Tomato Price: जब टमाटर खाने लगा 'भाव', केंद्र सरकार ने चलाया ऐसा चक्कर अब यहां ₹60 Kg बिक रहा
Tomato Mobile Van News: मॉनसून सीजन में टमाटर की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है। सब्जी मंडी में मारा-मारा फिरने वाला टमाटर इन दिनों खुद को राजा महसूस करने लगा है। और हो भी क्यों न जब कीमत 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हो। आखिरकार, टमाटर की कीमतों में साल 2023 की तरह तेजी आने से रोकने के लिए केंद्र सरकार की एजेंसी भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ लिमिटेड (एनसीसीएफ) को हस्तक्षेप करना पड़ा। अब एजेंसी एनसीसीएफ थोक मंडियों से टमाटर खरीदकर उन्हें उचित खुदरा कीमतों पर बेच रही है।
इस हस्तक्षेप का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खुदरा स्तर पर लाभ मार्जिन उचित बना रहे, बिचौलियों को अप्रत्याशित लाभ से बचाया जा सके और इस तरह उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा हो सके। दिल्ली-एनसीआर के बाद अब महाराष्ट्र में टमाटर मोबाइल वैन के माध्यम से रियायती कीमतों पर यानी 60 रुपए प्रति किलो बेचा जा रहा है। आइए जानते हैं कहां-कहां टमाटर 60 रुपए प्रति किलो....

महाराष्ट्र में यहां 60 रुपये किलो बिक रहा टमाटर
- एनसीसीएफ कार्यालय, सायन सर्कल, वर्ली नाका और अशोकवन, बोरीवली पूर्व।
दिल्ली-NCR में यहां 60 रुपये किलो बिक रहा टमाटर
राजीव चौक मेट्रो, पटेल चौक मेट्रो, नेहरू प्लेस, कृषि भवन, सीजीओ कॉम्प्लेक्स, लोधी कॉलोनी, हौज खास हेड ऑफिस, संसद मार्ग, आईएनए मार्केट, मंडी हाउस, कैलाश कॉलोनी, आईटीओ, साउथ एक्सटेंशन, मोती नगर, द्वारका, नोएडा (सेक्टर 14 और 76), रोहिणी और गुरुग्राम में टमाटर बेचे जा रहे हैं।
केंद्रीय एजेंसी NCCF क्यों ले रही है दिलचस्पी?
केंद्र सरकार की एजेंसी भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ लिमिटेड (एनसीसीएफ) की मुंबई-नासिक शाखा ने बुधवार को बताया कि इस हस्तक्षेप के ज़रिए, टमाटर की कीमतों में वृद्धि को कम करने और बाजार में मूल्य स्थिरता बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है। इससे उपभोक्ताओं को लाभ होगा और निष्पक्ष व्यापार प्रथाओं को बढ़ावा मिलेगा। यह हस्तक्षेप उपभोक्ता हितों की रक्षा करने और एक स्थिर बाजार पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए एनसीसीएफ की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
एनसीसीएफ ने कहा कि आने वाले दिनों में, उपभोक्ता सुविधा के लिए खुदरा स्थानों की संख्या में वृद्धि हो सकती है। रिपोर्टों के अनुसार, खुदरा बाजारों में टमाटर 100 रुपये प्रति किलोग्राम को पार कर गया था, लेकिन हाल ही में इसमें नरमी आई है।
महीने-दर-महीने खाद्य पदार्थों की कीमतों में इजाफा
खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें भारतीय उपभोक्ताओं के लिए सिरदर्द बनी हुई हैं, जून में खाद्य खंड में मुद्रास्फीति दर साल-दर-साल लगभग दोगुनी हो गई है। आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले महीने खाद्य मुद्रास्फीति लगभग दोगुनी होकर 8.36 प्रतिशत हो गई, जबकि 2023 के इसी महीने में 4.63 प्रतिशत दर्ज की गई थी।
खाद्य पदार्थों के सभी खंडों - मांस और मछली, अंडा, दूध और उत्पाद, तेल और वसा, फल, विशेष रूप से सब्जियां, दालें और उत्पाद, चीनी, मसाले, तैयार स्नैक्स और मिठाइयां - के लिए खुदरा मुद्रास्फीति महीने-दर-महीने बढ़ी। जून में भारत की समग्र खुदरा मुद्रास्फीति दर में वृद्धि हुई, जो पिछले कुछ महीनों में खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों के कारण देखी गई नरमी से अलग थी।
जुलाई में ही क्यों भाव खाता है टमाटर?
- मौसम की मार: जुलाई का महीना मॉनसून सीजन के लिए जाना जाता है। इस दौरान, भारी बारिश और बाढ़ की संभावना होती है। इस समय खेती पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। भारी बारिश से टमाटर की फसल खराब हो सकती है, जिससे उत्पादन में कमी आती है और कीमतें बढ़ जाती हैं।
- उत्पादन में कमी: इस महीने में टमाटर की खेती कम हो जाती है। गर्मियों के अंत में और बारिश के मौसम में नई फसल की बुआई नहीं होती, जिससे बाजार में टमाटर की आपूर्ति कम हो जाती है। आपूर्ति कम होने से मांग और आपूर्ति के सिद्धांत के अनुसार कीमतें बढ़ जाती हैं।
- परिवहन समस्याएं: मॉनसून के दौरान सड़कों की स्थिति खराब हो जाती है और परिवहन में दिक्कतें आती हैं। परिवहन में विलंब होने से टमाटर जल्दी खराब हो जाते हैं, जिससे नुकसान होता है और कीमतें बढ़ती हैं।
- स्टॉक की कमी: गर्मियों में टमाटर की अधिक खपत होती है और जुलाई-अगस्त में इसका स्टॉक कम हो जाता है। जब स्टॉक कम होता है तो मांग बढ़ जाती है और कीमतें स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती हैं।
- अन्य फसलों की प्राथमिकता: मॉनसून के समय किसान अन्य महत्वपूर्ण फसलों की खेती में व्यस्त हो जाते हैं, जिससे टमाटर की खेती पर ध्यान कम हो जाता है। इससे टमाटर का उत्पादन कम होता है और कीमतें बढ़ती हैं।












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