यूपी चुनाव से पहले नेपाल से सटे 7 सीमावर्ती जिलों को लेकर अलर्ट! जानिए चल क्या रहा है खेल ?
नई दिल्ली, 12 जनवरी: सशस्त्र सीमा बल की ओर से सरकार को नेपाल से सटे यूपी के सात जिलों को लेकर जो कुछ जानकार दी गई है, वह बहुत ही गंभीर है। इसके मुताबिक यूपी-नेपाल सीमा से सटे इलाकों में हाल के कुछ वर्षों में मस्जिदों और मदरसों के निर्माण कार्यों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। इन इलाकों के आसपास प्रदेश के 30 सीमावर्ती थाने पड़ते हैं, लेकिन मस्जिदों और मदरसों की संख्या में इतनी ज्यादा बढ़ोतरी की वजह से सरकारी एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं। खासकर बीते वर्षों में भारत में देश-विरोधी ताकतों ने नेपाल की खुली सीमा का भी खूब इस्तेमाल किया है और वहां के जरिए ना सिर्फ आतंकवादी गतिविधियों के लिए फंड के इस्तेमाल की बात सामने आई है, बल्कि देश-विरोधी बाकी गतिविधियों को भी संचालित किया गया है।

सशस्त्र सीमा बल ने किया अलर्ट
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की ओर से भारत-नेपाल सीमा लेकर जो जानकारी मिली है, वह काफी चौंकाने वाली है। एसएसबी ने पाया है कि यूपी में नेपाल सीमा से सटे 15 किलो मीटर के दायरे में मस्जिदों और मदरसों की संख्या में पिछले दो वर्षों में काफी उछाल आया है। अधिकारियों के मुताबिक 2018 से 2021 के बीच मस्जिदों की संख्या जहां 738 से बढ़कर 1,000 हो चुकी है, वहीं मदरसों की तादाद इसी दौरान 500 से बढ़कर 645 हो चुकी है। गौरतलब है कि सशस्त्र सीमा बल भारत-नेपाल सीमा की निगरानी करती है, जिसका गठन 1963 में 1962 में चीन के हमले को देखते हुए किया गया था।

मस्जिदों और मदरसों की संख्या में भारी बढ़ोतरी
नेपाल, भारत और चीन के बीच बफर स्टेट का काम करता है; और भारत-नेपाल के बीच 1,751 लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है। यह सीमा उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार,पश्चिम बंगाल और सिक्किम तक जाती है। इसमें से 570 किलोमीटर की सीमा उत्तर प्रदेश और नेपाल के बीच है। यह इतनी लंबी सीमा है कि इससे सटे 30 सीमावर्ती थाने पड़ते हैं। जानकारी के मुताबिक मदरसों, मस्जिदों और मस्जिद-मदरसे एक जैसे ढांचों का निर्माण यूपी के सात जिलों में देखा गया है और वे हैं- महाराजगंज, सिद्धार्थ नगर, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती, पीलीभीत और खीरी।

सीमावर्ती क्षेत्रों में 26% बढ़ें मस्जिद-मदरसे
सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक 'पिछले तीन वर्षों में करीब 26% बढ़ोतरी (मस्जिदों और मदरसों में) देखी गई है, यह सीमावर्ती क्षेत्रों में डेमोग्राफी में बदलाव का संकेत है। यूपी नेपाल सीमा जाली भारतीय करंसी और नशीले पदार्थों की तस्करी का भी गवाह रहा है। नेपाल के साथ कोई प्रत्यर्पण संधि या एमएलएटी समझौता नहीं है।' ईटी के मुताबिक एसएसबी के प्रवक्ता ने इस पर टिप्पणी नहीं की। लेकिन, भारत के लिए यह इसलिए चिंता की बात है, क्योंकि नेपाल की सत्ता में कम्युनिस्ट पार्टियों की दखल बढ़ने के बाद चीन ने इसके शासन तंत्र में अंदर तक घुसपैठ कर ली है और पाकिस्तान के साथ उसकी नापाक दोस्ती जगजाहिर है।

भारत-नेपाल सीमा का देश-विरोधी ताकतें उठा चुकी हैं फायदा
2019 में यूपी पुलिस ने नेपाल के सेंट्रल बैंक से जुड़े एक इंटरनेशनल टेररिज्म फंडिंग रैकेट का भी खुलासा किया था। पुलिस ने यह भी दावा किया था कि इस रैकेट में कुछ भारतीय नागरिक भी शामिल हैं, जो नेपाल के जरिए पैसे लाकर भारत में आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। 2013 की बात है आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन का सरगना यासीन भटकल और उसका गुर्गा असदुल्ला अख्तर भारत में कई बम धमाके करके नेपाल में ही छिपा हुआ था। दोनों नेपाल के पोखरा के रहने वाले थे। भारतीय सुरक्षा एजेंसियां सीमावर्ती इलाकों में भारतीय टेलीकॉम ऑपरेटरों की लचर ऑपरेशन पर चिंता जता चुकी हैं। (तस्वीरें-फाइल)












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