उत्तर प्रदेश चुनावः मथुरा में मंदिर-मस्ज़िद विवाद कितना बड़ा मुद्दा
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श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट के सचिव कपिल शर्मा का कहना है कि मथुरा और यहाँ स्थित 'जन्मस्थान का विकास और भव्य मंदिर का निर्माण' धर्म प्रेमियों के लिए विषय लंबे समय से एक प्रमुख मुद्दा है.

उन्होंने कहा, "ये विषय किसी राजनीतिक पार्टी का नहीं है. जब भव्य और विशाल मंदिर को तोड़कर उस स्थान पर ईदगाह का निर्माण कराया गया, तभी से करोड़ों-करोड़ कृष्ण भक्तों के मन में अवश्य ये चाह है कि भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि का विकास भी पूर्ण दिव्यता और भव्यता के साथ हो. "
कपिल शर्मा ने आगे कहा, "अयोध्या में भव्य और दिव्य राममंदिर का निर्माण, काशी में बाबा धाम का विस्तार और सौंदर्यीकरण के बाद में धर्म प्रेमी जनता के मन में ये आशा अवश्य जगी है कि जो विकास की गंगा अयोध्या से प्रारंभ होकर काशी तक पहुँची, मथुरा में भी उसकी धारा आ चुकी है. वो मथुरा के विकास के साथ ही त्रिवेणी का रूप धारण करेगी."
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उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव क़रीब आते ही मथुरा में मंदिर-मस्जिद मुद्दे को लेकर चर्चा शुरु हो गई. इसे लेकर न्यायालय में भी मामला दाखिल किया गया है.
बीते साल दिसंबर में यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने 'मथुरा की तैयारी' का नारा दिया. इसके कई मतलब निकाले गए. कई लोगों ने दावा किया कि वो मंदिर मस्जिद मुद्दे की बात उठा रहे हैं.
श्रीकृष्ण जन्मस्थान और शाही ईदगाह मस्जिद
मथुरा के कटरा केशव देव को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मस्थान माना जाता है. मंदिर परिसर से सटी शाही ईदगाह मस्जिद है. ये 17वीं शताब्दी में बनी थी. कई हिंदुओं का दावा है कि मस्जिद मंदिर तोड़कर बनाई गई थी. वहीं कई मुसलमान संगठन इस दावे को ख़ारिज करते हैं.
शाही ईदगाह कमेटी के ज्वाइंट सेक्रेटरी डॉक्टर अबरार हुसैन कहते हैं कि विधानसभा चुनाव में मंदिर मस्जिद का मुद्दा नहीं है.
वो कहते हैं, "ये मथुरा नगरी योगीराज श्रीकृष्ण और रसखान की नगरी है. यहाँ जब- जब कंस पैदा हुए हैं, उनके विनाश के लिए कृष्ण भी आए हैं. इसको यहाँ का जनमानस हिंदू मुसलमान भली प्रकार से जानते हैं."
वो कहते हैं कि असली आवश्यकता जनता की मूलभूत परेशानी को दूर करने की है.
डॉक्टर अबरार आरोप लगाते हैं, "भारतीय जनता पार्टी का चाल चरित्र और चेहरा झूठ का रहा है, उसने हमेशा मंदिर-मस्जिद और जाति-धर्म के नाम पर राजनीति की है. उनका एक फ़ॉर्मूला बाबरी मस्जिद को लेकर फ़िट हो गया तो उन्होंने सोचा कि ये फ़ॉर्मूला तो यहाँ भी कामयाब हो जाएगा. लेकिन मथुरा नगरी सौहार्द और प्रेम की नगरी है, यहाँ के लोग हिंदू मुस्लिम सब एक दूसरे के नज़दीक हैं."
वहीं बीजेपी नेता मोहम्मद रियाज़ुद्दीन डॉक्टर अबरार के आरोपों को ख़ारिज करते हैं. वो दावा करते हैं कि 'मथुरा की तैयारी' नारे का मतलब मथुरा में विकास कामों की तैयारी से है.
मोहम्मद रियाज़ुद्दीन आगे कहते हैं, "अभी माननीय योगी जी ने ये कहा था कि काशी और अयोध्या में जो विकास की धारा बही है, वही विकास की धारा मथुरा में भी बहाना चाहते हैं."
https://www.youtube.com/watch?v=QHY2R2svqXs
श्रीकृष्ण जन्मस्थान की 13.37 एकड़ ज़मीन पर मालिकाना हक़ को लेकर कई लोग कोर्ट भी गए हैं. इस ज़मीन के ही एक हिस्से पर शाही ईदगाह है.
कांग्रेस समर्थक और मथुरा के एक सामाजिक कार्यकर्ता गोपाल अग्रवाल दावा करते हैं कि असल मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए मंदिर-मस्जिद की बात की जा रही है.
वो कहते हैं, " मथुरा के जो मुद्दे हैं, उन्हें तो पेश ही नहीं किया जा रहा. मथुरा में महंगाई की मार है. सड़कें टूटी हुई हैं. लोग बेरोज़गार हैं. काम धंधा नहीं है. स्वास्थ्य की स्थिति ठीक नहीं है. इसे मुद्दा नहीं बनाया जा रहा है. सिर्फ़ मंदिर और मस्जिद को मुद्द्दा बनाया जा रहा है."
बीएसपी नेता संघ रतन सेठी कहते हैं, "मुद्दा विकास का रहना चाहिए, मुद्दा भाई चारे का रहना चाहिए, मुद्दा समरसता का रहना चाहिए. शिक्षा का मुद्दा रहना चाहिए."
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बीएसपी नेता राहुल रावत इस मुद्दे के समाधान के लिए अपनी पार्टी प्रमुख मायावती से उम्मीद लगाए हुए हैं.
वो दावा करते हैं, " बहनजी की सरकार बनती है तो आप देखिएगा कि ये जन्मभूमि और ईदगाह वाले मुद्दे को हम कितनी समरसता के साथ हल करते हैं. इनकी (बीजेपी की) कथनी और करनी में अंतर है. मंदिर सुप्रीम कोर्ट ने बनाया. बताओ किसने विरोध किया. आप बनाओ तो सही. "
वहीं, स्थानीय युवा पुंडरीक रत्न कहते हैं, " मुद्दा मंदिर और मस्जिद नहीं बल्कि विकास होना चाहिए और विकास कोई जादू की छड़ी नहीं जो रातों-रात हो जाए."
श्रीकृष्ण जन्मभूमि क्षेत्र में रहने वाले गोविंद शर्मा कहते हैं, " विकास की सिर्फ़ बातें की जा रही हैं. विकास के नाम पर सारी सड़कों को खोदकर पटक दिया गया है. बिजली बहुत महँगी है. महंगाई बहुत बढ़ रही है. इसके अलावा मथुरा में बंदरों की समस्या है. बंदरों की समस्चा से कोई निजात नहीं दिला पाया."
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