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आलू बेचने वाले की दो बेटियां एक साथ बनीं दारोगा, गर्व से ऊंचा हो गया पिता का माथा, बांट रहे लड्डू

पटना, 15 जुलाई। कोशिश करने वालों की हार नहीं होती... ये कहावत बिहार के नवादा की रहने वाली दो बहनों के ऊपर बिलकुल फिट बैठती है। बिहार की दारोगा परीक्षा में इन दो बहनों ने सफलता हासिल कर न सिर्फ अपने क्षेत्र का नाम रोशन किया बल्कि अपने पिता का भी माथा ऊंचा कर दिया है। दोनों बहनों की पढ़ाई और उनके परिवार की हालत जानकर आप भी इनकी मेहनत के प्रशंसक हुए बिना नहीं रह पाएंगे।

बेटियों ने किया पिता का सिर फख्र से ऊंचा

बेटियों ने किया पिता का सिर फख्र से ऊंचा

नवादा जिले के पकरीबरावां बाजार के मदन साव के घर पर खुशी का माहौल है। मदन की दो बेटियों प्रिया और पूजा ने बिहार दारोगा परीक्षा में सफलता अर्जित कर न सिर्फ गांव बल्कि पूरे इलाके का नाम रोशन कर दिया है। उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। दोनों बहनों की सफलता पर आज किसी को सबसे ज्यादा गर्व है तो वो उनके पिता मदन साव को है।

कोई भी लक्ष्य बड़ा नहीं होता

कोई भी लक्ष्य बड़ा नहीं होता

कहावत है कौन कहता है आसमां में सुराख हो नहीं सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों.. यानि अगर आपके मन में कर गुजरने का जज्बा हो तो कोई भी लक्ष्य बड़ा नहीं होता और उसे हासिल किया जा सकता है। इन दो बहनों ने अपनी मेहनत के बल पर ये कर दिखाया है। सीमित संसाधन के बल पर ही बिहार दारोगा की परीक्षा में एक साथ सफलता अर्जित करने के बाद अब पिता भी गर्व से फूले नहीं समा रहे।

शुरू से ही पढ़ने में रहीं हैं तेज

शुरू से ही पढ़ने में रहीं हैं तेज

प्रिया और पूजा दोनों बहनें शुरू से ही पढ़ने में तेज रही हैं। 2013 में हाईस्कूल पास करने वाली प्रिया को 77 फीसदी अंक मिले थे जबकि पूजा ने 2014 में हाईस्कूल की परीक्षा 66 प्रतिशत अंकों के साथ पास की थी। हाईस्कूल के बाद दोनों बहनों ने पकरीबरावां से ही इंटर और स्नातक की पढ़ाई भी पूरी की। दोनों बहनों ने साथ में ही दारोगा की परीक्षा की तैयारी शुरू की थी और संयोग देखिए कि दोनों का एक साथ ही परीक्षा में चयन भी हो गया।

आलू बेचकर पिता ने बेटियों को पढ़ाया

आलू बेचकर पिता ने बेटियों को पढ़ाया

पकरीबरावां में ही फुटपाथ पर आलू की दुकान लगाकर मदन साव परिवार चलाते हैं। इसी दुकान की बदौलत उन्होंने दोनों बेटियों को पढ़ाया। सीमित संसाधनों के चलते ही वह अपनी बेटियों को बाहर तो नहीं भेज सके लेकिन कभी उनकी पढ़ाई बाधित नहीं होने दी और हमेशा उन्हें पढ़ने के लिए कहते रहे। दोनों बहनें भी अपने पिता की स्थिति को समझती थीं। भले ही स्थानीय विद्यालय में पढ़ाई की लेकिन पढ़ाई को हमेशा गंभीरता से लिया।

ननिहाल पक्ष से भी मिला सपोर्ट

ननिहाल पक्ष से भी मिला सपोर्ट

मदन साव का कहना है कि उन्होंने कभी बेटियों की पढ़ाई को रुकने नहीं दिया। चाहे इसके लिए उन्हें कर्ज ही क्यों न लेना पड़ा। वहीं पूजा और प्रिया को ननिहाल पक्ष से भी सपोर्ट मिला। परीक्षा की तैयारी के लिए वह नवादा में नाना-नानी के घर पर चली गई थीं। दोनों बहनों ने इस सफलता का श्रेय भी माता-पिता के साथ नाना-नानी को भी दिया है।

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