15 अगस्त को 19 बम धमाकों की बड़ी योजना विफल, उग्रवादी संगठन उल्फा ने खुद बताई वजह
उग्रवादी समूह उल्फा-इंडिपेंडेंट ने आज सुबह दावा किया कि उन्होंने असम में 24 स्थानों पर बम लगाए हैं। उग्रवादी संगठन स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान "सशस्त्र विरोध प्रदर्शन" करना चाहता था, इसी इरादे से ये बम लगाए गए थे। लेकिन तकनीकी खामी की वजह से ये बम फटे ही नहीं।
उल्फा-इंडिपेंडेंट की ओर से जिस तरह से यह बयान सामने आया है, उसने इस क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उल्फा के दावों की अधिकारी जांच कर रहे हैं। दावे के अनुसार बम कथित तौर पर शिवसागर, डिब्रूगढ़ और गुवाहाटी सहित विभिन्न स्थानों पर रखे गए थे। वहीं अल्फा के दावे के बाद अधिकारी संभावित खतरे की जांच में जुटे हैं।

इस बीच, पुलिस ने शिवसागर और नागांव में कुछ संदिग्ध वस्तुएँ मिलने की सूचना दी है। ये बरामदगी उल्फा-आई के दावों के बाद सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चल रहे प्रयासों का हिस्सा हैं। अधिकारी इन विस्फोटकों से उत्पन्न किसी भी संभावित खतरे को बेअसर करने के लिए लगन से काम कर रहे हैं।
अधिकारियों ने नागरिकों से भी सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देने का अपील की है। सुरक्षा बनाए रखने और संभावित खतरों को विफल करने में जनता का सहयोग ऐसे मामलों में काफी अहम हो जाता है।
स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है क्योंकि अधिकारी उल्फा-आई की गतिविधियों से उत्पन्न किसी भी संभावित खतरे को कम करने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। राज्य भर में सुरक्षा बनाए रखने में जन जागरूकता और सहयोग काफी अहम भूमिका निभाते हैं।
उल्फा का इतिहास
उल्फा की स्थापना 1979 में "संप्रभु असम" की मांग के साथ हुई थी। अपनी स्थापना के बाद से ही यह विध्वंसकारी गतिविधियों में शामिल रहा है, जिसके कारण केंद्र सरकार ने 1990 में इस पर प्रतिबंध लगा दिया था। 2010 में यह समूह दो गुटों में विभाजित हो गया।












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