तो इसलिए मोदी कभी नहीं करते हैं जयललिता की निंदा

बताया जा रहा है कि दो वाम पार्टियों के साथ जयललिता ने सीटों पर समझौता करने से मना कर दिया है। 2009 में इन दोनों ही पार्टियों ने 6 सीटों पर चुनाव लड़ा था। एआईएडीएमके ने उन्हें एक से अधिक सीट देने से मना कर दिया है। उम्मीद की जा रही है कि तमिलनाडु में जयललिता की पार्टी 15 से 23 सीटें जीतने में कामयाब रहेगी, वहीं डीएमके 7 से 13 सीटें जीत सकती है। कांग्रेस को 1 से 5 और अन्य को लगभग चार सीटें मिलती हुई दिखाई दे रही हैं।
गौर हो कि अभी कुछ समय पहले ही डीएमके प्रमुख करूनानिधि ने नरेंद्र मोदी की तारीफ की थी और उन्हें अपना अच्छा दोस्त बताया था। जयललिता भी मोदी की करीबी हैं। अत: राजनीतिक विश्लेषक जयललिता की पार्टी के चुनाव बाद एनडीए में शामिल होने की उम्मीद जता रहे हैं।
लोकसभा चुनाव के करीब आते ही नये नये राजनीतिक समीकरण जन्म ले रहे हैं। अभी दिल्ली में 12 पार्टियों ने गठबंधन कर 'तीसरे मोर्चे' की औपचारिक घोषणा की है। जिसके बारे में जदयू नेता शरद यादव का कहना था कि यह थर्ड फ्रंट नहीं बल्कि 'फर्स्ट फ्रंट' है। उन्होने उम्मीद जताई थी कि मोर्चे में पार्टियों की संख्या और बढ़ सकती है। जयललिता के तीसरे मोर्चे से इनकार करने के बाद चुनाव बाद तीसरे मोर्चे के दल भाजपा और कांग्रेस के साथ जा सकते हैं। तमिलनाडु में 39 लोकसभा सीटे हैं।












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