Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

चुनाव 2017: कौन बजायेगा यूपी वाले 'बाबू' का डीजे?

लखनऊ। एक समय था जब यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री कहती थीं, "डीजे वाले बाबू मेरा गाना बजा दे..." इतना कहते ही खासम-खास 'बाबू' मैडम का मनपसंद गाना बजा देते थे। आज स्थ‍िति कुछ उलट है, हर कोई डीजे वाले बाबू का गाना बजाने की होड़ में है!

असल में यह कहानी यूपी के बाबू सिंह कुशवाहा की कहानी से कुछ मिलती-जुलती है। विधानसभा चुनाव सिर पर हैं और अब तक तय नहीं हुआ है कि यूपी वाले इस बाबू का गाना कौन बजायेगा, यानि उन्हें किस पार्टी का समर्थन मिलेगा।

पढ़ें- 57 प्रतिशत ने अखिलेश को किया रिजेक्ट

Babu Singh Kushwaha

बसपा सरकार के पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा की करीबन चार साल बाद रिहाई हो गई है। जिस वजह से मैडम मायावती को बड़ा झटका लगा है। साथ ही राजनीतिक दलों में इस बात की सुगबुगाहट भी है कि बाबू सिंह की रिहाई से भाजपा को यूपी विधानसभा चुनाव 2017 में फायदा मिलने वाला है। शायद इसी वजह से 2017 चुनाव से पहले ही उन्हें रिहा कर दिया गया।

NRHM मामले में नपे थे ‘'बाबू''

गाजियाबाद की स्पेशल सीबाआई कोर्ट ने बीते गुरूवार को बसपा सरकार में मंत्री रहे बाबू सिंह कुशवाहा को रिहा कर दिया। जानकारी के मुताबिक एनआरएचएम घोटाले में अन्य कई दिग्गज भी फंसे हैं।

साथ ही इस संदर्भ में बसपा सुप्रीमों मायावती से भी कई दफे पूछताछ की जा चुकी है। केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन यानि की एनआरएचएम के लिए उत्तर प्रदेश को छह साल में 8657.35 करोड़ रूपये मिले, लेकिन अधिकारियों समेत चिकित्सकों ने जनकल्याण के लिए आई इस रकम में से पांच हजार करोड़ रूपयों को डकार लिया। और उत्तर प्रदेश खुद को ठगा सा महसूस करता रह गया।

जाने कहां गए वो दिन?

कभी मायावती के घर पर उनका टेलीफोन अटेंड करने वाला बाबू मायावती का बेहद खास व्यक्ति बन गया। यह खबर हर जगह दबी रही, छिपी रही। वक्त गुजरता गया और बाबू सिंह कुशवाहा सत्ता के ताकतवर मंत्री बनकर उभरे। पर जितनी तेजी से किस्मत बुलंदियों तक पहुंची उससे कहीं ज्यादा तेजी से उनके सितारे गर्दिश में चले गए।

इनके, उनके पर किसके होंगे बाबू सिंह?

बाबू सिंह की रिहाई के साथ इस बात की कयासें लगाई जाने लगीं कि अब वे किसके खेमे के साथ सियासत का नया दांव रचेंगे। हालांकि जिस खेमे में वे शामिल होंगे उसके विपक्षियों की ओर से घोटालेबाज का नारा लगना तय है।

हां अब अगर सपा के साथ बाबू सिंह को जोड़कर देखा जाए तो कहीं न कहीं बाबू सिंह के वोटों को जोड़कर समाजवादी पार्टी जीत के लिए आगे बढ़ने का प्रयास जरूर करेगी। वहीं भाजपा बाबू सिंह को अपनी सियासत में शामिल कर बसपा सुप्रीमों मायावती के खिलाफ हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना चाहेगी। रही बात बसपा की तो मायावती जिन्होंने बाबू सिंह कुशवाहा से किनारा कर लिया था, वे भी उन्हें मनाने के लिए सारे पैंतरे आजमाएंगी।

पहले दूंगा सहयोगियों का साथ, बाकी आगे की बात

इन सबके इतर मीडिया में आई खबरों के मुताबिक बाबू सिंह कुशवाहा ने किसी भी पार्टी में शामिल होने की बात को सिरे से खारिज करते हुए ये कहा है कि जेल में रहने के दौरान उनके सहयोगियों ने जन अधिकार मंच के जरिए उनके लिए लड़ाई लड़ी है। मैं किसी पार्टी के बजाए इस जन अधिकार मंच को आगे ले जाने की दिशा में कार्य करूंगा। बाकी आगे की बात आगे ही तय की जाएगी।

यूपी की राजनीति में बिसात दर बिसात नए बदलाव देखने को मिलेंगे। कल तक सुप्रीमों और पार्टी के लिए बयान रचने वाले, गुणगान करने वालों के पलायन भी देखने को मिलेंगे। पर जनता को इस बीच अपने प्रदेश के उत्तम बनने, विकसित होने, पत्थरों के ताबूतों से निकल कर सच में विकसित की कतार में शामिल होने वाले सच्चे इरादों का इंतजार रहेगा।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+