मायावती की राजनीति गुलाबी पत्थरों और हरिजन एक्ट के बीच सिमट गई है?

By: हिमांशु तिवारी आत्मीय
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लखनऊ। बसपा सुप्रीमो मायवाती की राजनीति के बारे में क्या सोचते हैं लखनऊ के युवा। इस बारे में जानने के लिए वनइंडिया ने लखनऊ के लोगों से कुछ सवाल किये, जिसमें कुछ दिलचस्प बातें निकलकर सामने आयीं। पेश है एक रिपोर्ट..

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खुलेआम चलती है तानाशाही

लखनऊ के स्थानीय निवासी पियूष सिंह ने मायाराज में प्रभावी होने वाले हरिजन एक्ट के बारे में कहा कि मायावती की सरकार आते ही नियम, कानून सख्त हो जाते हैं लेकिन कानून की आड़ में हरिजनों को सवर्णों को परेशान करने का बहाना ढूंढ़ने का बहाना मिल जाता है। कई दफे बेवजह सवर्णों को कटघरे में खड़ा किया जाता है, जिसकी वजह से यह मायाराज में यह महसूस होता है कि खुलेआम तानाशाही चल रही है और सुनवाई हरिजन की ही है।

गुलाबी पत्थरों के बजाए रोजगार मिल जाता तो बेहतर होता

बाराबंकी के स्थानीय निवासी महेंद्र ने गुलाबी पत्थरों के सवाल पर कहा कि जिस तरह से (4500 करोड़ से ज्यादा ) बड़ी राशि को गुलाबी पत्थरों के लिए खर्च किया गया है उसे यदि रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए लगाया जाता तो वाकई उत्तर प्रदेश विकास के पायदान पर शायद कुछ फीसदी ही ऊपर खिसक जाता।

प्रदेश के कई गांवों में बिजली नहीं

आज भी प्रदेश के कई गांवों में बिजली नहीं है, सड़क नहीं है, घाघरा जैसी नदियों की वजह से हर बार बाढ़ हजारों करोड़ का नुकसान कर जाती है। लेकिन इस दिशा में न मायावती ने ही सोचा न ही सत्तारूढ़ सपा की ओर अखिलेश यादव ने। जबकि इस दिशा में यदि कार्य किए जाते तो परिणाम कुछ और ही होते।

सोच समझकर चुनना है नेता

एमबीए स्टूडेंट शशांक दुबे जो कि लखनऊ के स्थानीय निवासी है उन्होंने कहा कि मायावती की राजनीति गुलाबी पत्थरों और हरिजन एक्ट के बीच सिमट कर रह गई है। हां बसपा सुप्रीमो मायावती का कहना है कि अब वे गुलाबी पत्थरों पर पैसा नहीं खर्च करेंगी लेकिन वे अब यह भी बता दें कि वे प्रदेश का विकास किस तरह से करेंगी? रोजगार मुहैया कराने की दिशा में उनकी पहल क्या होगी ? इंफ्रास्ट्रक्चर ही उत्तर प्रदेश का मजबूत नहीं है, वे इसके लिए क्या करेंगी ?

हरिजन एक्ट का सच !

जानकारी के मुताबिक मायावती की ओर से लगवाई गईं बसपा के संस्थापक कांशीराम और मायावती की प्रतिमा पर 6 करोड़ रुपये की लागत आई। जबकि सूबे की राजधानी लखनऊ जो कि हाथियों की प्रतिमा से पटा हुआ है उसमें से प्रत्येक हाथी पर 70 लाख रूपये खर्च हुए हैं। वहीं हरिजन एक्ट के मामलों पर यदि गौर किया जाए तो तो हकीकत बेहद चौंकाने वाली है।

बड़ी संख्या में फर्जी मुकदमे

मीडिया रिपोर्ट में एक स्थान पर जिक्र किया गया है कि मायाराज में 2007-2010 के दौरान 27,839 मुकदमें दर्ज किए गए, जिसमें से 3551 केस फर्जी निकले। हालांकि ये आंकड़ें कितने पुष्ट हैं इसकी जानकारी अभी नहीं है। लेकिन सवाल ये है कि इतनी बड़ी संख्या में फर्जी मुकदमे कई बातों की ओर इशारा कर रही हैं। देखना दिलचस्प होगा कि मायावती किस दावे के साथ विधानसभा चुनाव में उतरती हैं।

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English summary
Mayawati is not an ordinary Dalit leader. She cannot be treated like other fossilised Ambedkarites or turncoats like Ram Vilas Paswan Said Common people of Uttar Pradesh
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