इंडियन आर्मी की मुस्तैदी से भारतीय सीमा के बहुत अंदर तक दाखिल नहीं हो सके चीनी जवान
नई दिल्ली। चीनी सैनिकों ने लद्दाख सेक्टर के गलवान घाटी के काफी अंदर तक दाखिल होने की तैयारी कर ली थी लेकिन सही समय पर भारतीय सेना ने जवानों की तैनाती कर दी। सही समय पर लिए गए इस फैसले से चीनी जवानों की कोशिश सफल नहीं हो सकी। न्यूज एजेंसी एएनआई ने इस बात की जानकारी दी है। सूत्रों की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक चीनी सेना ने लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) में गलवान नाला इलाके में मई के पहले हफ्ते में अपने जवान भेजने शुरू कर दिए थे।

भारतीय सीमा में अपना दावा करना चाहते थे चीनी
चीनी जवान भारत की सीमा के काफी अंदर तक दाखिल होकर भारत की सीमा पर अपना दावा करना चाहते थे। शुरुआत में प्रतिक्रिया में बाधा आई लेकिन जवानों की जल्द तैनाती ने चीन की योजनाओं को विफल कर दिया। अतिरिक्त जवानों की तैनाती से संवेदनशील बिंदुओं पर भारत का दावा मजबूत हुआ। साथ ही चीनी सेना के जवान बहुत अंदर तक घुसपैठ नहीं कर पाए। चीनी जवान नाला के जरिए सीमा में दाखिल हो गए थे और वह पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 के करीब स्थित थे। यह प्वाइंट दौलत बेग ओल्डी इलाके में आता है। सूत्रों का कहना है कि चीनी जवाना अभी तक गलवान इलाके में 114 ब्रिगेड के करीब मौजूद हैं जो कि पीपी-15 से कुछ ही दूरी पर है।

गलवान नाले पर बन रहा है एक पुल
सेना इस समय गलवान नाले के करीब पेट्रोलिंग प्वाइंट पर एक ब्रिज का निर्माण कर रही है। भारत ने पुल के करीब जवानों की दो कंपनियां तैनात कर रखी हैं। सूत्रों का कहना है कि चीनी सेना को सड़क निर्माण से खतरा महसूस होने लगा है। पिछले दो-तीन वर्षों से दौलत बेग ओल्डी में निर्माण कार्य हो रहा है। भारत और चीन के बीच 3500 किलोमीटर लंबी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी एलएसी है। इसके एक छोर पर कश्मीर तो एक छोर पर म्यांमार आता है। पिछले दो हफ्तों से पूर्वी लद्दाख में तनाव बरकरार है।

चीन को जवाब देने की तैयारी पूरी
भारत की तरफ से एलएसी पर चीन को जवाब देने के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है। भारत अब दारबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी पर बन रही सड़क को चीन की तरफ से होने वाले खतरे को लेकर भी चिंतित है। गलवान नदी पर बना रास्ता भारत ने अपनी तरफ बनाया है। इस 255 किलोमीटर लंबी सड़क का उद्घाटन पिछले वर्ष रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया था। इसके साथ हा श्योक नदी पर इस रास्ते पर बने 1400 फीट ऊंचे पुल का उद्घाटन भी रक्षा मंत्री ने किया है। बुधवार को चीन के विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया था कि सीमा पर हालात स्थिर और नियंत्रण में हैं।

डारबुक-श्योक-डीबीओ पर बन रही सड़क से पारा हाई
पिछले वर्ष बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) ने डारबुक-श्योक-डीबीओ यानी दौलत बेग ओल्डी में एक सड़क का निर्माण शुरू किया था। यह हिस्सा भारत की सीमा में पड़ता है। जिस जगह पर सड़क निर्माण हो रहा है वह भारतीय सीमा के 10 किलोमीटर के अंदर है और तकनीकी तौर पर भारत की सीमा है। लेकिन चीन इस बात को मानने पर राजी नहीं है। यह सड़क खासतौर पर गलवान नदी से होकर गुजरती है। सड़क को एलएसी से जोड़ने के मकसद से भारत इस सड़क का निर्माण करा रहा है। चीन को इस बात पर ही आपत्ति है।
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62 की पहली लड़ाई गलवान घाटी में
भारत और चीन के बीच 3500 किलोमीटर लंबी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी एलएसी है। इसके एक छोर पर कश्मीर तो एक छोर पर म्यांमार आता है। पिछले दो हफ्तों से सिक्किम और लद्दाख में सब-कुछ ठीक नहीं है। जब आप इतिहास पर नजर दौड़ाएंगे तो आपको पता चल जाएगा कि गलवान घाटी का भारत और चीन से क्या रिश्ता है। भारत और चीन सन् 1962 में पहली बार जंग के मैदान में आमने-सामने थे। गलवान घाटी वही जगह है जहां पर 20 अक्टूबर 1962 को जंग की पहली लड़ाई हुई थी। एतिहासिक दस्तावेजों के मुताबिक 62 में लद्दाख सेक्टर की गलवान घाटी में ही भारत और चीन के सैनिकों के बीच पहली झड़प हुई थी। गलवान घाटी को चीन शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र का हिस्सा मानता है।












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