हिमाचल में क़ैदियों को मुख्यधारा में लाने की अनोखी पहल

शिमला में मौजूद कैफे
BBC
शिमला में मौजूद कैफे

भारत के ख़ूबसूरत पर्यटक स्थल शिमला के फ़ैशनेबल मॉल रोड पर देवदार के ऊंचे-ऊंचे पेड़ों के साये में स्थित बुक कैफ़े में नौजवान छात्र-छात्राएं ख़ामोशी से किताबों में खोए हुए हैं.

कई नौजवान कैफ़े के काउंटर से सैंडविचेज़, कॉफी, बर्गर जैसी चीज़ें ख़रीद रहे हैं. ये कैफ़े आजीवान कारावास की सज़ा काट रहे दो क़ैदी- योगराज और कुलदीप चला रहे हैं. यहां जो खाने-पीने की चीज़ें होती हैं वो भी जेल के क़ैदियों ने ही तैयार की हैं.

योगराज को एक व्यक्ति के क़त्ल के जुर्म में उम्र क़ैद की सज़ा हुई थी. वो पिछले एक बरस से उम्र क़ैद की सज़ा पाए एक दूसरे क़ैदी के साथ मिल कर ये कैफ़े चला रहे हैं.

योगराज ने नर्म लहजे में बताया, "पहले हम जेल की चारदीवारी में बंद रहते थे. आपस में ही बात किया करते थे, लेकिन जब से यहां आ रहे हैं और आम लोगों से बात कर रहे हैं, हमें बहुत अच्छा लग रहा है."

उनके साथ काम करने वाले कुलदीप कहते हैं, "ऐसा लगता है जैसे एक नया जीवन मिल गया हो."

कैफ़े में एक छोटा-सा नोटिस बोर्ड लगा हुआ है, जिस पर लिखा हुआ है कि ये कैफ़े सज़ायाफ्ता क़ैदियों द्वारा चलाया जाता है.

यहां आने वाले स्थानीय लोगों को भी पता है कि यहां काम करने वाले क़ैदी हैं.

इस कैफ़े में आने वाली शीतल कंवर कहती हैं, "मैंने सुना है कि ये कैफ़े जेल के क़ैदी चला रहे हैं. ये बहुत अच्छी बात है."

शिमला में मौजूद कैफे
BBC
शिमला में मौजूद कैफे

क़ैदियों के पुर्नवास की कोशिश

शिमला की कैथु जेल के दर्जनों क़ैदी बिना किसी पहरे के काम करने के लिए रोज़ाना शहर के विभिन्न क्षेत्रों में जाते हैं. इनमें से कई शिक्षित क़ैदी कोचिंग और ट्यूटोरियल क्लासेज भी ले रहे हैं.

गौरव वर्मा एक नौजवान क़ैदी हैं. वो उम्र क़ैद की सज़ा काट रहे हैं. सज़ा से पहले वो एक इंजिनियरिंग स्टूडेंट थे.

वो कहते हैं, "जेल में जाने के बाद आपका दिमाग़ काम करना बंद कर देता है, लेकिन शरीर नहीं बंद होता है. जब मैं बाहर निकलता हूं तो मैं बाहरी दुनिया से जुड़ जाता है."

"और फिर ये कि मैं काम कर रहा हूं. अब मेरी निजी ज़िंदगी पर तो मेरा बस नहीं है, लेकिन मेरी प्रोफ़ेशनल लाइफ़ पूरी तरह से पटरी पर वापस आ गई है और मैं इससे बहुत ख़ुश हूं."


शिमला की क़ैद में सज़ाप्राप्त क़ैदी
BBC
शिमला की क़ैद में सज़ाप्राप्त क़ैदी

सज़ा पाने वाले क़ैदियों को जेल की चारदीवारी से बाहर निकालकर समाज में दोबारा आने का मौक़ा देना क़ैदियों के सुधार और पुनर्वास का हिस्सा है.

हिमाचल प्रदेश के जेल विभाग ने ओपन जेल (खुली जेल) प्रोग्राम के तहत जेलों में सुधार का ये क़दम उठाया है.

राज्य के जेल विभाग के महानिदेशक सोमेश गोयल ने बीबीसी से कहा, "जेल एक ऐसा विभाग है जहां अपने देश में कम सुधार हो पाया है."

"हम ये कोशिश कर रहे हैं कि क़ैद की जगह फ़ोकस अब क़ैदियों के सुधार और पुर्नवास पर हो."

गौरव वर्मा
BBC
गौरव वर्मा

सोमेश गोयल कहते हैं, "क़ैदी ने जो जुर्म किए हैं, उसकी सज़ा तो वो पा ही रहा हैं, लेकिन उनके साथ हमारा जो मानवीय बर्ताव होना चाहिए, क्या उसमें कमी लाने की ज़रूरत हैं? अगर हम उसको कोई हुनर सिखा सकते हैं तो वो एक बेहतर इंसान बन सकता है. इसकी हमें पुरजोर कोशिश करनी चाहिए. और हम वही कर रहे हैं."

शिमला में ओपन जेल प्रोग्राम के तहत लगभग 150 क़ैदियों को जेल से बाहर काम करने के लिए भेजा जाता है.

क्या ये क़ैदी फ़रार नहीं हो सकते हैं?

सोमेश गोयल कहते हैं, "बाहर भेजे जाने वाले क़ैदियों के किरदार की जांच के लिए एक व्यापक प्रक्रिया है."

वो बताते हैं कि "क़ैदियों के परोल पर जाने का रिकॉर्ड देखा जाता है. साथ ही जेल के अंदर उनका रवैया कैसा रहा है ये भी देखा जाता है. फिर हम देखते हैं कि किन लोगों को हम बाहर रोज़गार दिला सकते हैं. किन लोगों से हमें जेल के भीतर काम कराना है. क़ैदी ने किस तरह का काम किया है? ये सब देखने के बाद ही हम लोगों को चुनते हैं."


शिमला की क़ैद में सज़ाप्राप्त क़ैदी
BBC
शिमला की क़ैद में सज़ाप्राप्त क़ैदी

जेल में चलाए जा रहे सुधार कार्यक्रम के तहत कई क़ैदी शहर की कई जगहों पर कैंटीन चला रहे हैं. कुछ ने हेयर सैलून खोल रखा है और कई स्थानों पर क़ैदियों के ज़रिए बनाई कुकीज़ और कपड़े की दुकानें भी हैं.

मोहम्मद मरग़ूब दस बरस से ज़्यादा अरसे से जेल में रहे हैं. अब वो सिलाई का काम कर रहे हैं. उनका कहना है कि मानसिक तौर पर आज़ादी के साथ साथ इससे कुछ पैसे भी मिल रहे हैं.

वो कहते हैं, "ये मेरे काम करने के ऊपर है. कई बार मैं चार हज़ार रुपए कमा लेता हूं. कई बार पांच हज़ार भी मिल जाते हैं. इसी के ज़रिए मैं अपने मां-बाप को पैसे भी भेजता हूं."

मोहम्मद मरग़ूब
BBC
मोहम्मद मरग़ूब

कई कार्यक्रम

कैथु जेल के जेलर भानु प्रकाश शर्मा ने बीबीसी को बताया कि जेल के भीतर हालात कितने ही अच्छे क्यों न हों, क़ैदियों पर मानसिक दबाव बहुत रहता है.

इन्हीं परिस्थितियों से क़ैदियों को निकालने के लिए काम कराने के अलावा भी कई तरह के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं.

भानु प्रकाश शर्मा कहते हैं, "हमने इसके लिए एक मशहूर पेंटर को बुलाया और जेल की दीवारों पर अलग-अलग पेंटिंग्स बनवाईं. हर पेंटिंग में कुछ न कुछ संदेश देने की कोशिश की गई. इस तरह के क़दम का उद्देश्य क़ैदियों में एक सकारात्मक सोच पैदा करना है."

भानु प्रकाश शर्मा
BBC
भानु प्रकाश शर्मा

हिमाचल प्रदेश की जेलों में सुधार का ये प्रयोग अब तक किसी दुर्घटना के बग़ैर कामयाबी के साथ चलता रहा है.

यहां की ये जेलें क़ैदियों के प्रति समाज के मानवीय रवैए की झलक तो हैं ही, साथ ही ये देश के दूसरे राज्यों की जेलों के लिए भी बेहतरीन मॉडल पेश कर रही हैं.

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+