पब संस्कृति के खिलाफ विरोध या महिलाओं के खिलाफ गुस्सा

मंत्री जी के लिए सबसे बड़ा सवाल
लेकिन सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि आखिर मंत्री जी से कोई यह तो पूछे कि आखिर संस्कृति, पब संस्कृति कब से बन गई। पहली बात तो पब को संस्कृति से जोड़ना ही बेकार सा है। पब कोई संस्कृति नहीं है। पब तो पश्चिम की ओर से आया आया हुआ भारतीय शराबखाने का बदला हुआ नाम है। जो अब ग्लोबल बन गया है।
पब में अनावश्यक चीजें हो रही हैं
केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन राज्य मंत्री श्रीपद नाइक का कहना है कि पब में अनावश्यक चीजें घटित हो रही हैं। इसलिए इसको बंद कर देना चाहिए। मंत्री जी खुद गोवा से ताल्लुक रखते हैं लेकिन मंत्री कई सालों से चल रहे इन शराब खानों (पब) को लाइसेंस की बंदरबांट पर आखिर अबतक क्यों चुप रहे। दरअसल, बात तो यह है कि गोवा सरकार में मंत्री व इस तरह के बयान देने वाले मंत्री भी महिलाओं की बढ़ती आजादी के खिलाफ गुस्सा उगल रहे हैं।
कौन कहता है देश हित में है?
मंत्री नाइक ने कहा कि हमें यह तय करना होगा कि हमारी संस्कृति के लिए क्या बढ़िया है। नाइक ने कहा कि पब कल्चर का बढ़ना देशहित में नहीं है। जबकि आज तक कोई ऐसा बयान तो नहीं आया कि किसी ने कहा हो कि पब देशहित में है। जबकि हर पार्टी की सरकार में पब खोलने के लिए लाइसेंस धड़ाधड़ बांटे जाते हैं।












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