स्वदेशी INS विक्रांत के चौथे चरण का ट्रायल पूरा, 15 अगस्त को नौसेना में हो सकता है शामिल
नई दिल्ली: मेड इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत भारत की सेनाएं अब देश में ही बने हाईटेक उपकरणों, लड़ाकू विमानों और युद्धपोतों को प्राथमिकता दे रही हैं। इस बीच रविवार को स्वदेशी विमान वाहक पोत (IAC) विक्रांत ने अपने चौथे चरण का ट्रायल पूरा कर लिया। इस दौरान उसके सभी उपकरण सही तरीके से काम कर रहे थे। अगर सब कुछ सही रहा तो ये युद्धपोत 15 अगस्त को भारतीय नौसेना में शामिल हो जाएगा।

हेलीकॉप्टर-लड़ाकू विमान लैंड
भारतीय नौसेना ने विक्रांत की कुछ तस्वीरें जारी की हैं, जिसमें युद्धपोत समुद्र में गरजता दिखाई दे रहा है। ट्रायल के दौरान इस पर हेलीकॉप्टर और लड़ाकू विमानों की लैंडिंग भी करवाई गई। अपने आधिकारिक बयान में भारतीय नौसेना ने कहा कि स्वदेशी विमान वाहक के लिए समुद्री परीक्षणों का चौथा चरण रविवार को सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इस दौरान विमान के अधिकांश उपकरणों और प्रणालियों का परीक्षण किया गया।

चीन के पास हैं दो विमान वाहक पोत
आपको बता दें कि अभी तक भारत के पास सिर्फ एक विमान वाहक पोत है, जिसका नाम आईएनएस विक्रमादित्य है। इसे रूस से 2.33 अरब डॉलर में खरीदा गया था। वहीं दूसरी ओर भारत के सबसे बड़े दुश्मन चीन के पास दो विमान वाहक पोत हैं। इसी वजह से वो लगातार हिंद महासागर में अपना रौब जमाने की कोशिश करता है। विक्रांत के नौसेना में शामिल होते ही, दोनों देश विमान वाहक युद्धपोत के मामले में बराबर आ जाएंगे।

ये है खासियत?
आईएनएस विक्रांत 262 मीटर लंबा, 62 चौड़ा और ऊपरी ढांचे समेत कुल 59 मीटर ऊंचा है। इसमें कुल 14 डेक हैं, जिनमें से 5 ऊपरी ढांचे में हैं। इस जहाज में 2,300 से ज्यादा कंपार्टमेंट हैं, जिसमें 1,700 से ज्यादा लोग रह सकते हैं। इनमें महिला अफसरों के लिए खासतौर पर बनाए गए स्पेशलाइज्ड केबिन भी शामिल हैं। इंडियन नेवी के लिए बनाए गए इस जहाज की मशीनरी को ऑटोमेशन में संचालन, नेविगेशन और अपनी सुरक्षा के हितों को देखते हुए डिजाइन किया गया है।












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