जब शरद पवार ने 1993 बम धमाके में जानबूझकर किया था गुमराह, कहा था- राज्य की भलाई के लिए किया
शरद पवार ने कहा था कि मैंने 1993 बम धमाके में जानबूझकर लोगों को गुमराह किया था। 11 विस्फोटों के बजाय मैंने 12 को बताया और उनमें से एक इलाका मस्जिद बंदर था जहां अल्पसंख्यकों का वर्चस्व था।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के अध्यक्ष शरद पवार ने मंगलवार को पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर पूरे सियासी जगत को हैरान करके रख दिया था। शरद पवार ने इस इस्तीफे का ऐलान अपनी आत्मकथा के विमोचन कार्यक्रम में किया जिसके बाद कार्यकर्ताओं में हड़कंप मच गया। कई कार्यकर्ता इस ऐलान के बाद भावुक हो गए जबकि कई समर्थक तो रोने लगे। कई समर्थक हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाने लगे और इस्तीफे को वापस लेने की गुहार लगाने लगे।
शरद पवार की छवि देश में कद्दावर नेताओं में मानी जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कई विवादों से उनका नाता रहा है? इनमें से 1993 बम धमाके में उन्होंने राज्य की भलाई के लिए लोगों को गुमराह करना पड़ा था। हालांकि इस मामले पर पहले तो विवाद हुआ लेकिन बाद में उनकी प्रशंसा की गई।
1993 बम धमाके में जानबूझकर करना पड़ा था लोगों को गुमराह
शरद पवार ने रिकॉर्ड पर स्वीकार किया था कि उन्होंने 1993 के मुंबई धमाकों के बाद लोगों को जानबूझकर गुमराह किया था। उन्होंने उस समय धमाके की संख्या 11 की जगह 12 बताए थे। उन्होंने एक मुस्लिम बहुल इलाके का नाम जोड़कर यह दिखाने की कोशिश कि दोनों समुदायों के लोग प्रभावित हुए थे।
मुंबई को दंगा से बचाने के लिए लिया था फैसला
शरद पवार ने कहा था कि उन्हें मुंबई को आग की लपटों में जाने से रोकने के लिए कोई न कोई रास्ता चुनना था और यह वह चाल थी जिसकी उन्हें उम्मीद थी कि हिंदुओं को इससे दूर रखा जाएगा। दूसरे शब्दों में कहें तो उन्होंने एक अतिरिक्त बम ब्लास्ट की 'खोज' कर ली थी, जो असल में हुआ ही नहीं था। भले ही आपको यह अविश्वसनीय लगे लेकिन यही सच है।
महाराष्ट्र के उस समय के मुख्यमंत्री शरद पवार ने मुंबई में बम हमलों के तुरंत बाद दूरदर्शन स्टूडियो में जाकर घोषणा की थी कि कुल 13 धमाके हुए हैं। पवार ने कहा था कि मस्जिद बंदर इलाके में 13वां विस्फोट हुआ था। चूंकि इस हमले में हिन्दू बहुल क्षेत्रों को निशाना बनाया गया था, ऐसे में पवार ने मस्जिद बंदर इलाके में विस्फोट की कहानी गढ़नी पड़ी। ताकि मुस्लिम बहुल आबादी वाले इस इलाके को भी पीड़ित की तरह पेश किया जा सके। वास्तव में, सभी 12 धमाके हिन्दू बहुल इलाके में किए गए थे।











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