दुनिया के इन 50 राज्यों में जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक खतरा, भारत के 9 राज्य इसमें शामिल
दुनियाभर में जलवायु परिवर्तन का खतरा मंडरा रहा है। भारत के 9 राज्यों पर आने वाले सालों में जलवायु परिवर्तन का खतरा सबसे अधिक है। जलवायु परिवर्तन के मुख्य कारणों की बात करें तो मानव निर्मित आपदा सबसे बड़ी है।

जिस तरह से दुनियाभर में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है उसका सीधा असर जलवायु पर पड़ रहा है। दुनियाभर के देशों में जलवायु परिवर्तन एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है। क्रॉस डिपेंडेंसी इनिशिएटिव की ओर से सोमवार को जो रिपोर्ट जारी की है उसके उसके अनुसार 2050 तक जलवायु परिवर्तन का जोखिम 50 से अधिक प्रांतों में काफी बढ़ जाएगा। जिन 50 प्रांतों की रैंकिंग जारी की गई है वहां 2050 तक जलवायु परिवर्तन का जोखिम काफी बढ़ने वाला है और इन 50 प्रांतों की लिस्ट में भारत के 9 राज्य हैं जबकि चीन के 26 और अमेरिका के 5 हैं। इस लिस्ट में कुल 2600 राज्यों और प्रांतों को सम्मिलित किया गया है।
ग्रॉस डॉमेस्टिक क्लाइमेट रिस्क रैंकिंग के अनुसार आने वाले समय में बाढ़, तटीय बाढ़, पारा का भढ़ना, बर्फीली हवा जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं। इस रैंकिंग को तैयार करने में स्थानीय मौसम और पर्यावरण के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है। इसके साथ ही उत्सर्जन के आंकड़ों को भी ग्लोबल वार्मिंग के मापदंडों के आधार पर तुलना की गई है। जलवायु परिवर्तन के मुख्य कारणों की बात करें तो मानव निर्मित आपदा सबसे बड़ी है। क्रॉस डिपेंडेंसी इनिशिएटिव जललवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान का पता लगाने वाली एक संस्था है।
जिस तरह से इंसानों ने अपनी जरूरत के अनुसार पर्यावरण में बदलाव किए हैं उसके असर देखने को मिल रहे हैं। घर, बिल्डिंग, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च, अस्पताल आदि का निर्माण भी जलवायु परिवर्तन के कारणों में शामिल है। एक्सडीआई के ग्रॉस डोमेस्टिक क्लाइमेट रिस्क डेटा सेट ने जलवायु परिवर्तन के कारणों में जंगल में लगने वाली आग, लू, समुद्र की लहरों में बढ़ोत्तरी को भी शामिल किया है।
इस लिस्ट में चीन और भारत के सर्वाधिक शहरों के नाम शामिल हैं, लिहाजा यहां पर जलवायु परिवर्तन का असर सबसे ज्यादा देखने को मिल सकता है। विश्लेषण के अनुसार 2050 तक सबसे ज्यादा जोखिम वाले शहर में चीन के बाद भारत का नंबर आता है। भारत में में बिहार 22वें नंबर है, जबकि उत्तर प्रदेश 25वें, असम 28वे, राजस्थान 32वे, तमिलनाडु 36वे, महाराष्ट्र 38वे, 48वे पर गुजरात, 50वे पर पंजाब, 52वे पर केरल का स्थान आता है। वहीं 60वे पर पश्चिम बंगाल, 62वे पर हरियाणा, 65वे पर कर्नाटक, 85 पर आंध्र प्रदेश, 104 पर जम्मू कश्मीर, 155 पर हिमाचल प्रदेश, 213 पर दिल्ली और 257 पर उत्तराखंड है। वहीं असम की बात करें तो 1990 की तुलना में 2050 के बीच सर्वाधिक परिवर्तन देखने को मिला है। यहां 330 फीसदी की बढ़ोत्तरी जलवायु परिवर्तन से बढ़ने वाले जोखिम में देखने को मिली है।












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