ट्विटर के खिलाफ भारत सरकार सख्त,नहीं माना आदेश तो गिरफ्तार किए जा सकते हैं टॉप अधिकारी!
ट्विटर के खिलाफ भारत सरकार सख्त,नहीं माना आदेश तो गिरफ्तार किए जा सकते हैं टॉप अधिकारी!
Twitter Controversy Update News: माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर के खिलाफ अब भारत सरकार सख्त कार्रवाई कर सकती है। किसान आंदोलन को लेकर ट्विटर से सरकार ने भड़काऊ सामग्री वाले अकाउंट्स को सेंसर करने की मांग की थी। जिसमें ट्विटर की लापरवाही करने पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने साफ कर दिया है कि ऐसे अकाउंट्स के खिलाफ कार्रवाई पर किसी भी तरह की समझौता नहीं किया जाएगा। अगर आधे-अधूरे मन से निर्देशों का पालन किया गया तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने कहा कि इस मामले में हमारा सब्र खत्म होता जा रहा है...क्योंकि आईटी अधिनियम की धारा 69 ए के तहत दिए गए पहले के नोटिस का ट्विटर ने पालन नहीं किया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ट्विटर ने अगर आदेशों का पालन नहीं किया तो उनके टॉप अधिकारियों की गिरफ्तारी भी हो सकती है।
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भारत सरकार ने बुधवार को ट्विटर को कंटेट हटाने के संबंध में फटकार लगाते हुए कहा था कि कंपनी को स्थानीय कानूनों का पालन करना होगा। इसके साथ ही मंत्रालय ने ट्विटर से टकराव के बीच तमाम मंत्रियों से एक स्वदेशी ऐप कू (Koo) पर अकाउंट बनाने की अपील की है।
बुधवार को आईटी सेक्रेटरी और ट्विटर के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच एक वर्चुअल बातचीत हुई थी। जिसके बाद भारत सरकार ने इस चर्चा की पुष्टी की और कहा कि मंत्रालय के सचिव और ट्विटर की वाइस प्रेसिडेंट मोनिके मेशे ने आपस में बात की है। इस बैठक में भारत सरकार ने किसान आंदोलन से जुड़े दुष्प्रचार और भड़काऊ कटेंट को सेंसर ना करने को लेकर कड़ी नाराजगी जताई। सरकार ने ट्विटर को कहा कि कंपनी के अपने भले ही कोई नियम हों, लेकिन उसे देश के कानूनों का पालन करना ही होगा।
वर्चुअल बैठक के दौरान मंत्रालय के सचिव अजय साहनी ने ट्विटर से कहा, भारत सरकार अभिव्यक्ति की आजादी का सम्मान करती है। यह देश के लोकतंत्र का हिस्सा है और हमारे संविधान में प्रावधान भी हैं। लेकिन ये आजादी निरंकुश नहीं है और इसपर जरूरी प्रतिबंध लागू होते हैं। बैठक में सरकार ने बताया कि प्रतिबंधों की यह बात संविधान से आर्टिकल 19 (2) में लिखी हुई हैं, जिसमें सजा के भी प्रावधान हैं।
ट्विटर ने फिलहाल 500 से अधिक एकाउंट बैन किए है। लेकिन ट्विटर ने और कई पाबंदी नहीं लगाई हैं, जो सरकार ने कही थी। ट्विटर ने अभिव्यक्ति की आजादी को अक्षुण्ण रखने की जरूरत का हवाला देते हुए कहा है कि पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं नेताओं के एकाउंट पर रोक नहीं लगा सकते हैं। ट्विटर ने ये भी कहा है कि वो इस मामले को लेकर कोर्ट में जाएंगे।












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