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Lovlina Borgohain: गोलाघाट की बेटी 'लवलीना 'ने रचा इतिहास, 2012 से एक भी दिन नहीं ली छुट्टी

नई दिल्ली, 04 अगस्त। बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन की वजह से पूरा भारत आज इतरा रहा है। टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक अपने नाम करने वाली स्टार बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन भले ही 69 किलो वेल्टरवेट कैटेगरी के सेमीफाइनल में तुर्की की वर्ल्ड नंबर-1 मुक्केबाज बुसेनाज सुरमेनेली ने 5-0 से हार गई हों लेकिन असम की इस होनहार बाला ने आज सफलता का नया इतिहास लिख डाला है और करोड़ों लोगों के लिए मिसाल बन गई हैं।

 असम के गोलाघाट की रहने वाली हैं लवलीना

असम के गोलाघाट की रहने वाली हैं लवलीना

2 अक्टूबर 1997 को असम के गोलाघाट में जन्मी लवलीना शुरू से ही काफी जुझारू रही हैं। एक संभ्रात परिवार में जन्म लेने वाली लवलीना के पिता टोकन बोरगोहेन एक बिजनेसमैन हैं लेकिन खेल को चुनने और उसमें आगे बढ़ने के लिए लवलीना को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा क्योंकि जिस जगह की वो हैं, वहां लड़कियों का खेल में यूं आगे बढ़ना आसान नहीं था।लेकिन उनके परिवार ने लवलीना के जोश और जज्बे को सलाम करते हुए उन्हें आगे बढ़ने का मौका दिया और आज परिणाम सबके सामने है।

साल 2012 से एक भी दिन की छुट्टी नहीं ली

साल 2012 से एक भी दिन की छुट्टी नहीं ली

मैरीकॉम को अपना आदर्श मानने वाली लवलीना ने ओलंपिक के लिए काफी मेहनत की थी। आपको जानकर हैरत होगी कि ओलंपिक में मेडल जीतने के लिए लवलीना ने साल 2012 से एक भी दिन की छुट्टी नहीं ली। इस बात का खुलासा खुद लवलीना ने मेडल जीतने के बाद किया। उन्होंने कहा कि वो साल 2012 से लगातार मेहनत कर रही हैं। वो अपनी फैमिली, मित्रों से काफी दूर रही हैं और उन्होंने अपना मनपसंद खाना भी लंबे वक्त से नहीं खाया है।

'मेडल जीतकर आज बहुत अच्छा महसूस कर रही हूं'

'मेडल जीतकर आज बहुत अच्छा महसूस कर रही हूं'

लेकिन अब मेडल जीतने के बाद मैं एक महीने की छुट्टी लेकर जीत का जश्न मनाऊंगी। हालांकि उन्होंने कहा कि वो और अच्छा खेल सकती थी और मेरे मेडल का रंग कुछ और हो सकता था। लेकिन कोई बात नहीं मैं अपने खेल में और सुधार करूंगी और आगे और अच्छा करने का प्रयास करूंगी। उन्होंने कहा कि देश के लिए मेडल जीतकर आज बहुत अच्छा महसूस कर रही हूं।

लवलीना ओलंपिक मेडल जीतने वालीं तीसरी भारतीय

लवलीना ओलंपिक मेडल जीतने वालीं तीसरी भारतीय

मात्र 9 साल की उम्र में बॉक्सिंग शुरू करने वाली लवलीना ओलंपिक मेडल जीतने वालीं तीसरी भारतीय हैं। उनसे पहले विजेंदर सिंह (2008 ) और एम सी मैरीकॉम (2012) ये कारनामा कर चुके हैं।

 'भावनाओं पर काबू रखा और जीतोड़ मेहनत की'

'भावनाओं पर काबू रखा और जीतोड़ मेहनत की'

हालांकि पिछले दिनों लवलीना काफी कष्ट से गुजरी हैं क्योंकि कोविड होने के कारण वो यूरोप प्रैक्टिस के लिए नहीं जा पाईं तो वहीं दूसरी ओर साल 2020 में जब उनकी मां बीमार थीं तो भी वो नेशनल कैंप में थीं, बावजूद इसके लवलीना को अपनी भावनाओं पर काबू रखा और जीतोड़ मेहनत की और आज सफलता का नया इतिहास लिख दिया। गोलाघाट की इस लड़की पर आज पूरे देश को गर्व है।

खास बातें

  • लवलीना बोरगोहेन ने अपना पहला इंटरनेशनल मैच साल 2017 में कजाकिस्तान में खेला था।।
  • जून 2018 में बोरगोहेन ने मंगोलिया में में रजत पदक जीता।
  • सितम्बर 2018 में पोलैंड चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता।
  • टोक्यो ओलंपिक 2020 में कांस्य पदक जीतकर बोरगोहेन असम राज्य की पहली नागरिक हैं जिन्होंने ओलंपिक में पदक जीता है।
  • साल 2020 में लवलीना को अर्जुन अवार्ड से नवाजा गया था , ऐसा करने वाली वह असम की छठी व्यक्ति हैं।

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