घर छोड़ने की बात कहने वाली उमा भारती जब आडवाणी को भला बुरा कह छोड़ गई थीं बैठक
Uma Bharti: अगले महीने यानी नवम्बर की 7 तारीख को देव दीपावली है। वैसे ये खबर देव दीपावली के बारे में नहीं, उमा भारती के बारे में है। मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की फायरब्रांड नेता उमा भारती के बारे में, लेकिन देव दीपावली का इसमें बड़ा रोल है क्योंकि उमा भारती ने आज ऐलान किया है कि वह देव दीपावली के दिन से घर में नहीं रहेंगी। इसके पीछे वजह है शराब। साध्वी के निशाने पर शराब है।

शराब के खिलाफ आग उगल रहीं उमा भारती
मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की फायरब्रांड नेता उमा भारती इन दिनों शराब के खिलाफ आग उगल रही है। शराब के खिलाफ उमा भारती की उग्रता का आप अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि उन्होंने आज 7 अक्टूबर को ऐलान किया है कि वह आने वाली देव दीपावली से घर में नहीं रहेंगी। शराब के खिलाफ उमा का गुस्सा इतना तेज था कि उन्होंने शराब के पीछे राजस्व की बात करने वालों को तो अपने लड़के का खून पीने वाला बता दिया।

शराब से कमाई करने वाले लड़के के खून पीने वाले
उमा भारती ने कहा कि जो लोग शराब के राजस्व से सरकार की कमाई करने वाले अपने लड़के के खून पीने लायक हैं। उमा भारती ने ऐलान किया कि वह तब तक घर में नहीं रहेंगी जब तक शराबबंदी के खिलाफ मध्य प्रदेश में कानून नहीं बन जाता।

शराब के खिलाफ मुहिम चलाएंगी
उन्होंने कहा है कि वह टेंट और झोपड़ी में रहेंगी और शराब के खिलाफ मुहिम चलाएंगी। हालांकि उमा भारती ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को संत बताया और कहा भी है कि उन्हें सही जानकारी नहीं दी जा रही है लेकिन जिस राज्य में उमा भारती शराब बंदी के खिलाफ मुहिम छेड़े हुए हैं वहां के मुख्यमंत्री के लिए तो ये बयान काफी चुभने वाला होगा ही।

कभी न बदला अंदाज
वैसे जिसे चुभना हो चुभे उमा भारती को इसकी परवाह कहां होती है। वे तो अपने मन की ही सुनती हैं और वही कहती हैं फिर चाहे अपनी ही पार्टी के मुख्यमंत्री के खिलाफ हो या फिर पार्टी के टॉप लीडर के खिलाफ। ये पहली बार नहीं है जब उमा भारती ने अपने आंदोलन से पार्टी के लिए मुसीबत खड़ी की है।

साल 2004 का वो किस्सा
साल 2004 था जब उमा भारती ने सरेआम पार्टी नेतृत्व को खुल्लम खुल्ला चैलेंज दे दिया था। पार्टी नेतृत्व भी वो जिसकी उस जमाने में तूती बोलती थी। वो नेता थे लाल कृष्ण आडवाणी जिन्हें उमा भारती ने सीधे चुनौती दे डाली थी। जिस घटना ने उमा भारती के राजनीतक जीवन को नया मोड़ दे दिया था आज चर्चा एक बार फिर उसकी कर रहे हैं।

उस बार भी खास दिन था
साल 2004 के सितम्बर में उमा भारती अपनी तिरंगा यात्रा पूरी कर चुकी थी। इसके साथ ही वह पार्टी में तमाम नेताओं के निशाने पर आ चुकी थीं। सुषमा स्वराज और वेकैंया नायडू जैसे उनके खिलाफ थे। इसी सबके बीच नवम्बर में धनतेरस पड़ी। पार्टी मुख्यालय में बैठक बुलाई गई। लाल कृष्ण आडवाणी पार्टी अध्यक्ष थे। बैठक की अध्यक्षता भी वही कर रहे थे। बहुत सारे पत्रकार भी बैठक को कवर करने पहुंचे हुए थे। इसी दौरान कुछ ऐसा हुआ जो किसी धमाके कम नहीं था।

बैठक में ही खोल दिया मोर्चा
पार्टी अध्यक्ष ने मीटिंग में उमा भारती का नाम लेते हुए कहा कि कुछ नेता एक दूसरे के खिलाफ बयान देते हैं। मुझसे इस बारे में सवाल पूछा जाता है... मुझे ये अच्छा नहीं लगता। ये सब बंद होना चाहिए। उधर पार्टी अध्यक्ष बोल ही रहे थे कि बीच में ही उमा भारती खड़ी हो गईं। आडवाणी ने उनका नाम लिया था। भला वे कहां चुप रनहे वाली थीं। उन्होंने सबके सामने ही बोलना शुरू कर दिया... बैठक में मौजूद नेताओं पर साजिश का आरोप लगा दिया।

मेरे खिलाफ अखबार में खबरें...
उमा भारती ने कहा मेरे खिलाफ अखबार में खबरें छपती हैं जो इसी बैठक में कुछ नेता मौजूद हैं उनके इशारे पर होता है। मैं उसके जवाब में सफाई देती हूं क्योंकि मुझे अपनी प्रतिष्ठा बचानी होती है। उमा भारती यही नहीं रुकीं उन्होंने बरसते हुए कह दिया कुछ लोग राज्यसभा में बैठे रहते हैं उनके पास कोई काम तो है नहीं, वे यही सब करते रहते हैं।

बिगड़ी तो फिर नहीं संभली बात
उमा भारती को गुस्से में देख आडवाणी ने बात को संभालने की कोशिश की और उनसे बैठने को कहा लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। उमा भारती कहां रुकने वाली थी, उन्होंने सीधे पार्टी अध्यक्ष आडवाणी को कार्रवाई करने की चुनौती दे डाली और बैठक से बाहर चली आईं। बात ज्यादा हो गई थी पार्टी ने भी मन बना लिया था। उन पर कार्रवाई हुई। निलंबित कर दिया गया। दो साल तक निष्कासित रहने के बाद उमा भारती ने अपनी नई पार्टी बनाई। भाजपा के खिलाफ चुनाव भी लड़ा लेकिन समझ में आ गया कि भाजपा से बाहर राजनीति हो सकती है सत्ता में वापसी नहीं।

मध्य प्रदेश में शराब के खिलाफ मुहिम
आखिर 5 साल बाद राजनीतिक परिस्थितियां बदलीं और 2011 में एक बार फिर वे पार्टी में शामिल हुईं। मोदी सरकार 1.0 में केंद्रीय मंत्री भी बनीं लेकिन 2019 का आम चुनाव न लड़ने का ऐलान कर दिया। उन्होंने कहा कि वह गंगा के लिए काम करना चाहती हैं। फिलहाल वह मध्य प्रदेश में शराब के खिलाफ मुहिम खोले हुए हैं, फिर चाहे वहां उनकी अपनी ही पार्टी की सरकार के लिए मुश्किल क्यों न हो रही हो।












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