तिरुपति लड्डू ने जून में बिक्री के तोड़े सारे रिकॉर्ड, क्‍यों विवादों में आया था TTD का पवित्र प्रसादम?

Tirupati Laddu Record Sales: दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश में स्थित तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) ने एक नया ऐतिहासिक रिकॉर्ड दर्ज किया है। भगवान वेंकटेश्वर के पवित्र धाम तिरुमला में जून 2026 के महीने में श्रीवारी लड्डू प्रसादम की बिक्री ने अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इस महीने में कुल 1,26,81,805 लड्डुओं की रिकॉर्ड तोड़ बिक्री हुई है।

यह आंकड़ा न केवल मंदिर प्रशासन के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह तिरुपति बालाजी के प्रति भक्तों की अटूट आस्था का प्रमाण है। ये वो ही तिरुपति मंदिर के लड्डू हैं जिनकी शुद्धता को लेकर सितंबर 2024 में उठे आरोपों ने पूरे देश में हलचल मचा दी थी। लेकिन तमाम विवादों और शोर के बावजूद तिरुपति के श्रीवारी लड्डू की आस्था अडिग रही और रिकॉर्ड बिक्री ने यह संदेश दिया कि श्रद्धा को किसी भी तरह के संदेह या षड्यंत्र से डिगाया नहीं जा सकता।

Tirupati Laddu Record Sales

रिकॉर्ड तोड़ लड्डू की बिक्री की क्‍या है वजह?

मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही थी, जिसका सीधा असर महाप्रसाद की मांग पर पड़ा है। गर्मियों की छुट्टियों के चलते मंदिर में उमड़ी भारी भीड़ को इसकी मुख्य वजह माना जा रहा है।

टीटीडी द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, साल 2026 की गर्मियों की तिमाही के दौरान लड्डू प्रसादम की बिक्री में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। इस साल अप्रैल के महीने में मंदिर प्रशासन ने 1,11,96,170 लड्डुओं का वितरण किया था। इसके बाद मई महीने में यह संख्या बढ़कर 1,21,35,528 तक पहुंच गई। वहीं, जून में इस आंकड़े ने सारे रिकॉर्ड ध्वस्त करते हुए 1.26 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया।

लड्डुओं की बिक्री में हो रही लगातार बढ़ोत्‍तरी

जून 2024 1,02,64,364
जून 2025 1,19,21,353 16.14%
जून 2026 1,26,81,805 6.37%

दो साल पहले यानी जून 2024 के आंकड़ों पर नजर डालें, तो उस समय 1,02,64,364 लड्डुओं की बिक्री दर्ज की गई थी। इसके मुकाबले जून 2026 की बिक्री में 24,17,441 यूनिट्स की भारी बढ़ोतरी हुई है। दो साल की इस अवधि में यह वृद्धि दर 23.55 प्रतिशत रही है।

मंदिर की रसोई में की गई तैयारी

टीटीडी के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, इस ऐतिहासिक आंकड़े को छूने के पीछे मंदिर प्रशासन की ठोस तैयारियां थीं। गर्मियों के सीजन में उमड़ने वाले जनसैलाब का पहले से अनुमान लगाते हुए प्रशासन ने मंदिर की पवित्र रसोई 'श्रीवारी पोटु' में प्रतिदिन बनने वाले लड्डुओं की क्षमता को काफी बढ़ा दिया था।

इस मांग को पूरा करने के लिए पवित्र रसोई की क्षमता बढ़ाने के साथ ही कच्चे माल की आपूर्ति को भी बेहद मजबूत बनाया गया था। अधिकारियों ने सुनिश्चित किया कि प्रसादम के लिए आवश्यक शुद्ध घी, चीनी और इलायची जैसे हाई क्‍वालिटी वाले सामान की कमी न हो। इसके चलते लंबी कतारों के बावजूद किसी भी काउंटर पर कमी या देरी की स्थिति नहीं बनी।

ऑनलाइन टिकट बुकिंग

भक्तों की सुविधा के लिए टीटीडी ने दर्शन के प्रोसेस को डिजिटल तरीके से लगातार मजबूत किया है। ऑनलाइन टिकट बुकिंग और व्यवस्थित टोकन सिस्‍टम के कारण अब भक्तों का काफी समय बचता है, जिससे वे बिना किसी परेशानी के प्रसादम काउंटर तक पहुंच पा रहे हैं।

मंदिर में बढ़ाए गए प्रसाद काउंटर

मंदिर के आसपास प्रसादम वितरण काउंटरों की संख्या भी बढ़ाई गई है। इन काउंटरों पर डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और कुशल कर्मियों की तैनाती के चलते वितरण प्रक्रिया बेहद तेज हो गई है।

क्‍यों विवादों में आया था तिरुपति मंदिर का पवित्र लड्डू?

तिरुपति मंदिर का लड्डू विवाद सितंबर 2024 में शुरू हुआ, जब आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने पिछली सरकार के दौरान प्रसादम के घी में जानवरों की चर्बी की मिलावट का आरोप लगाया। गुजरात की एक लैब रिपोर्ट में इसकी पुष्टि का दावा किया गया, जिसके बाद देश भर के भक्तों में भारी आक्रोश फैल गया और मंदिर में शुद्धि अनुष्ठान किए गए। बाद में, विशेष जांच दल (SIT) की जांच में सामने आया कि जानवरों की चर्बी के बजाय घी में केमिकल्स और पाम ऑयल की मिलावट की गई थी। इस मामले में वित्तीय अनियमितताओं के चलते प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया और SIT ने पूर्व अधिकारियों व डेयरी विशेषज्ञों सहित 36 लोगों को आरोपी बनाया।

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