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#MeToo:संघ की नाराजगी और पीएम मोदी के निर्देश पर हुआ एमजे अकबर का इस्‍तीफा!

नई दिल्‍ली। एमजे अकबर ने केंद्रीय विदेश राज्‍य मंत्री पद से इस्‍तीफा दे दिया है। #Metoo कैंपेन में एमजे अकबर पर अब तक 20 महिला पत्रकारों ने संगीन आरोप लगाए हैं। एमजे अकबर पर सबसे पहले प्रिया रमानी ने यौनशोषण के आरोप लगाए थे, जिसके बाद महिला पत्रकारों की लाइन लग गई। सभी ने एमजे अकबर पर यौनशोषण के आरोप लगाए हैं। प्रिया रमानी ने जिस वक्‍त #Metoo कैंपेन के तहत यौनशोषण के आरोप लगाए थे, तब एमजे अकबर विदेश दौरे पर थे। विदेश से लौटने के बाद उन्‍होंने प्रिया रमानी पर मानहानि का दावा ठोक दिया। ऐसा माना जा रहा था कि एमजे अकबर का इस्‍तीफा जल्‍द से जल्‍द हो जाएगा, लेकिन आरोप कई दिन बीत जाने के बाद भी इस्‍तीफा नहीं हुआ। इस बात से आरएसएस के शीर्ष नेता खुश नहीं थे, सूत्रों के मुताबिक, एमजे अकबर ने पीएम नरेंद्र मोदी के कहने पर इस्‍तीफा दिया है।

बन रही थी महिला विरोधी छवि, इसलिए लिया इस्‍तीफा

बन रही थी महिला विरोधी छवि, इसलिए लिया इस्‍तीफा

नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद बीजेपी ने एक के बाद एक ऐसे फैसले लिए जिनसे महिला मतदाताओं के बीच जगह बनाने का प्रयास किया गया। तीन तलाक, उज्‍ज्‍वला योजना, सुकन्‍या समृद्धि योजना, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, यहां तक कई बीजेपी शासित राज्‍यों में रेप कानून को बेहद सशक्‍त किया गया। खुद पीएम मोदी अपने भाषणों में बार-बार महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं, लेकिन एमजे अकबर पर जिस तरह से 20 महिला पत्रकारों ने आरोप लगाए, उससे #Metoo कैंपेन के तहत बीजेपी बुरी तरह घिर गई थी। एमजे अकबर की निजी छवि तो इससे धूमिल हुई ही है, लेकिन पार्टी की छवि पर बुरा असर पड़ रहा था। खुद मोदी सरकार में मंत्री मेनका गांधी ने #Metoo के तहत हो रहे खुलासों पर जांच कमेटी बिठाने की बात कही, लेकिन उनकी मांग को खारिज कर दिया गया।

मजबूरी बन गया था एमजे अकबर का इस्‍तीफा

मजबूरी बन गया था एमजे अकबर का इस्‍तीफा

केरल के सबरीमाला मंदिर में सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं को प्रवेश मंजूरी दे दी। इस मामले पर खुद अरुण जेटली का बयान आया, जिन्‍होंने इशारों-इशारों में अदालत के फैसले के प्रति नाखुशी जाहिर की। उधर, सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ केरल में बुधवार को जोरदार प्रदर्शन हो रहा है। बीजेपी कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन में सबसे आगे हैं। केरल में हिंदुत्‍व बचाना उनकी राजनीतिक मजबूरी है। यहां गौर करने की बात यह है कि इधर सबरीमाला पर बीजेपी का स्‍टैंड और उधर एमजे अकबर पर आरोपों की झड़ी। बीजेपी 'महिला विरोधी' दिख रही थी, इससे बचना बेहद जरूरी था। ऐसे में मोदी सरकार के पास दूसरा कोई विकल्‍प नहीं बचा था।

शुरुआत में डैमेज का अंदाजा नहीं लगा सकी मोदी सरकार

शुरुआत में डैमेज का अंदाजा नहीं लगा सकी मोदी सरकार

एमजे अकबर जब विदेश दौरे से लौटे, तब तक कई महिला पत्रकार उन पर आरोप लगा चुकी थीं। केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज से पूछा गया तो वह चुप हो गईं। स्‍मृति ईरानी ने कहा, जिस पर आरोप लगे हैं, वही जवाब दे। पार्टी अध्‍यक्ष अमित शाह ने एक सवाल के जवाब में जांच की बात कही। मतलब, पार्टी बिल्‍कुल भी अंदाजा नहीं लगा पा रही थी, आरोप लगाने वाली महिलाओं की लिस्‍ट 20 तक जा पहुंचेगी। दरअसल, बीजेपी नेता मामला ठंडा होने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन आरोपों का तूफान रुका नहीं, उधर आरएसएस ने दिखा दी लाल झंडी।

होसबोले ने कई दिन पहले बता दी थी आरएसएस की राय

होसबोले ने कई दिन पहले बता दी थी आरएसएस की राय

राष्‍ट्रीय स्‍वयं सेवक के शीर्ष नेताओं में एक दत्‍तात्रेय होसबोले ने 11 अक्‍टूबर को ही स्‍पष्‍ट संकेत दे दिया था। उन्‍होंने #Metoo के तहत आरोप लगाने वाली एक महिला को सराहा। आंखी दास ने अपनी पोस्ट में कहा था कि जिन महिला पत्रकारों ने अपने उत्पीड़न के बारे में बताया था, उनके समर्थन के लिए #मीटू की जरूरत नहीं है। आपको महिला होने की भी जरूरत नहीं है। आपको महज इतना संवेदनशील होने की जरूरत है कि क्या सही है और क्या गलत है। होसबोले ने उनकी पोस्ट को ट्वीट किया और कहा कि मैंने इसे लाइक किया। उन्होंने वहीं लिखा है, 'उन्‍होंने जो महसूस किया, उसे व्‍यक्‍त किया।' होसबोले का यह बयान एमजे अकबर के मामले पर स्‍पष्‍ट संकेत दे गया।

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