लचर तरीके से चल रहे दो महिला बैंकों का विलय होगा

Two women banks may be merged
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। एनडीए सरकार मुमकिन है कि आने वाले समय में दो महिला बैंकों- भारतीय महिला बैंक और राष्ट्रीय महिला कोष का विलय कर दे। दरअसल राष्ट्रीय महिला कोष को पूरी तरह से बैंक नहीं भी कह सकते। यह महिलाओं को खुदमुख्तार बनाने के लिए चालू किया गया था। कहने को दोनों महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के इरादे से सस्ता लोन देते हैं। पर सरकार मानती है कि इन दोनों बैंकों का कामकाज चुस्त नहीं है। इसे बेहतर बनाने की गुजांइश है। इसी कारण से सरकार दोनों बैंकों का मर्जर कर सकती है।

सूत्रों ने बताया कि महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी और वित्त मंत्री अरुण जेटली के बीच इस मसले पर विस्तार से बात हो चुकी है। बातचीत में वित्त मंत्रालय के बैंकिंग विभाग के आला अफसर भी मौजूद थे।

विलय से चुस्त होगा कामकाज

जानकारों का कहना है कि भारतीय महिला बैंक और राष्ट्रीय महिला कोष के विलय से उन औरतों को लोन उपलब्ध करवाने का काम बेहतर हो सकेगा जो अपना कोई रोजगार चालू करने के इरादा रखती हैं। भारतीय महिला बैंक की स्थापना यूपीए सरकार के दौर में हुई थी। जबकि राष्ट्रीय महिला कोष की स्थापना करीब 20 बरस पहले हुई थी। इनके कामकाज से सरकार नाखुश बताई जाती है।

नए बैंक को पेशेवर बनाया जाएगा

वित्त मंत्रालय के एक आला अफसर ने बताया कि नए बैंक के नाम पर भी फैसला होना है। पर कोशिश रहेगी कि पहले से चल रहे बैंक के विलय के बाद इसे पेशेवर तरीके से चलाया जाए। अभी इनका कामकाज बेहद लचर तरीके से चल रहा है। केन्द्र में एनडीए सरकार के आने के बाद से मेनका गांधी और अरुण जेटली ने इन बैंकों के कामकाज में सुधार से लेकर विलय जैसे तमाम पहलुओं पर गौर किया। समझा जाता है कि अब अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्तर पर होगा।

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