SC/ST एक्ट मामला: सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर करेगी सरकार

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    SC/ST Act पर Supreme Court में Review Petition दाख़िल करेगी Modi Govt | वनइंडिया हिंदी

    नई दिल्ली। केंद्रीय कानून मंत्रालय ने SC/ST ऐक्ट पर सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा याचिका दाखिल करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सूत्रों की मानें तो कानून मंत्रालय ने सोशल जस्टिस मंत्रालय की याचिका को स्वीकार कर लिया है। कानून मंत्रालय ने बुधवार शाम इस पर सहमति दी थी। इस मामले में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत की अगुआई में एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इसमें रामविलास पासवान, अर्जुनराम मेघवाल, अजय टम्टा समेत कई भाजपा नेता शामिल थे।

    अगले हफ्ते तक केंद्र सरकार याचिका दायर कर सकती है

    अगले हफ्ते तक केंद्र सरकार याचिका दायर कर सकती है

    आपको बता दें कि, कोर्ट के फैसले के बाद बीजेपी के दलित सांसदों का प्रतिनिधिमंडल सामाजिक न्याय मंत्री से मिला था। इस मुलाकात में उन्होंने फैसले पर आपत्ति जताते हुए केंद्र सरकार से पुनर्विचार याचिका दायर किए जाने की मांग की थी। बुधवार को कांग्रेस प्रेसिडेंट राहुल गांधी के नेतृत्व में अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग (एससी/एसटी कमीशन) का एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिला था। सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, अगले हफ्ते तक केंद्र सरकार याचिका दायर कर सकती है।

    ये दिया था सुप्रीम कोर्ट ने फैसला

    ये दिया था सुप्रीम कोर्ट ने फैसला

    दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में स्पष्ट किया था कि एससी -एसटी एक्ट में भी तत्काल गिरफ्तारी नहीं होगी। यह आदेश उन आंकड़ों के आधार पर दिया गया था जिसमें पाया गया था कि बड़ी संख्या में इस एक्ट का दुरुपयोग हो रहा है। उच्‍चतम न्‍यायालय ने गिरफ्तारी से पहले प्राथमिक जांच-पड़ताल के आदेश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी से पहले मिलने वाली जमानत की रुकावट को भी खत्‍म कर दिया था। ऐसे में दुर्भावना के तहत दर्ज कराए गए मामलों में अब अग्रिम जमानत भी मिल सकेगी। विपक्ष ने तत्काल इसे राजनीतिक रंग देते हुए जिम्मा सरकार पर फोड़ा था।

    सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी क्रीमीलेयर मामले पर मांगा जवाब

    सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी क्रीमीलेयर मामले पर मांगा जवाब

    सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी के आरक्षण से क्रीमीलेयर को बाहर करने की मांग को लेकर दायर याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने इस मसले पर केंद्र को जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया है। हालांकि केंद्र ने कोर्ट के सामने अपनी दलील में कहा था कि एससी-एसटी की मौजूदा रिजर्वेशन पॉलिसी में क्रीमीलेयर का कोई कॉन्सेप्ट नहीं है। मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी।

    ये भी पढ़ें : SC/ST एक्ट: सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर से नाखुश भाजपा के दलित सांसद, उठाई ये मांग

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