आज जेटली पेश करेंगे आम बजट, चिदंबरम से अच्छा होने का दावा
अब तक देश में 25 वित्तमंत्री रह चुके हैं। जिसमें से पी चिंदबरम ही देश के अकेले वित्तमंत्री रहे हैं जिन्होंने देश को ड्रीम बजट दिया था। पी. चिदंबरम ने सन् 1997-98 में आम बजट पेश किया था। जो एक ड्रीम बजट के रूप में जाना जाता है।
चिंदबरम की तरह ही जेटली के भी बजट को भाजपाईयों ने सपनों का बजट कहा है देखते हैं कि आज यह बात साबित होती है कि नहीं। इसलिए आम से लेकर खास तक.. हर किसी को आज दिन के 11 बजे का इंतजार है क्योंकि इसी वक्त संसद में जेटली अपना बजट पढ़ना शुरू कर देंगे।
जेटली के पिटारे से हर किसी को अच्छे दिनों की दवा की उम्मीद है। हालांकि जेटली ने बजट से पहले देश की आर्थिक हालात की बदहाली का रोना संसद में रो चुके हैं जिससे राजनीति की समझ रखने वालों का कहना है कि हो सकता है कि वित्तमंत्री मोदी सरकार के अच्छे दिनों वाले जुमले को सही साबित करने के लिए कुछ कड़े कदम भी उठा लें।
क्या होगा जेटली के पिटारे में...जानने के लिए वनइंडिया पर दिन के 11 बजे से लाइव अपडेट पढ़िेये।
माना जा रहा है कि पहले बजट में जेटली आय पर कर छूट का दायरा बढ़ाने वाले हैं। अभी दो लाख रुपये की वार्षिक आय को कर के दायरे से बाहर रखा गया है। माना जा रहा है कि इसे बढ़ाकर तीन लाख किया जा सकता है। कुछ खास तरह के खर्चो पर कर छूट की सीमा और पेंशन तथा जीवन बीमा पर कर छूट की सीमा भी बढ़ाए जाने की उम्मीद है।
जेटली ने वाहन और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु क्षेत्र के लिए उत्पाद शुल्क में छूट की अवधि को छह महीने के लिए पहले ही बढ़ा दिया है। माना जा रहा है कि वह निवेश और औद्योगिक विकास तेज करने के लिए कर छूट के और भी कदम उठाएंगे।
आपको बता दें कि फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स (फिक्की) द्वारा कराए गए एक सर्वेक्षण के मुताबिक बजट विकासोन्मुख होगा और इसमें उद्योग तथा निवेशकों की समस्याओं को दूर किया जाएगा।
अधिकतर कारोबारियों को उम्मीद है कि कराधान के पिछले प्रभाव से लागू होने की नीति समाप्त की जाएगी और जीएसटी तथा प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी) को जल्द से जल्द लागू किया जाएगा।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की चुनावी घोषणा को देखते हुए माना जाना चाहिए कि बजट में मूल्य स्थिरता कोष की घोषणा हो सकती है। सरकार सस्ते आवास क्षेत्र को भी बढ़ावा दे सकती है।
खैर बजट में क्या होगा और क्या नहीं इस बारे में खुलासा बस चंद घंटों के बाद ही हो जायेगा। अब देखते हैं कि जेटली के पिटारे से अच्छे दिन आयेंगे या फिर एक बार फिर जनता को कड़वी दवा पीनी पड़ती है।













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