खड़ा किया

    पत्र में कहा गया है कि 18 मई रात 11.40 बजे हमे एक पत्र प्राप्त हुआ और कहा गया कि 1000 बसों को 19 मई को सुबह 10 बजे लखनऊ में हैंडओवर किया जाए। लेकिन अवनीश अवस्थी जी आप एक वरिष्ठ व अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी हैं और कोरोना महामारी के इस भयानक संकट से भिज्ञ हैं। संकट में फंसे प्रवासी मजदूर उत्तर प्रदेश की अलग-अलग सीमाओं खासतौर पर दिल्ली-यूपी बॉर्डर के गाजियाबाद, नोएडा जैसी जगहों पर मौजूद हैं, इनकी संख्या लाखों में है। मीडिया के माध्यम से पूरा देश इनकी हालत को देख रहा है। ऐसी स्थिति में जब हजारों मजदूर सड़क पर पैदल चल रहे हैं तो 1000 खाली बसों को लखनऊ भेजना ना सिर्फ समय और संसाधनों की बर्बादी है बल्कि हद दर्जे की अमानवीयता है और यह एक घोर गरीब विरोधी मानसिकता की उपज है।

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