monkeypox: मंकीपॉक्स की जांच के लिए भारतीय कंपनी ने बनाई RT PCR किट, एक घंटे में आएगा रिजल्ट
कोरोना संक्रमण के बाद अब दुनियाभर में मंकी पॉक्स का खतरा बढ़ता जा रहा है। बढ़ते मामले को देखते हुए सरकार भी सतर्क हो गई है। इस बीच चेन्नई स्थित मेडिकल उपकरण कंपनी ट्रिविट्रॉन हेल्थकेयर को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है।
नई दिल्ली, 28 मई: कोरोना संक्रमण के बाद अब दुनियाभर में मंकी पॉक्स का खतरा बढ़ता जा रहा है। बढ़ते मामले को देखते हुए सरकार भी सतर्क हो गई है। इस बीच चेन्नई स्थित मेडिकल उपकरण कंपनी ट्रिविट्रॉन हेल्थकेयर को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। उन्होंने दावा किया है कि उसने मंकीपॉक्स वायरस का पता लगाने के लिए आरटी-पीसीआर-आधारित किट बना लिया है। इससे संक्रमित रोगियों की जांच करने में आसानी होगी। इससे पता चल सकेगा कि कौन संक्रमित हैं और कौन नहीं।
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कंपनी ने कहा है कि चार रंगों की फ्लोरोसेंस-आधारित किट एक-ट्यूब सिंगल रिएक्शन फॉर्मेट में चेचक और मंकीपॉक्स के बीच अंतर कर सकती है। साथ ही कहा कि वायरस (यदि मौजूद है) का पता लगाने में परीक्षण में लगभग एक घंटे का समय लगता है। शुक्रवार को जारी एक बयान में ट्रिविट्रॉन हेल्थकेयर ने कहा कि वीटीएम (वायरल ट्रांसपोर्ट मीडिया) में रखे ड्राई स्वैब और स्वैब दोनों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
सही उपाय करने की जरूरत
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने शुक्रवार को कहा कि यूरोप, मध्य पूर्व और उत्तरी अमेरिका सहित 20 देशों से मंकीपॉक्स के 200 से अधिक कंफर्म या संदिग्ध मामले सामने आए हैं। प्रेस ब्रीफिंग में डब्ल्यूएचओ ने यह भी कहा कि उसे वायरस के सामुदायिक प्रसार की आशंका है। वैश्विक संक्रामक खतरों की तैयारियों के लिए डब्ल्यूएचओ के निदेशक सिल्वी ब्रायंड ने कहा कि अगर सही उपाय किए जाएं तो यह बीमारी इस समय 'समायोजित' है।
भारत में मंकी पॉक्स के एक भी मामले नहीं आए सामने
डब्ल्यूएचओ के अधिकारियों ने कहा कि इस समय मंकीपॉक्स वायरस के खिलाफ बड़े पैमाने पर टीकाकरण की आवश्यकता नहीं है, लेकिन टीकाकरण उन लोगों के लिए उपलब्ध है, जिनका संक्रमित लोगों के साथ निकट संपर्क रहा है। इस बीच भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने कहा कि भारत में अभी तक मंकीपॉक्स का कोई मामला सामने नहीं आया है। हालांकि, सरकार संभावना के लिए तैयार है, खासकर जब से मामले विश्व स्तर पर बढ़ रहे हैं।
चूहे और खरगोश जैसे जानवरों से फैलता है
वहीं, केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को विदेश से आने वाले यात्रियों की विशेष निगरानी के निर्देश दिए हैं। केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को मंकी पॉक्स के हालातों पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। मंकी पॉक्स वायरस मुख्य रूप से चूहे और खरगोश जैसे जानवरों से फैलता है, जानवरों से होकर इंसानों में यह वायरस तेज गति से फैलता है। यह बीमारी संक्रमित मरीज के छुआछूत और उसके उपयोग किए बिस्तरों और कपड़ों के उपयोग से फैलता है। यदि मंकी पॉक्स संक्रमित जानवर किसी व्यक्ति को काटता है, तब भी उसके संक्रमित होने की संभावना बढ़ जाती है।
मंकी पॉक्स बीमारी के लक्षण
यदि कोई व्यक्ति मंकी पॉक्स बीमारी से संक्रमित हो जाता है, तो उसे लक्षण 5 से 10 दिनों में दिखने शुरू हो जाते हैं, जिसमें उसे बुखार, बदन दर्द और उल्टी-दस्त जैसे लक्षण दिखने लगते हैं। इसके साथ ही संक्रमित व्यक्ति के शरीर पर छोटे-छोटे दाने भी उठने लगते हैं, जो फोड़े-फुंसी की तरह दिखाई पड़ते हैं। साथ ही ज्यादा ने कुछ दिनों बाद पपड़ी बनकर समाप्त हो जाते हैं।
मंकी पॉक्स बीमारी से बचने के उपाय
सावधानी और सुरक्षा रखकर मंकी पॉक्स बीमारी से बचा जा सकता है। जहां मंकी पॉक्स के लक्षण दिखने पर तुरंत जांच के लिए सैंपल चिकित्सक के पास दें, साथ ही चिकित्सक से उचित परामर्श लेते हुए इलाज शुरू करें। फिलहाल, मंकी पॉक्स का टीका और दवा बनाने का काम जोरों पर चल रहा है, लेकिन तब तक सावधानी और सुरक्षा ही इस बीमारी से बचने का मुख्य शस्त्र है।












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