तुंगभद्रा नदी का कर्नाटक, आंध्र में तांडव! कैसे टूटा 7 दशक पुराने बांध का गेट? बड़ी आबादी पर तबाही का साया

तुंगभद्रा नदी बने बांध का एक गेट टूटने के बाद दक्षिण भारत के दो राज्यों कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के एक बड़े हिस्से की आबादी पर खतरा बढ़ गया है। इन राज्यों ने सरकारों ने अलर्ट जारी किया है। तुंगभद्रा डैम के 71 साल के इतिहास में ये पहला मौका है, जब डैम का कोई गेट टूटा है। स्थिति पर नजर रख रहे आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने कृष्णा नदी के तटवर्ती निवासियों को नहरों और झरनों को पार करने से बचने की भी सलाह दी है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि डैम के गेट टूटने की क्या वजह रही?

पम्पा सागर डैम यानी तुंगभद्रा डैम का 19वां गेट पिछले हफ्ते शनिवार रात पानी के तेज बहाव में बह गया। यह स्थिति शनिवार रात होसपेट में बनी जब डैम की एक चेन लिंक टूट गई। इसके बाद बाढ़ के पानी की तीव्रता के कारण बांध का गेट नंबर 19 टूट गया। ऐसे में कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में राजनीतिक दलों के बीच आरोप और प्रत्यारोप का दौर सा चल पड़ा है। आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने कृष्णा नदी के किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है।

Tungabhadra river orgy in Karnataka

दक्षिण भारत की नदी तुंगभद्रा पर सात दशक पहले डैम का प्रोजेक्ट पूरा हुआ था। 70 साल से अधिक पुरानी इस परियोजना की कल्पना मद्रास प्रेसीडेंसी के एक ब्रिटिश इंजीनियर सर आर्थर कॉटन ने 1860 में क्षेत्र में सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराने और बिजली पैदा करने, बाढ़ को नियंत्रित करने के लिए की थी। प्रोजेक्ट को लेकर हैदराबाद साम्राज्य और मद्रास प्रेसीडेंसी के बीच एक संयुक्त उद्यम के रूप में समझौता हुआ और 1949 में निर्माण शुरू हुआ। यह परियोजना 1953 में पूरी हुई थी।

तुंगभद्रा डैम प्रोजेक्ट को पम्पा सागर के नाम से भी जाना जाता है। यह बांध होसपेट और कोप्पल शहरों के पास तुंगभद्रा नदी पर स्थित है। केरल में तुंगभद्रा जलाशय और मुल्लापेरियार बांध को देश में केवल दो जलाशय होने का अनूठा गौरव प्राप्त है जो मिट्टी और चूना पत्थर के संयोजन का उपयोग करके बनाए गए थे।

क्यों टूटा डैम का गेट
लगातार बारिश के चलते डैम में क्षमता से अधिक पानी आने के दबाव के बीच गेट पर प्रेशर बढ़ गया था। डैम की मरम्मत के लिए जलाशय को लगभग 60 प्रतिशत खाली करना था। लेकिन लगातार बारिश के चलते ऐसा करने में देरी हुई। अब टूटे गेट की मरम्मत के लिए अन्य गेटों से डिस्चार्ज बढ़ाना होगा, जिससे तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ने की संभावना है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, डैम के टूटे हुए गेट को बदलने के लिए बांध में मौजूद 100tmcft पानी में से कम से कम 60tmcft पानी छोड़ा जाना है। इस प्रक्रिया में करीब चार दिन या उससे अधिक समय लग सकता है।

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