इमरान के भारत विरोधी भाषण के उलट पीएम मोदी ने पाकिस्तान का नाम भी नहीं लिया, जानिए क्यों
नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से भाषण में एकबार भी पाकिस्तान का नाम नहीं लिया। जबकि, एक दिन पहले ही पाकिस्तानी स्वतंत्रता दिवस पर इमरान खान सिर्फ भारत को ही कोसते रह गए थे। यहां ध्यान देने वाली बात है कि दोनों देश एक दिन के अंतर पर ही अपना स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं, पाकिस्तान 14 और भारत 15 अगस्त को। इस अवसर पर दोनों ही देशों के प्रधानमंत्री अपने-अपने देश की जनता को संबोधित करते हैं। यह परंपरा भी दोनों देशों में 1947 से ही चली आ रही है। लेकिन, फिर भी दोनों देशों के बर्ताव में इतना बड़ा अंतर बहुत मायने रखता है। दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी ने जम्मू-कश्मीर में बदले हालात के बावजूद पाकिस्तान को नजरअंदाज करके भारतीयों को ही नहीं पूरी दुनिया और खासकर पाकिस्तान को बहुत बड़ा संदेश देने की कोशिश की है।

इमरान ने दिया नफरत का संदेश
14 अगस्त यानि बुधवार को पाकिस्तानी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इमरान खान ने अपने करीब 40 मिनट के भाषण को इसबार एक तरह से भारत के नाम ही लिखवाया था। उनके भाषण के अधिकांश हिस्से में उनके निशाने पर भारत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी और आरएसएस ही छाए रहे। आलम ये रहा कि भारत को धमकाने की कोशिश में बुधवार को कई बार उनकी जुबान भी लड़खड़ा गई, लेकिन उन्होंने 70 साल में असफल राष्ट्र साबित हो चुके अपने मुल्क की नाकामियों को छिपाने के लिए सिर्फ भारत का रोना रोया और आवाम के आंखों में धूल झोंकने की कोशिश की। उन्होंने पाकिस्तानी स्वतंत्रता दिवस पर अपनी जनता के कल्याण के लिए बात करने से ज्यादा भारत के खिलाफ आग उगलना जरूरी समझा। स्वतंत्रता दिवस जैसे मौके को उन्होंने नफरत पैदा करने के लिए इस्तेमाल किया। क्योंकि, उनका एकमात्र मकसद अपनी नाकामियों और अपने देश की क्षमता को छिपाना था।

युद्ध की गीदड़भभकी में गुजारा वक्त
मजे की बात है कि पाकिस्तान ने इसबार अपने स्वतंत्रता दिवस को 'कश्मीर एकता दिवस' के रूप में मनाया है। इसके जरिए इमरान की सरकार ने अपनी सारी शक्ति और ऊर्जा इसपर खपाया कि वो जम्मू-कश्मीर में भारत की ओर से किए गए संवैधानिक परिवर्तन के प्रति कश्मीरी जनता को भड़का सकें। दिलस्प बात ये भी है कि इसबार पाकिस्तानी पीएम भाषण देने के लिए पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के मुजफ्फराबाद पहुंचे थे। इस दौरान वे इतने बौखलाए हुए नजर आ रहे थे कि उन्होंने आशंका जता दी कि भारत पीओके में हमला करने की योजना बना चुका है। ये सब बोलकर उन्होंने फिर से भारत को युद्ध की भी धमकी दी। अपनी बात से पीओके और पाकिस्तानी आवाम का भरोसा जीतने के लिए उन्होंने भारत के पुलवामा में आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के बालाकोट में हुए भारत के एयरस्ट्राइक की हकीकत भी अपने मुंह से कबूल लिया। उन्होंने कहा कि भारत बालाकोट से भी खौफनाक हमला करने वाला है। यहां ये बताना जरूरी है कि ये वही पाकिस्तानी पीएम इमरान खान हैं, जो 26 फरवरी के एयरस्ट्राइक की पहले खिल्ली उड़ा रहे थे।
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वैश्विक महाशक्ति के प्रधानमंत्री के रूप में बोले मोदी
मोदी चाहते तो पिछले 10 दिनों में पाकिस्तान और इमरान खान की करतूतों पर बालाकोट वाली जुबान में ही जवाब दे सकते थे। लेकिन, उन्होंने दिखा दिया कि वे पाकिस्तान जैसे असफल राष्ट्र के नहीं, भारत जैसी महाशक्ति के प्रधानमंत्री के हैं। इसलिए, 92 मिनट के भाषण को उन्होंने अपने देश, देश की जनता और उनकी जरूरतों पर ही समर्पित किया। उन्होंने पिछले करीब 10 हफ्तों के अपने कार्यकाल का देश को संक्षेप में विवरण भी दिया और इस दौरान उठाए गए ऐतिहासिक कदमों पर भी बात की। उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाना क्यों जरूरी था और इससे आम जनता को क्या फायदा मिलेगा।

मोदी ने की देश और जनहित की बात
पीएम मोदी ने देश के सामने जनसंख्या विस्फोट की समस्या भी रखी और पर्यावरण संरक्षण पर लोगों से भागीदारी भी मांगी। उन्होंने हर घर तक पीने का पानी पहुंचाने के लिए जल जीवन मिशन के तहत 3.5 लाख करोड़ रुपये आवंटित करने की भी जानकारी दी। उन्होंने देश की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए चीफ ऑफ डिफेंस (सीडीएस) की नियुक्ति का भी ऐलान किया। उन्होंने भारत को 5 ट्रिनियन डॉलर की इकोनॉमी बनामे का लक्ष्य भी देश के सामने रखा और जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख में 70 वर्षों से अन्याय झेलते आ रहे लोगों के जीवन में बड़े बदलाव लाकर दिखाने का संकल्प भी जताया।

पीएम मोदी ने अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी निभाई
पाकिस्तानी स्वतंत्रता दिवस पर वहां की जनता को पीएम इमरान ने उनका कल्याण नहीं, बल्कि नफरत, हिंसा, झूठ और मक्कारी का पाठ पढ़ाया। जबकि, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पाकिस्तान का नाम लेने की बजाय देश के विकास और कल्याण की बातें करने में अपनी एनर्जी लगाई। इस तरह से पीएम मोदी बिना नाम लिए ही पाकिस्तान और इमरान खान को यह मैसेज देने में कामयाब रहे कि 'नया पाकिस्तान' और 'नया भारत' में बहुत बड़ा गैप हो चुका है। भारत पाकिस्तान से कहीं आगे निकल चुका है। उसे पाकिस्तान जैसे देश की बकवास पर वक्त जाया करने की जरूरत नहीं है। न्यू इंडिया के प्रति दुनिया का सम्मान बढ़ा है। भारत की बात को गंभीरता से सुनना विश्व की मजबूरी भी है और उसमें पूरी दुनिया के लोगों की भी भलाई है। जबकि, 'नया पाकिस्तान' लाचारी की उस अवस्था में पहुंच चुका है, जहां का प्रधानमंत्री सिर्फ युद्ध की धमकियां ही देता है, अपने यहां रोटी-नान की कीमत कंट्रोल करने की भी उसकी हैसियत नहीं है।
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