नए चुनावी सुधारों के तहत 'आधार' से जुड़ेगी वोटर ID, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विधेयक को दी मंजूरी
नई दिल्ली, 15 दिसंबर: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को चुनावी सुधारों पर एक विधेयक को मंजूरी दे दी। जो आधार कार्ड को मतदाता पहचान पत्र से जोड़ने की अनुमति देता है। ये भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) द्वारा किए गए प्रमुख सुधारों में से एक। इसके अलावा पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग करने वालों को एक यॉट में पंजीकरण के लिए चार मोड़ मिलेंगे। चुनाव आयोग ने पहले सरकार को कई चुनावी सुधारों पर जोर देने के लिए लिखा था। जिसमें पेड न्यूज को अपराध बनाना और झूठा हलफनामा दाखिल करने की सजा को दो साल से बढ़ाकर कारावास करना शामिल है।
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सूत्रों ने कहा कि मतदाता सूची को आधार के ईको सिस्टम में सीड नहीं किया जाएगा, इसका इस्तेमाल सिर्फ सत्यापन के लिए ओटीपी प्रणाली के तहत ही होगा। इन दोनों डेटा का मिलान नहीं हो पाएगा। न ही मतदाता प्रणाली को कोई टैप या इंटरसेप्ट कर सकेगा। इस प्रणाली का व्यापक ट्रायल होगा और डाटा सुरक्षा के सभी पहलुओं पर खरा उतरने बाद लिंकिंग की कार्रवाई की जाएगी।
चुनाव आयोग ने इस साल जून में कानून मंत्रालय को पत्र लिखकर इन लंबित चुनावी सुधारों को "तेजी से" लागू करने का अनुरोध किया था। जिसमें पहली बार के मतदाताओं को एक वर्ष में कई पंजीकरण प्रयासों की अनुमति देना भी शामिल था। रिपोर्टों में कहा गया है कि सरकार के पास लगभग 40 चुनावी प्रस्ताव लंबित थे। नए मतदान सुधार ऐसे समय में हुए हैं जब उत्तर प्रदेश और पंजाब सहित कई राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं।
चुनाव आयोग ने एनआरआई और प्रवासी कामगारों के लिए रिमोट वोटिंग और मतदाताओं के दोहराव को खत्म करने सहित व्यापक चुनावी सुधारों पर जोर दिया था। बता दें कि इस साल अगस्त में सरकार ने नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए चुनाव आयोग को आधार का इस्तेमाल करने की अनुमति देने के प्रस्ताव रखा था। साथ ही सरकार ने आधार को जोड़ने के प्रस्ताव को लेकर यूआईडीएआई से संपर्क किया था।












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