Tirupati Laddoo Row: घी में एनिमल फैट को लेकर कंपनी का अजीबो-गरीब बचाव, जानिए क्या कहा
तिरुपति लड्डू विवाद को लेकर जिस घी बनाने वाली कंपनी पर मिलावटी घी सप्लाई करने का आरोप लगा है, उसकी ओर से अजीबो-गरीब सफाई दी गई है। कंपनी का कहना है कि यह सब हमें बदनाम करने के लिए किया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि घी में मछली का फैट पाया गया है, जबकि मछली का तेल घी से कहीं ज्यादा महंगा होता है, ऐसे में यह आरोप निराधार है। कंपनी के पदाधिकारी ने आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
दरअसल मंदिर का प्रबंधन देखने वाली कमेटी टीटीडी ने घी सप्लाई करने वाली कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। इस बीच कंपनी के कर्मचारी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि आरोप बेबुनियाद हैं क्योंकि घी से कहीं ज्यादा महंगा मछली का तेल होता है।

सूंघकर ही पकड़ा जा सकता है
कंपनी के क्वालिटी कंट्रोल ऑफिसर कनान ने बताया कि इस तरह की कोई भी मिलावट घी की गंध से आसानी से पकड़ में आ जाएगी। ये जो तमाम आरोप लगाए जा रहे हैं कि घी में वेजीटेबल ऑयल,एनिमल फैट की मिलावट है, वह हमारे बिजनेस को काफी प्रभावित कर रहा है।
लेकिन ये जो दावा किया जा रहा है कि घी में मछली का तेल है, यह काफी महंगा होता है, इस तरह की किसी भी मिलावट को सूंघकर ही आसानी से पकड़ा जा सकता है।
102 क्वालिटी चेक
अधिकारी का कहना है कि हमारी कंपनी 1998 से घी बना ही है, हमारा घी 102 क्वालिटी चेक से होकर गुजरता है। कंपनी ने जिस घी को मंदिर को सप्लाई किया था, उसे टीटीडी ने अपनी अनुमति दी थी, उनके पास करने के बाद ही यह घी सप्लाई किया गया था।
टीटीडी ने भी चेक किया सैंपल
हमारे घी के सैंपल को पहले नेशनल लैब में टेस्ट किया जाता है, इसके बाद ही इसे टीटीडी को भेजा जाता है। टीटीडी के फूड सेफ्टी ऑफिसर द्वारा सैंपल को एक बार फिर से चेक किया जाता है।












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