पढ़-लिखकर बनें इंजीनियर, लेकिन सैलरी इलेक्ट्रिशन के बराबर
नयी दिल्ली। भारत ऐसा देश है जहां अगर घर में बेटा पैदा होता है तो मां-बाप उसके इंजीनियर बनने का सपना देखने लगते है और अगर बेटी पैदा होती है तो उसके डॉक्टर बनने का सना देखने लगते हैं। ऐसे देश जहां इंजिनियरिंग डिग्री के लिए अभ्यर्थियों में होड़ मची रहती है, वहां उनकी हालत देखकर आप हैरान हो जाएंगे।

जी हां लाखों खर्च कर, कड़ी मेहनत कर लोग इंजीनियर बनते है, लेकिन पढ़ाई के बाद जब नौकरी मिलती है और सैलरी हाथ आती है तो उसकी सच्चाई सामने आ जाती है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर नौकरी करने वाले व्यक्ति की सैलरी एक इलेक्ट्रिशन के बराबर ही है। जी हैं एक इलेक्ट्रिशन की शुरुआती सैलरी 11,300 रुपए प्रति माह है, जबकि एक डेस्कटॉप इंजिनियर की सैलरी इससे महज 3,500 रुपए ज्यादा।
चैंक गए ना, भले ही उनकी सैलरी में कुछ खास फर्क ना हो, लेकिन जब दोनों की काबिलियत की तुलना की जाए तो आश्चर्य और दिक होता है। इलेक्ट्रिशन एक अकुशल कर्मचारी है और वह महज बारहवीं पास है जबकि डेस्कटॉप इंजिनियर इंजिनियरिंग में ग्रैजुएट है।
हैरत की बात तो यह है कि एक खास अवधि में दोनों की सैलरी में इजाफे का अंतर भी लगभग बराबर हो जाती है। तथ्य पर नजर डाले तो इलेक्ट्रिशन की 5 साल में लगभग 19,000 रुपए और डेस्कटॉप इंजिनियर की 8 साल में 30,000 रुपए। यानी, 8 साल में इलेक्ट्रिशन भी 26,000 हजार रुपए प्रति माह कमा लेगा।
अब कारण पर गौर करें तो सच्चाई सामने आती है। दरअसल एक ओर जहां फिटर्स, वेल्डर्स, इलेक्ट्रिशंस और प्लंबर्स की भारी कमी है तो वहीं आईटी सेक्टर में अपनी किस्मत आजमाने वाले इंजिनियरों की एक बड़ी फौज है। श्रम बाजार के व्यापक आकलन के तहत टीमलीज के ताजे और शुरुआती आंकड़ों में इस तरह के परिणाम सामने आए हैं। व्यावसायिक शिक्षा संस्थानों से निकले हुए ग्रैजुएट कैंडिडेट ऑटो निर्माण जैसी कंपनियों में काम करने पसंद करते हैं या खाड़ी के देशों का रुख कर लेते हैं।












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