क्या मणिपुर के 2 सांसदों को संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर बोलने से रोका गया?

मणिपुर के मुद्दे पर मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के बाद कांग्रेस ने बीजेपी पर बहुत ही गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का दावा है कि मणिपुर के दो सांसदों को अविश्वास प्रस्ताव के दौरान अपने राज्य के लिए बोलने तक से रोक दिया गया।

लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने आरोप लगाया है कि मणिपुर से लोकसभा के दो सांसदों केंद्रीय मंत्री आरके रंजन सिंह और नागा पीपुल्स फ्रंट के लोरहो एस पफोजे को बीजेपी नेतृत्व ने सदन में बोलने से रोक दिया था।

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मणिपुर के दो सांसदों को बीजेपी ने बोलने नहीं दिया- कांग्रेस
गौरतलब है कि मणिपुर के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संसद में बोलने के लिए बाध्य करने के वाले अविश्वास प्रस्ताव को विपक्षी इंडिया गठबंधन की ओर से गौरव गोगोई ने ही सदन पटल पर रखा था। गोगोई ने रविवार को गुवाहाटी में कहा, 'यह बड़े ही दुख की बात है कि असम से सांसद होने के बावजूद मुझे संसद में मणिपुर का मुद्दा उठाने का मौका मिला। लेकिन, मणिपुर के दो लोकसभा सांसदों को अपने ही राज्य के बारे में बोलने से भाजपा नेतृत्व की ओर से बाधाएं डाली गईं।'

गौरव गोगोई ने ही विपक्ष की ओर से पेश क्या था अविश्वास प्रस्ताव
गौरतलब है कि पीएम मोदी जब अविश्वास प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब दे रहे थे, तब उनसे मणिपुर के मुद्दे पर उनका जवाब सुनने से पहले ही कांग्रेस और अन्य विपक्षी सांसदों ने सदन की कार्यवाही का बायकॉट कर दिया। इससे पहले पीएम मोदी ने कांग्रेस की पिछली सरकारों के कार्यकाल में उत्तर-पूर्वी राज्यों में उठाए गए कदमों को लेकर पार्टी पर जमकर निशाना साधा था।

यौन हिंसा समेत 17 मामलों की जांच करेगी सीबीआई
इस बीच अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक मणिपुर हिंसा से जुड़े 17 मामलों की जांच सीबीआई करेगी। इनमें महिलाओं के खिलाफ हिंसा या यौन उत्पीड़न के मामलों को प्राथमिकता के आधार पर तहकीकात की जाएगी। सीबीआई ने अभी तक दो यौन हिंसा से जुड़े मामलों के अलावा कुल 8 केस दर्ज किए हैं। इसके अलावा संभावना है कि एजेंसी राज्य के चुराचंद्रपुर जिले में सामने आई एक और यौन हिंसा के मामले की भी जांच अपने हाथों में लेगी।

महिला विरोधी हिंसा की जांच की अहमियत को देखते हुए सीबीआई ने अपनी महिला अधिकारियों की टीम को भी मणिपुर में तैनात किया है। क्योंकि, ऐसे मामलों में बयान दर्ज करने और पूछताछ के लिए महिला अधिकारियों की मौजूदगी अनिवार्य होती है।

सीबीआई को बहुत ही चुनौतीपूर्ण माहौल में मिला है जांच का जिम्मा
वैसे मणिपुर हिंसा की जांच सीबीआई के लिए चुनौती भरी रहने वाली है। क्योंकि, पिछले साढ़े तीन महीनों के हिंसक संघर्ष की वजह से राज्य में समाज पूरी तरह से जातीय आधार पर बंटा हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे में जिस समुदाय के लोगों को हिंसा में शामिल होने के लिए पकड़ा जाएगा या पूछताछ होगी तो विरोधी पक्ष वालों की ओर से जांच पर उंगलियां उठने की आशंका बनी रहेगी।

स्वतंत्रता दिवस पर प्रतिबंधित संगठनों किया है बंद का ऐलान
फिलहाल मणिपुर प्रशासन और सुरक्षा बलों के लिए स्वतंत्रता दिवस को शांतिपूर्ण तरीके से मनाने की भी चुनौती पैदा हुई है। क्योंकि, इंफाल घाटी के कुछ प्रतिबंधित संगठनों (Corcom) की ओर से इस दिन आम हड़ताल का आह्वान किया है। Corcom उपद्रवी ताकतों का एक अंब्रेला ग्रुप है, जिसमें यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (यूएनएलएफ), पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) और पीआरईपीएके जैसे गैरकानूनी संगठन शामिल हैं।

पुलिस के मुताबिक मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए सुरक्षा बलों ने पांच जिलों के संदिग्ध स्थानों पर सर्च ऑपरेशन भी चलाया है और हथियार और गोला बारूद भी बरामद किए हैं।

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