कर्नाटक भाजपा में उथल-पुथल, विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल पर अनुशासनहीनता के आरोप, कारण बताओ नोटिस जारी
Karnataka News: कर्नाटक भाजपा के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के आलोचक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल को पार्टी की केंद्रीय अनुशासन समिति ने अनुशासनहीनता के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह कदम उनके द्वारा राज्य इकाई के अप्रत्याशित समर्थन के बिना एंटी-वक्फ मार्च शुरू करने और पार्टी नेतृत्व पर सार्वजनिक टिप्पणियों के बाद उठाया गया है।
नोटिस का आधार और आरोप
सीडीसी के सदस्य सचिव ओम पाठक द्वारा 1 दिसंबर को जारी नोटिस में कहा गया है कि आपके द्वारा राज्य नेतृत्व के खिलाफ लगातार आरोप, पार्टी के निर्देशों की अवहेलना और सार्वजनिक मंचों पर पार्टी की आधिकारिक स्थिति के खिलाफ बयान देना पार्टी अनुशासन का गंभीर उल्लंघन है।

नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि यतनाल को पहले भी कई बार चेतावनी दी जा चुकी है। लेकिन अनुशासनहीनता जारी रही। नोटिस के मुताबिक यह उल्लंघन भाजपा पार्टी नियमों के अनुच्छेद XXV के अनुशासन भंग अनुभाग (a) और (f) के अंतर्गत आता है।
पार्टी ने यतनाल को नोटिस का जवाब देने के लिए 10 दिनों का समय दिया है। समय पर जवाब न मिलने पर अनुशासन समिति इस मामले पर अंतिम निर्णय ले सकती है।
यतनाल का जवाब और प्रतिक्रिया
यतनाल ने नोटिस को फर्जी करार देते हुए कहा कि वह हिंदुत्व, भ्रष्टाचार विरोधी अभियान, वक्फ से जुड़े मुद्दों और वंशवादी राजनीति के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि मेरा भाजपा में नेतृत्व किसी की कृपा से नहीं। बल्कि अपनी मेहनत से बना है। मैं किसी के सामने झुकूंगा नहीं और माफी मांगने का तो सवाल ही नहीं उठता।
उन्होंने आरोप लगाया कि बीएस येदियुरप्पा और उनके बेटे बीवाई विजयेंद्र कांग्रेस नेताओं मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के सामने समर्पण कर चुके हैं। यतनाल ने कहा कि भ्रष्टाचार और अन्य मामलों में गैर-जमानती केस येदियुरप्पा पर हैं। उन्हें डरने की जरूरत है। मुझे नहीं।
एंटी-वक्फ मार्च और उसके राजनीतिक मायने
यतनाल और अन्य भाजपा नेताओं जैसे रमेश जारकीहोली, अरविंद लिंबावली, महेश कुमटहल्ली और मधु बंगारप्पा ने 25 नवंबर को बिदर से चामराजनगर तक एक महीने लंबा एंटी-वक्फ मार्च शुरू किया। यह मार्च 25 दिसंबर को समाप्त होगा।
इस मार्च को पार्टी के भीतर विजयेंद्र विरोधी गुट का शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है। यतनाल ने कहा कि यह मार्च किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं। बल्कि सनातन धर्म, हिंदुओं, और किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए है। उन्होंने वक्फ बोर्ड द्वारा भूमि अधिग्रहण और बेदखली नोटिस के मुद्दों पर सरकार को घेरा।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
पूर्व कांग्रेस सांसद डीके सुरेश द्वारा यतनाल के शिवकुमार के करीब होने के बयान का खंडन करते हुए यतनाल ने कहा कि यदि सुरेश के पास कोई सबूत है तो उसे सार्वजनिक करें। शिवकुमार के खिलाफ मैंने सीबीआई में शिकायत दर्ज कराई है। जबकि विजयेंद्र का डीके शिवकुमार के साथ साठगांठ है।
यतनाल ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें नोटिस का जवाब देने के लिए 10 दिनों की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि मेरा जवाब तैयार है। मैं इसे तुरंत दे सकता हूं।
भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति
यतनाल की टिप्पणी और उनका एंटी-वक्फ मार्च कर्नाटक भाजपा में गुटबाजी और नेतृत्व के खिलाफ असंतोष को उजागर करता है। पार्टी के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अनुशासन समिति उनके मामले पर क्या निर्णय लेती है। क्योंकि इससे कर्नाटक में भाजपा की एकजुटता और नेतृत्व परिदृश्य पर बड़ा असर पड़ सकता है।
यतनाल के बयान और पार्टी नेतृत्व पर लगाए गए आरोप कर्नाटक भाजपा में गहराते मतभेदों को दर्शाते हैं। आने वाले दिनों में उनके जवाब और अनुशासन समिति की कार्रवाई से यह तय होगा कि पार्टी इस विवाद को कैसे संभालती है।












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