पढ़िए राज्य सभा में जीएसटी बिल पर बहस की 10 मुख्य बातें

राज्यसभा में जीएसटी बिल पर काफी देर तक चर्चा हुई। इस चर्चा में राज्यसभा के सदस्यों ने कई मुद्दों पर अपनी राय रखी। कुछ जीएसटी के पक्ष में खड़े दिखे, तो कुछ को जीएसटी पसंद नहीं आया। आपको बता दें कि पिछले 16 सालों से जीएसटी पर बात शुरू हुई है, लेकिन अभी तक इसे लागू नहीं किया जा सका है। आइए जानते हैं राज्यसभा में पेश हुए इस बिल पर हुई बहस की 10 खास बातें।

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1- जीएसटी बिल पर बहस को शुरू करते हुए सबसे पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि कि जीएसटी की मंजूरी के लिए दो तिहाई वोटिंग का अधिकार राज्यों के पास हैं, जबकि एक तिहाई वोटिंग का अधिकार केन्द्र के पास है। जेटली बोले कि जीएसटी के जरिए देश का बाजार एकीकृत हो जाएगा। वे बोले कि इस बिल के आ जाने के बाद टैक्स चोरी पर भी नजर रखना आसान हो जाएगा।

2- पी चिदंबरम ने राज्यसभा में जीएसटी पर हो रही बहस पर साफ-साफ कहा कि कांग्रेस कभी भी जीएसटी बिल के आइडिया का विरोध नहीं कर रही थी। कांग्रेस सिर्फ जीएसटी बिल का विरोध कर रही थी, ताकि उसे और अधिक बेहतर बनाया जा सके, क्योंकि पहले वाले बिल में काफी खामियां थीं। वे बोले कि जीएसटी का रेट 18 प्रतिशत होना चाहिए जो कि जनता को भी स्वीकार होगा।

3- डीरेक ओब्रायन ने चिदंबरम पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सिर्फ जीएसटी के आइडिया का समर्थन करना काफी नहीं है, जीएसटी को लागू करने पर भी विचार करना चाहिए। ओब्रायन ने उन देशों के नाम भी गिनाए जहां पर सरकारों ने सत्ता में आने के बाद जीएसटी लागू तो किया, लेकिन उसकी वजह से हार का मुंह देखना पड़ा।

4- पश्चिम बंगाल से तृणमूल कांग्रेस के नेता डीरेक ओब्रायन ने इस जीएसटी बिल को गिरगिट समझौता टैक्स कह डाला। वे बोले कि यह एक ट्रेजरी और अपोजिशन टैक्स के बीच में एक पिंग-पॉन्ग मैच जैसा हो गया है।

5- उत्तर प्रदेश से समाजवादी पार्टी के नेता नरेश अग्रवाल ने कहा कि हम न चाहते हुए भी इस बिल का समर्थन कर रहे हैं, ताकि ये न लगे कि इस बिल के लागू होने में सिर्फ समाजवादी पार्टी रोड़ा बन रही है। उन्होंने यह भी मुद्दा उठाया कि यह अभी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि क्या जीएसटी खाद्य पदार्थों पर भी लगेगा?

6- राज्यों की आमदनी पर सवाल उठाते हुए नरेश अग्रवाल बोले कि राज्य और केन्द्र का कुल टैक्स मिलाकर 32-34 प्रतिशत पड़ रहा है, लेकिन अब टैक्स 14-15 प्रतिशत रखने की उम्मीद की जा रही है, ऐसे में आमदनी कैसे बढ़ेगी? राज्यों को यह भी भय है कि आखिर राज्यों की आमदनी का क्या होगा?

7- सीपीएम के नेता सीताराम येच्युरी ने कहा कि क्या सरकार राज्यों के हाथ में कटोरा थमाकर उन्हें केन्द्र से पैसों की भीख मांगने के लिए कह रही है? वे बोले कि अगर जीएसटी की दर 24 फीसदी रखी गई तो फिर ये देश के अधिकतर लोगों के विकलांग जैसा बना देगा।

8- जदयू नेता शरद यादव ने जीएसटी बिल का समर्थन करते हुए कहा कि इस बिल के आ जाने के बाद देश में व्याप्त भ्रष्टाचार में कमी आएगी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इस बिल को पास करते समय राज्यों की आमदनी को भी ध्यान में रखना चाहिए।

9- महाराष्ट्र से एनसीपी के सांसद प्रफुल पटेल ने जीएसटी पर अपनी राय रखते हुए बीएमसी का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि बीएमसी की जितनी आमदनी सिर्फ चुंगी से होती है, भारत के कई छोटे राज्यों का बजट भी उससे कम है।

10- जीएसटी बिल को फाइनेंस बिल की तरह पेश करने पर अधिकतर लोगों ने दिया जोर। अधिकतर लोगों ने कहा कि जीएसटी बिल को मनी बिल की तरह पेश नहीं किया जाना चाहिए।

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