लखनऊ से काकोरी के बीच अमित शाह का चुनावी दलित राष्ट्रवाद
लखनऊ। देश की कुल दलित आबादी का 50 फीसदी हिस्सा देश के चार राज्यों यूपी, पश्चिम बंगाल, बिहार तमिलनाडु में रहता है, इन चारों राज्यों में दलितों की कुल आबादी तकरीबन 20.14 करोड़ है।
यही नहीं इस 50 फीसदी आबादी का सबसे बड़ा हिस्सा यानि 20 फीसदी दलित अकेले यूपी में रहते है। लिहाजा यूपी में दलित वोट बैंक की अहमियत को भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह बेहतर समझते हैं।
साफ किया भाजपा का रूख
अमित शाह ने शनिवार को काकोरी पहुंचकर शहीदों को अपनी श्रद्धांजलि दी, इस मौके पर उन्होंने ना सिर्फ शहीदों को याद किया बल्कि दलित वोट बैंक पर पैनी नजर रखते हुए प्रदेश सरकार पर जमकर हमला बोला और आगामी चुनाव के लिए भाजपा के रुख को साफ कर दिया।
केंद्र के कार्यक्रम के तहत चल रहा है मंत्रियों का दौरा
इस बार केंद्र ने स्वतंत्रता दिवस के समारोह एक हफ्ते से अधिक समय तक मनाने का फैसला लिया है, इसी कड़ी में देश की स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लेने वाले शहीदों के जन्मस्थान पर जाकर उनको याद किया जा रहा है। तमाम केंद्रीय मंत्री विभिन्न जगहों पर जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
पहले से लिखी जा चुकी थी काकोरी की पटकथा
शाह के काकोरी को चुनने के पीछे की वजह को राजनीतिक चश्मे से भी देखने की जरूरत है, जिस तरह से शाह लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचे और यहीं पर एक घंटे पार्टी के नेताओं के साथ मीटिंग की उसमें इस पूरे कार्यक्रम की पटकथा पहले से लिखा जा चुकी थी। पूरा कार्यक्रम पहले से ही लिखी पटकथा के अनुसार ही चला।
शाह ने लखनऊ से महज 20-25 किलोमीटर दूर काकोरी को चुना
स्वतंत्रता दिवस से पहले शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए शाह ने लखनऊ से महज 20-25 किलोमीटर दूर काकोरी को चुना जहां अंग्रेजों की ट्रेन लूटने की घटना को अंजाम दिया गया था। इसमें अशफाक उल्ला, राम प्रसाद बिस्मिल, चंद्रशेखर आजाद , सचींद्र बक्षी जैसे स्वतंत्रता सेनानी शामिल थे।
दलित बेल्ट पर नजर और काकोरी की डगर
काकोरी को ही शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए चुनने के पीछे की वजह यहां की दलित आबादी को भी माना जाता है। ऐसे में काकोरी से ना सिर्फ शहीदों को श्रद्धांजलि बल्कि दलित वोट बैंक को रिझाने की भी कोशिश की जा सकती थी लिहाजा काकोरी सहित मलिहाबाद, बालामऊ, हरदोई सहित आस पास के जिलों में दलित बहुतायत केे चलते काकोरी को चुना गया।
काकोरी को पर्यटन स्थल बनाने का शिगूफा
काकोरी पहुंचकर अमित शाह ने शहीदो श्रद्धांजलि देने के साथ कहा कि हम उनके कर्ज को कभी भी चुका नहीं सकते, उन्होंने काकोरी को पर्यटन स्थल बनाये जाने की भी बात कही। शाह ने कहा कि वह काकोरी को पर्यटन स्थल बनवाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करेंगे।
विपक्ष को भी लिया आड़े हाथ
शाह ने मंच का भरपूर इस्तेमाल करते हुए यूपी चुनाव के मद्देनजर राज्य सरकार और अखिलेश यादव पर जमकर हमला बोला। उन्होंने यूपी में बिगड़ती कानून व्वयस्था का हवाला देते हुए कहा कि यूपी में गुंडाराज है और अपराधी बेखौफ घूमते हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती पर भी उन्होंने निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें पत्थरों की इमारत से फुर्सत नहीं है ऐसे में प्रदेश का विकास वो कैसे कर सकती हैं।
दलित नेता के साये में रही पूरी काकारी यात्रा
इस पूरे कार्यक्रम के दौरान शाह के साथ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या भी थे जिन्हें पार्टी का बड़ा दलित चेहरा माना जाता है। काकोरी से लखनऊ पहुंचने के बाद शाह भाजपा सांसद कौशल किशोर के घर पहुंचे। कौशल किशोर को भी पार्टी का दलित चेहरा माना जाता है, ऐसे में शाह का उनके घर पहुंचना भी दलित वोट बैंक के समीकरण की दृष्टि से ही देखा जा रहा है।
अमित शाह का असली एग्जाम
गुजरात में आनंदी बेन पटेल के इस्तीफा देने के बाद एक तबका यह कयास लगा रहा था कि अमित शाह को यहां की कमान सौंपी जा सकती है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें आगामी यूपी चुनावों के देखते हुए केंद्र से गुजरात नहीं भेजने का फैसला लिया। नरेंद्र मोदी के इस फैसले के बाद अमित शाह के लिए 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद यूपी सबसे बड़ी परीक्षा है, जिसमे वह अपना पूरा दमखम झोंक देना चाहते हैं।
पीएम के बयान के बाद नेताओं की वरीयता दलित वोट बैंक
हाल ही में जिस तरह से प्रदेश सहित देशभर में दलितों के खिलाफ हिंसा की घटनायें बढ़ी हैं उसने पार्टी की मुश्किलों को बढ़ा दिया है, जिसे नजर में रखते हुए ना सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुले मंच पर दलितों के पक्ष में बयान दिया बल्कि अन्य नेता भी अब दलितों में अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रहे हैं।













Click it and Unblock the Notifications