Tirupati Laddu: तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम से कहां हुई चूक? आस्था से खिलवाड़ का असली गुनहगार कौन?

Tirupati Laddu News: आंध्र प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध तिरुमाला तिरुपति मंदिर में भगवान श्री वेंकटेश्वर के प्रसाद के रूप में चढ़ाए जाने वाले लड्डू प्रसादम में जानवरों की चर्बी मिलाने की घटना को लेकर राजनीतिक तूफान खड़ा हुआ है। इसमें आंध्र प्रदेश की मुख्य सत्ताधारी टीडीपी और मुख्य विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी तो आमने-सामने है ही, केंद्र सरकार भी इस विवाद को लेकर सक्रिय हो चुकी है।

तिरुपति का लड्डू प्रसादम हिंदुओं के पवित्र आस्था से जुड़ा हुआ चीज है। जांच रिपोर्ट में उसमें सूअर और बीफ की चर्बी के साथ मछली का तेल पाए जाने की बातें सामने आई हैं और एक तरह से करोड़ों हिंदुओं के धार्मिक आस्था के कत्ल की तरह है।

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मिलावटखोरों को क्यों दी गई खुल्ला छूट?
दूसरी तरफ जिस सरकार के कार्यकाल के दौरान का यह मामला है, उसके मुखिया यानी पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ईसाई समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। इसलिए यह विवाद राजनीतिक तौर पर बहुत ही संवेदनशील हो चुका है।

क्योंकि, प्रसादम के लिए इस्तेमाल जिस घी में मिलावट की रिपोर्ट सामने आई है, वह रेड्डी सरकार के कार्यकाल के ही दौरान का है। आरोप हैं कि रे्डडी के कार्यकाल के दौरान प्रसादम में किसी भी तरह की मिलावट को रोकने पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।

आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव के समय से ही गुणवत्ता पर उठने लगे थे सवाल
तिरुपति लड्डू को लेकर सबसे पहले विवाद इस साल आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनावों के दौरान ही शुरू हो गया था। तब एन चंद्रबाबू नायडू की तेलगू देशम पार्टी (TDP) ने इसकी लगातर बिगड़ती गुणवत्ता को लेकर तत्कालीन वाईएसआर कांग्रेस पार्टी सरकार को घेरने की कोशिश की थी।

तब आरोप लगाए गए थे कि 21 दिनों तक टिकने वाला लड्डू अब सात दिनों में ही खाने लायक नहीं रह रहा है। इसकी स्वाद में भी भारी गिरावट के दावे किए गए थे। लेकिन, तब जरा भी भनक नहीं था कि आने वाले दिनों में यह बहुत बड़ा विवाद बनने वाला है, क्योंकि यह सीधे-सीधे बहुसंख्यकों की आस्था पर चोट करने वाला मामला बनने जा रहा है।

सीएम बनते ही तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम को लेकर सक्रिय हुए नायडू
जून में मुख्यमंत्री बनते ही एन चंद्रबाबू नायडू ने तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) बोर्ड को भंग कर दिया। उन्होंने घी खरीदने की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के लिए एक समिति गठित की। गाय का घी पवित्र माने जाने वाले लड्डू प्रसादम की मुख्य सामग्री है।

NDDB के CALF की जांच में हुई बीफ, सूअर की चर्बी और मछली के तेल की पुष्टि
नायडू सरकार की ओर से गठित समिति ने तत्काल ही घी के सैंपलों की जांच के लिए उन्हें गुजरात के आणंद स्थित नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) के एनालिसिस एंड लर्निंग इन लाइवस्टॉक एंड फूड (CALF) के पास भेजा। राज्य सरकार ने मीडिया से इसकी जो जांच रिपोर्ट साझा की है, उसमें जानवरों की चर्बी (बीफ और सूअर की चर्बी, मछली का तेल) होने की पुष्टि ने बवाल मचा दिया है।

टीडीपी का वाईएसआर कांग्रेस पर है मिलावट को नजरअंदाज करने का आरोप
चंद्रबाबू नायडू का पूर्ववर्ती सरकार पर आरोप है कि उसने मिलावट की जांच को नजरअंदाज किया। वहीं रेड्डी का दावा है कि उनके पांच साल के कार्यकाल में 18 सैंपल खारिज किए गए थे।

'रिवर्स टेंडटरिंग' की वजह से मिलावटखोरों को मिला मौका?
2019 में जब जगन मुख्यमंत्री बने थे, तब उन्होंने घी खरीद की प्रक्रिया 'रिवर्स टेंडटरिंग' से बदल दी थी, जो कि केंद्र की नीति के अनुकूल बताया जाता है। इस प्रक्रिया में सफल बोली लगाने वाले को फिर से बोली लगाने का मौका दिया जाता है। रेड्डी के कार्यकाल में टीटीडी ने ई-टेंडरिंग की प्रक्रिया शुरू हो गई और इसके तहत कई वेंटर्स को घी सप्लाई करने की अनुमति मिल गई। इस दौरान जनवरी 2021 में कर्नाटक को-ऑपरेटिव प्रोड्यूसर्स फेडरेशन (नंदिनी घी के निर्माता) को ठेका मिला।

सबसे कम बोली में सप्लाई करने के बाद भी टीटीडी ने नहीं की संदेह की जांच
लेकिन, दिक्कत तब शुरू हुई जब तमिलनाडू स्थित एआर डेयरी फूड मार्च 2024 में 320 रुपए प्रति किलो घी देने की बोली लगाई और इस साल मई में उसे इसका ठेका मिल गया। टीडीपी सरकार का कहना है कि इतनी कम कीमत देखकर ही तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम TTD को संदेह हो जाना चाहिए था, और उसे जांच के लिए सैंपल बाहर भेजना चाहिए था। क्योंकि, टीटीडी के पास मिलावट जांचने के लिए अपनी कोई टेस्टिंग यूनिट नहीं है।

रिकॉर्ड से पता चलता है कि रेड्डी के कार्यकाल में जो बोली लगाई गई थी, वह अबतक की सबसे कम बोली थी। इससे पहले जब टीडीपी सत्ता में थी तो 2018 के जनवरी से जून के बीच प्रीमियर एग्री फूड्स ने 320.10 प्रति किलो घी की सप्लाई की थी। वैसे टीटीडी बोर्ड के एक पूर्व अधिकारी ने पहचान नहीं जाहिर होने देने की शर्त पर ईटी से कहा है, 'हमने सभी स्थापित प्रक्रियाओं का पालन किया। टीटीडी ने इन नमूनों का परीक्षण अपने यहां ही किया। मिलावट की जांच पहले भी नहीं की जाती थी। यह महंगा है और प्रति सैंपल 70,000 रुपए की लागत आती है।'

पांच साल में एक भी सैंपल जांच के लिए बाहर नहीं भेजा- टीडीपी
टीडीपी प्रवक्ता ज्योत्सना तिरुनागरी का कहना है, 'टीटीडी के रिकॉर्ड के मुताबिक 2019 और 2024 के बीच एक भी सैंपल को मिलावट की जांच के लिए बाहर नहीं भेजा गया। यह टीटीडी अधिकारियों की ओर से घोर हुई लापरवाही है और साफ तौर पर उच्चतम स्तर पर मिलीभगत जाहिर करता है। खास तौर पर क्योंकि, एआर डेयरी का 320 रुपए का मूल्य पांच वर्षों में सबसे कम है, इसलिए पिछली सरकार को मिलावट परीक्षण के लिए नमूने बाहर भेजने चाहिए थे।'

एआर डेयरी फूड के सैंपल में मिलावट पाई गई
इस साल टीडीपी के सत्ता में आने के बाद जून से जुलाई के बीच टीटीडी ने 8 नमूनों की जांच करवाई, जिसमें चार एआर डेयरी फूड (इसमें मिलावट पाई गई) के थे और दो-दो अल्फा मिल्क फूड्स और केएमएफ (दोनों जांच में सफल रहे) के थे। इसके बाद ही एआर डेयरी को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया और उसने जुलाई से घी नहीं सप्लाई की है। इस मामले में केंद्र सरकार ने भी विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

भगवान खुद चाहते थे कि मैं उनके लड्डू प्रसादम के बारे में बोलूं- नायडू
मुख्यमंत्री नायडू का कहना है, 'मैंने उनसे (टीटीडी के नए एग्जिक्यूटिव ऑफिसर) पहाड़ी मंदिर की पवित्रता बहाल करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने को कहा है और वे इसे प्रतिदिन प्रचारित किए बिना चुपचाप कर रहे हैं। मुझे लगता है कि भगवान खुद चाहते थे कि मैं उनके लड्डू प्रसादम के बारे में बोलूं। हम तो बस साधन मात्र हैं, सब कुछ तो भगवान ही करते हैं। यह मेरा दृढ़ विश्वास है। वे रिवर्स टेंडरिंग के नाम पर घी की गुणवत्ता से कैसे समझौता कर सकते हैं।'

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